कहानी "आजाद-कथा" के इस अंश में मियाँ आजाद की स्थिति का वर्णन किया गया है। आजाद एक ऐसे व्यक्ति हैं जिनके पैर में रोग है और वे इधर-उधर घूमते हुए थक कर सराय में सो जाते हैं। एक दिन, जब वे सराय में पहुँचते हैं, वहाँ बहुत चहल-पहल होती है। रोटियाँ पक रही हैं और भठियारिनें मुसाफिरों को आकर्षित कर रही हैं। एक मोटा आदमी चारपाई पर बैठते ही गिर जाता है और मदद के लिए चिल्लाता है। भठियारिनें उसे उठाने में मदद करती हैं, लेकिन वह कपड़ों के फटने और गिरने की शिकायत करता है। भठियारी उसे जवाब देती है कि वह खुद अपनी स्थिति के लिए जिम्मेदार है। इसके बाद, आजाद एक हकीम से मिलते हैं जो गोपामऊ से आया है। बातचीत में आजाद हकीम को तबीब कहने पर हकीम जवाब देता है कि वह खुद तबीब हैं। यह संवाद आजाद की स्थिति और उनके चारों ओर के लोगों के साथ उनके बातचीत के तरीके को दर्शाता है। कहानी में हंसी-मजाक और संवाद के माध्यम से चरित्रों की विशेषताएँ और उनके जीवन की कठिनाइयाँ उजागर होती हैं। आजाद-कथा - खंड 1 - 16 Munshi Premchand द्वारा हिंदी फिक्शन कहानी 3.1k Downloads 7.9k Views Writen by Munshi Premchand Category फिक्शन कहानी पढ़ें पूरी कहानी मोबाईल पर डाऊनलोड करें विवरण मियाँ आजाद के पाँव में तो आँधी रोग था। इधर-उधर चक्कर लगाए, रास्ता नापा और पड़ कर सो रहे। एक दिन साँड़नी की खबर लेने के लिए सराय की तरफ गए, तो देखा, बड़ी चहल-पहल है। एक तरफ रोटियाँ पक रही हैं, दूसरी तरफ दाल बघारी जाती है। भठियारिनें मुसाफिरों को घेर-घार कर ला रही हैं, साफ-सुथरी कोठरियाँ दिखला रही हैं। एक कोठरी के पास एक मोटा-ताजा आदमी जैसे ही चारपाई पर बैठा, पट्टी टूट गई। आप गड़ाप से झिलँगे में हो रहे। अब बार-बार उचकते है मगर उठा नहीं जाता। चिल्ला रहे हैं कि भाई, मुझे कोई उठाओ। आखिर भठियारों ने दाहिना हाथ पकड़ा, बाईं तरफ मियाँ आजाद ने हाथ दिया और आपको बड़ी मुश्किल से खींच खाँच के निकाला। झिलँगे से बाहर आए, तो सूरत बिगड़ी हुई थी। कपड़े कई जगह मसक गए थे। झल्ला कर भठियारी से बोले - वाह, अच्छी चारपाई दी! जो मरे हाथ-पाँव टूट जाते, या सिर फूट जाता, तो कैसी होती? Novels आजाद-कथा - खंड 1 मियाँ आजाद के बारे में, हम इतना ही जानते हैं कि वह आजाद थे। उनके खानदान का पता नहीं, गाँव-घर का पता नहीं खयाल आजाद, रंग-ढंग आजाद, लिबास आजाद दिल आजाद... More Likes This BEYOND THE MISSION Mishaal Vanya - 2 द्वारा insha कुत्रिम बुद्धिमता - 1 द्वारा Ramesh Desai The Legend Of Divyanshi - 1 द्वारा साहिल कैंथला अनकहा सच ( भाग - 1) द्वारा Vishakha Pareek कुदरत का कानून..- 2 द्वारा shilpi वो रात जब सब बदल गया - 1 द्वारा Ishaaa LAST STAGE - 1 द्वारा Muhib Khan अन्य रसप्रद विकल्प हिंदी लघुकथा हिंदी आध्यात्मिक कथा हिंदी फिक्शन कहानी हिंदी प्रेरक कथा हिंदी क्लासिक कहानियां हिंदी बाल कथाएँ हिंदी हास्य कथाएं हिंदी पत्रिका हिंदी कविता हिंदी यात्रा विशेष हिंदी महिला विशेष हिंदी नाटक हिंदी प्रेम कथाएँ हिंदी जासूसी कहानी हिंदी सामाजिक कहानियां हिंदी रोमांचक कहानियाँ हिंदी मानवीय विज्ञान हिंदी मनोविज्ञान हिंदी स्वास्थ्य हिंदी जीवनी हिंदी पकाने की विधि हिंदी पत्र हिंदी डरावनी कहानी हिंदी फिल्म समीक्षा हिंदी पौराणिक कथा हिंदी पुस्तक समीक्षाएं हिंदी थ्रिलर हिंदी कल्पित-विज्ञान हिंदी व्यापार हिंदी खेल हिंदी जानवरों हिंदी ज्योतिष शास्त्र हिंदी विज्ञान हिंदी कुछ भी हिंदी क्राइम कहानी