कहानी "अपना घर" में निधि एक लड़की है जो बचपन से सुनती आ रही है कि एक दिन उसे अपने माता-पिता के घर को छोड़कर अपने ससुराल जाना होगा। वह इस विचार से परेशान होती है और अपने परिवार से पूछती है कि उसका असली घर कहाँ है। समय के साथ, वह बड़ी होती जाती है और समाज में अपने घर का अर्थ समझने लगती है। एक दिन, जब उसका विवाह होने वाला होता है, घर को दुल्हन की तरह सजाया जाता है और मेहमानों का आना-जाना शुरू होता है। निधि विदाई के विचारों में खोई हुई है और उसके पास से महिलाओं की आवाजें सुनाई देती हैं, जो विदाई की पीड़ा को व्यक्त करती हैं। वे कहती हैं कि जवान बेटियाँ माता-पिता के लिए बोझ होती हैं और उन्हें जल्दी विदा कर देना अच्छा होता है। अंततः, निधि अपने माता-पिता के घर से विदा होकर अपने पति के घर में प्रवेश करती है। वहाँ उसका स्वागत भव्य होता है और उसे कुछ रस्मों के बाद आराम करने के लिए भेजा जाता है। लेकिन दादी की कड़ी आवाज से उसे जगाया जाता है और उसे संध्या पूजन के लिए तैयार होने का कहा जाता है। इसके बाद, परिवार के पुरुषों के भोजन के बाद, महिलाएँ भोजन करती हैं। इस प्रकार, निधि अपने नए घर में जीवन की नई शुरुआत करती है। अपना घर Dr kavita Tyagi द्वारा हिंदी लघुकथा 2k 4.8k Downloads 22.1k Views Writen by Dr kavita Tyagi Category लघुकथा पढ़ें पूरी कहानी मोबाईल पर डाऊनलोड करें विवरण प्रस्तुत कहानी मीरा भक्तिन हमारे समाज की उस संस्कृति से अवगत कराती है, जहां आज भी सोलहवीं शताब्दी की धारणाएं प्रचलित हैं । समय के प्रवाह के साथ युग बदल चुका है, किंतु यहां पर पुरुष सत्तात्मक समाज का दृष्टिकोण आज भी नहीं बदला है । वह स्त्रियों को दोयम दर्जे पर रखता है । पुरुषों की इस रूढ़ मानसिकता का शिक्षित सुसंस्कारित स्त्रियों पर पड़ता प्रतिकूल और नकारात्मक प्रभाव ज्यादा खींचने पर टूटने वाली युक्ति को चरितार्थ कर रहा है । इस नए परिवेश में मानव धर्म अपने प्राकृत अर्थ को खोज रहा है नए मूल्य मार्गदर्शन कर रहे हैं और उद्घोष कर रहे हैं कि समाज की मूल इकाई परिवार की सुख-संपन्नता तभी अक्षुण्ण रह सकती है, जब समय की मांग के अनुसार पुरुष अपनी मानसिकता में परिवर्तन करके स्त्री के महत्व को हृदयंगम करे । More Likes This उड़ान (1) द्वारा Asfal Ashok नौकरी द्वारा S Sinha रागिनी से राघवी (भाग 1) द्वारा Asfal Ashok अभिनेता मुन्नन द्वारा Devendra Kumar यादो की सहेलगाह - रंजन कुमार देसाई (1) द्वारा Ramesh Desai मां... हमारे अस्तित्व की पहचान - 3 द्वारा Soni shakya शनिवार की शपथ द्वारा Dhaval Chauhan अन्य रसप्रद विकल्प हिंदी लघुकथा हिंदी आध्यात्मिक कथा हिंदी फिक्शन कहानी हिंदी प्रेरक कथा हिंदी क्लासिक कहानियां हिंदी बाल कथाएँ हिंदी हास्य कथाएं हिंदी पत्रिका हिंदी कविता हिंदी यात्रा विशेष हिंदी महिला विशेष हिंदी नाटक हिंदी प्रेम कथाएँ हिंदी जासूसी कहानी हिंदी सामाजिक कहानियां हिंदी रोमांचक कहानियाँ हिंदी मानवीय विज्ञान हिंदी मनोविज्ञान हिंदी स्वास्थ्य हिंदी जीवनी हिंदी पकाने की विधि हिंदी पत्र हिंदी डरावनी कहानी हिंदी फिल्म समीक्षा हिंदी पौराणिक कथा हिंदी पुस्तक समीक्षाएं हिंदी थ्रिलर हिंदी कल्पित-विज्ञान हिंदी व्यापार हिंदी खेल हिंदी जानवरों हिंदी ज्योतिष शास्त्र हिंदी विज्ञान हिंदी कुछ भी हिंदी क्राइम कहानी