कबीरदास एक महान संत और फक्कड़ साधू थे, जिन्होंने सामाजिक एकता के महत्व को समझाया और पाखंड के खिलाफ आवाज उठाई। उनका जन्म 1440 में एक विधवा ब्राह्मणी के पुत्र के रूप में हुआ, जिसे उन्होंने त्याग दिया। बाद में उन्हें एक जुलाहे नीरू और उसकी पत्नी नीमा ने अपने बच्चे की तरह अपनाया। कबीर ने जुलाहा होने का गर्व से उल्लेख किया। कबीरदास के गुरु स्वामी रामानंद थे, जिन्होंने भक्ति आंदोलन के माध्यम से समाज के वंचित वर्गों को राम की भक्ति से जोड़ा और जाति-पात के भेदभाव का विरोध किया। कबीर ने रामानंद से दीक्षा लेने की कोशिश की, और एक घटना के दौरान, जब रामानंद का पैर कबीर पर पड़ा, तब उन्होंने 'राम राम' शब्द को अपना गुरूमंत्र मान लिया। कबीरदास ने राम को निराकार ब्रह्म के रूप में देखा, जो सभी जीवों में व्याप्त हैं। उन्होंने राम को सभी के लिए सुलभ और कर्मकांडों से मुक्त बना दिया। कबीर ने राम के साथ अपने संबंध को मानवीय रूप में प्रस्तुत किया, कभी उन्हें पति और स्वयं को पत्नी के रूप में दर्शाया। उनकी वाणी में मानवता और प्रेम का संदेश था। कबिरा खड़ा बजार में Ashish Kumar Trivedi द्वारा हिंदी जीवनी 9.5k 7.7k Downloads 31.3k Views Writen by Ashish Kumar Trivedi Category जीवनी पढ़ें पूरी कहानी मोबाईल पर डाऊनलोड करें विवरण कबीरदास एक महान संत थे। जिनकी वाणी ने वह अमृत बरसाया जिसमें आज भी कई झुलसती आत्माएं तृप्ति पाती हैं। संसार रूपी मरुथल में भटकते लोगों को उनके उपदेशों ने सही राह दिखाई। कबीरदास की वाणी आज के इस विषम समय में भी उतनी ही प्रभावी है जितनी उस समय थी। आज का समाज भी धर्म व जाति के दायरों में बंटा हुआ है। दिन पर दिन यह दायरे और संकुचित हो रहे हैं। धर्म का अभिप्राय ईश्वर भक्ति नहीं बल्कि महज़ पूजा पाठ तथा अन्य धार्मिक कार्यकलापों तक ही सिमट कर रह गया है। ऐसे में कबीरदास की उस वाणी की बहुत आवश्कता है जो हमारी धर्मभीरुता पर करारा प्रहार कर हमें धर्म के संकीर्ण रूप से बाहर निकाल कर सही राह दिखा सकें। More Likes This यादो की सहेलगाह - रंजन कुमार देसाई (2) द्वारा Ramesh Desai नकल से कहीं क्रान्ति नहीं हुई - 1 द्वारा Dr. Suryapal Singh अवसान विहीन अरुणेश द्वारा नंदलाल मणि त्रिपाठी प्रेमानंद जी : राधा-कृष्ण लीला के रसिक साधक - 1 द्वारा mood Writer जगमोहन शर्मा (अविस्मरणीय) द्वारा नंदलाल मणि त्रिपाठी Narendra Modi Biography - 1 द्वारा mood Writer मीरा बाई : कृष्ण भक्ति की अमर साधिका - 1 द्वारा mood Writer अन्य रसप्रद विकल्प हिंदी लघुकथा हिंदी आध्यात्मिक कथा हिंदी फिक्शन कहानी हिंदी प्रेरक कथा हिंदी क्लासिक कहानियां हिंदी बाल कथाएँ हिंदी हास्य कथाएं हिंदी पत्रिका हिंदी कविता हिंदी यात्रा विशेष हिंदी महिला विशेष हिंदी नाटक हिंदी प्रेम कथाएँ हिंदी जासूसी कहानी हिंदी सामाजिक कहानियां हिंदी रोमांचक कहानियाँ हिंदी मानवीय विज्ञान हिंदी मनोविज्ञान हिंदी स्वास्थ्य हिंदी जीवनी हिंदी पकाने की विधि हिंदी पत्र हिंदी डरावनी कहानी हिंदी फिल्म समीक्षा हिंदी पौराणिक कथा हिंदी पुस्तक समीक्षाएं हिंदी थ्रिलर हिंदी कल्पित-विज्ञान हिंदी व्यापार हिंदी खेल हिंदी जानवरों हिंदी ज्योतिष शास्त्र हिंदी विज्ञान हिंदी कुछ भी हिंदी क्राइम कहानी