महंगाई का अट्टहास एक मजेदार संवाद है, जिसमें महंगाई अपने प्रभाव और नेताओं की चालाकियों के बारे में बात करती है। चौराहे पर महंगाई खुश होकर हंस रही होती है, जबकि लोग उसे देख रहे होते हैं। विवेक उसे शांत करने की कोशिश करता है, लेकिन महंगाई कहती है कि लोग उसका नाम लेकर कुर्सी पा जाते हैं और जब सत्ता में आते हैं, तो वह फिर से बढ़ जाती है। निराशकुमार महंगाई से पूछता है कि वह क्यों गरीब जनता को परेशान कर रही है और कब वह देश से जाएगी। महंगाई ने जवाब दिया कि वह कभी नहीं जाएगी, क्योंकि वह हर जगह मौजूद है और नेताओं की लूट का हिस्सा बनी हुई है। विवेक उसे चेताता है कि ईमानदार लोग आएंगे और उसकी छुट्टी कर देंगे, लेकिन महंगाई इसका मजाक उड़ाते हुए कहती है कि विपक्ष भी उसके बिना भूखा मर जाएगा, क्योंकि वह ही उनकी राजनीतिक रोटी है। इस प्रकार, महंगाई ने अपनी स्थायी स्थिति और राजनीतिक खेलों में अपनी भूमिका को उजागर किया। महंगाई का अट्टहास Girish Pankaj द्वारा हिंदी लघुकथा 3k 2.2k Downloads 6.9k Views Writen by Girish Pankaj Category लघुकथा पढ़ें पूरी कहानी मोबाईल पर डाऊनलोड करें विवरण Mahengai ka Attahasya More Likes This ठुकराईन नयना देवी - 3 द्वारा Vandna Sharma लोकतंत्र की ज़मीनी सच्चाई - 1 द्वारा Std Maurya दिल्ली जिमखाना क्लब द्वारा Devendra Kumar Fake Boyfriend real Feelings - 1 द्वारा Mawaskar Pratigya कॉल - 1 द्वारा sky कुछ बातें मां बाप के दिल की । - 3 द्वारा miss k पढ़ाकू द्वारा Vandna Sharma अन्य रसप्रद विकल्प हिंदी लघुकथा हिंदी आध्यात्मिक कथा हिंदी फिक्शन कहानी हिंदी प्रेरक कथा हिंदी क्लासिक कहानियां हिंदी बाल कथाएँ हिंदी हास्य कथाएं हिंदी पत्रिका हिंदी कविता हिंदी यात्रा विशेष हिंदी महिला विशेष हिंदी नाटक हिंदी प्रेम कथाएँ हिंदी जासूसी कहानी हिंदी सामाजिक कहानियां हिंदी रोमांचक कहानियाँ हिंदी मानवीय विज्ञान हिंदी मनोविज्ञान हिंदी स्वास्थ्य हिंदी जीवनी हिंदी पकाने की विधि हिंदी पत्र हिंदी डरावनी कहानी हिंदी फिल्म समीक्षा हिंदी पौराणिक कथा हिंदी पुस्तक समीक्षाएं हिंदी थ्रिलर हिंदी कल्पित-विज्ञान हिंदी व्यापार हिंदी खेल हिंदी जानवरों हिंदी ज्योतिष शास्त्र हिंदी विज्ञान हिंदी कुछ भी हिंदी क्राइम कहानी