कहानी "काली शलवार" में एक महिला, सुलताना, अपने अतीत को याद करती है जब वह अंबाला छावनी में थी और वहां उसके पास कई विदेशी ग्राहक आते थे। वह उनसे अंग्रेजी के कुछ वाक्य सीख गई थी, लेकिन जब वह दिल्ली आई, तो उसका कारोबार ठीक से नहीं चल पाया। यहाँ उसे केवल कुछ ग्राहक ही मिले, और सभी ने उसे बहुत कम पैसे दिए। सुलताना ने अपने दाम बढ़ाने की कोशिश की, लेकिन कोई भी उसकी बात नहीं मानता था, जिससे वह निराश हो गई। दिल्ली में उसके ग्राहक उसे कमतर समझते थे, जबकि अंबाला में वह अपने काम में सफल थी। कहानी सुलताना की संघर्ष और निराशा को दर्शाती है, जब वह अपने पुराने दिनों को याद करती है और नई जगह पर अपने अस्तित्व के लिए जूझती है।
काली सलवार
Saadat Hasan Manto
द्वारा
हिंदी लघुकथा
Four Stars
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विवरण
दिल्ली आने से पहले वो अंबाला छावनी में थी जहां कई गोरे इस के ग्राहक थे। इन गोरों से मिलने-जुलने के बाइस वो अंग्रेज़ी के दस पंद्रह जुमले सीख गई थी, उन को वो आम गुफ़्तगु में इस्तिमाल नहीं करती थी लेकिन जब वो दिल्ली में आई और उस का कारोबार न चला तो एक रोज़ उस ने अपनी पड़ोसन तमंचा जान से कहा। “दिस लीफ़...... वेरी बैड।” यानी ये ज़िंदगी बहुत बुरी है जबकि खाने ही को नहीं मिलता।
मंटो अपने ज़माने के बदनाम लेखकों में से एक हैं जिन्हें सरकार और समाज दोनों ही पसंद नहीं करते थे| उसकी वजह थी उनकी सीधी सटीक बातें जो कहानियां कम और सवा...
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