राजेश, जो एक सहायक के रूप में दिल्ली आया, ने अपनी माँ को अपने साथ लाया, लेकिन उसके पिता गाँव में रहना पसंद करते थे। राजेश की शादी सरोज नाम की एक संस्कारी लड़की से हुई, जिसका रिश्ता उसके पिता ने बिना पूछे तय किया। शादी के बाद, राजेश और सरोज दिल्ली आ गए। एक साल बाद, सरोज ने एक बेटे, राजू, को जन्म दिया, जिससे पूरे परिवार में खुशी का माहौल था। कुआं पूजन के कार्यक्रम के बाद, राजेश ने सरोज और राजू को दिल्ली ले आया, जहाँ उन्होंने राजू का अच्छे से पालन-पोषण किया। जैसे-जैसे राजू बड़ा हुआ, वह स्कूल जाने लगा, और राजेश उसे स्कूल बस में चढ़ाकर भेजता था। सरोज का बेटा Ved Prakash Tyagi द्वारा हिंदी लघुकथा 58.1k 2.1k Downloads 12.6k Views Writen by Ved Prakash Tyagi Category लघुकथा पढ़ें पूरी कहानी मोबाईल पर डाऊनलोड करें विवरण उस भावुकता का क्षण में राजू बह गया और उसने उस गरीब की बेटी से उसी क्षण शादी कर ली, बहू को लेकर वह घर आया तो माँ बाप हतप्रभ रह गए, लेकिन बात पूरे शहर में जंगल की आग की तरह फैल गयी। More Likes This Childhood Friends - Episode 3 द्वारा unknownauther सजा.....बिना कसूर की - 1 द्वारा Soni shakya प्रेरणास्पंदन - 2-3 द्वारा Bhupendra Kuldeep मंजिले - भाग 46 द्वारा Neeraj Sharma हमको ओढ़ावे चदरिया अब चलती बिरया द्वारा Devendra Kumar डायरी का वो आखरी पन्ना - 4 द्वारा Std Maurya कहानी में छुपी एक सन्देश - 1 द्वारा Std Maurya अन्य रसप्रद विकल्प हिंदी लघुकथा हिंदी आध्यात्मिक कथा हिंदी फिक्शन कहानी हिंदी प्रेरक कथा हिंदी क्लासिक कहानियां हिंदी बाल कथाएँ हिंदी हास्य कथाएं हिंदी पत्रिका हिंदी कविता हिंदी यात्रा विशेष हिंदी महिला विशेष हिंदी नाटक हिंदी प्रेम कथाएँ हिंदी जासूसी कहानी हिंदी सामाजिक कहानियां हिंदी रोमांचक कहानियाँ हिंदी मानवीय विज्ञान हिंदी मनोविज्ञान हिंदी स्वास्थ्य हिंदी जीवनी हिंदी पकाने की विधि हिंदी पत्र हिंदी डरावनी कहानी हिंदी फिल्म समीक्षा हिंदी पौराणिक कथा हिंदी पुस्तक समीक्षाएं हिंदी थ्रिलर हिंदी कल्पित-विज्ञान हिंदी व्यापार हिंदी खेल हिंदी जानवरों हिंदी ज्योतिष शास्त्र हिंदी विज्ञान हिंदी कुछ भी हिंदी क्राइम कहानी