इस कहानी में नेताजी की बयानबाजी और उसकी परिणामस्वरूप पार्टी की गिरती स्थिति का वर्णन किया गया है। नेताजी, जो हमेशा कुछ न कुछ बोलने की इच्छा रखते हैं, मीडिया के लिए एक आकर्षण बन गए हैं। हालांकि, उनकी अनियंत्रित बयानबाजियाँ पार्टी को नुकसान पहुँचा रही हैं। एक दिन पार्टी के हाई कमान ने नेताजी को बुलाकर उन्हें सलाह दी कि उन्हें चुप रहना चाहिए और उनकी प्रवक्ता की जिम्मेदारी किसी और को सौंप दी गई। नेताजी को अपनी गलती का अहसास होता है और वे समझते हैं कि उनकी बातें पार्टी के वोटों को कम कर रही हैं। अंततः, उन्होंने यह निर्णय लिया कि वे अब मौन रहेंगे और अपने गले को विश्राम देंगे। गले को विश्राम मिला Girish Pankaj द्वारा हिंदी लघुकथा 1.7k Downloads 5.8k Views Writen by Girish Pankaj Category लघुकथा पढ़ें पूरी कहानी मोबाईल पर डाऊनलोड करें विवरण Gale ko Visram Mila More Likes This मुक्त - भाग 14 द्वारा Neeraj Sharma पिता और अन्य कहानियाँ, भाग-1 द्वारा Anil Kundal Childhood Friends - Episode 3 द्वारा unknownauther सजा.....बिना कसूर की - 1 द्वारा Soni shakya प्रेरणास्पंदन - 2-3 द्वारा Bhupendra Kuldeep मंजिले - भाग 46 द्वारा Neeraj Sharma हमको ओढ़ावे चदरिया अब चलती बिरया द्वारा Devendra Kumar अन्य रसप्रद विकल्प हिंदी लघुकथा हिंदी आध्यात्मिक कथा हिंदी फिक्शन कहानी हिंदी प्रेरक कथा हिंदी क्लासिक कहानियां हिंदी बाल कथाएँ हिंदी हास्य कथाएं हिंदी पत्रिका हिंदी कविता हिंदी यात्रा विशेष हिंदी महिला विशेष हिंदी नाटक हिंदी प्रेम कथाएँ हिंदी जासूसी कहानी हिंदी सामाजिक कहानियां हिंदी रोमांचक कहानियाँ हिंदी मानवीय विज्ञान हिंदी मनोविज्ञान हिंदी स्वास्थ्य हिंदी जीवनी हिंदी पकाने की विधि हिंदी पत्र हिंदी डरावनी कहानी हिंदी फिल्म समीक्षा हिंदी पौराणिक कथा हिंदी पुस्तक समीक्षाएं हिंदी थ्रिलर हिंदी कल्पित-विज्ञान हिंदी व्यापार हिंदी खेल हिंदी जानवरों हिंदी ज्योतिष शास्त्र हिंदी विज्ञान हिंदी कुछ भी हिंदी क्राइम कहानी