यह कहानी एक लिफ्ट के दृष्टिकोण से है, जो अपनी सुनने की क्षमता का वर्णन करती है। लिफ्ट अपने कानों के माध्यम से लोगों की बातें सुनती है, लेकिन बोल नहीं सकती। एक दिन सुबह, लिफ्ट में एक नया और घबराया हुआ युवक आता है, जिसके बारे में लिफ्ट में सोचती है कि वह कौन हो सकता है। वह उस युवक को देखकर अचंभित होती है और उसकी स्थिति पर विचार करती है। तभी दया भोंसले जी, जो पिछले सोलह वर्षों से लिफ्ट में आते-जाते हैं, लिफ्ट में प्रवेश करते हैं। युवक दया भोंसले जी से पूछता है कि क्या भर्ती विभाग चौदहवीं मंजिल पर है, और दया भोंसले जी हां कहते हुए उतर जाते हैं। लिफ्ट फिर से खाली होकर भूतल पर लौट जाती है, सोचते हुए कि अगर वह टैक्सी होती, तो सुबह के समय ऊपरी मंजिलों पर जाने से मना कर देती, क्योंकि वहां से लौटने का कोई साधन नहीं मिलता। लिफ्ट Neetu Singh Renuka द्वारा हिंदी लघुकथा 2.6k 1.7k Downloads 4.5k Views Writen by Neetu Singh Renuka Category लघुकथा पढ़ें पूरी कहानी मोबाईल पर डाऊनलोड करें विवरण हमने अक्सर समाज में और परिवारों में पीढ़ियों का अंतर देखा है। हमने पाया है कि कैसे उनकी आवश्यकताओं और अपेक्षाओं में कितना गहरा अंतर होता है। आइए एक लिफ्ट में खड़े एक ही कार्यलय की विभिन्न पीढ़ियों को देखें। More Likes This पढ़ाकू द्वारा Vandna Sharma कोन्निचिवा: माय देसी लव - 1 द्वारा Kajal Soam किराए का घर द्वारा Vandna Sharma First Love - 1 द्वारा Sah Ankita जिस जीवन में तुम थे - 2 द्वारा SHREYA INDUSHREE तुम्हें भी तो याद आती होगी - 1 द्वारा Anil Kundal मेरा साहित्य लेखन द्वारा Rakesh Kumar Sharma अन्य रसप्रद विकल्प हिंदी लघुकथा हिंदी आध्यात्मिक कथा हिंदी फिक्शन कहानी हिंदी प्रेरक कथा हिंदी क्लासिक कहानियां हिंदी बाल कथाएँ हिंदी हास्य कथाएं हिंदी पत्रिका हिंदी कविता हिंदी यात्रा विशेष हिंदी महिला विशेष हिंदी नाटक हिंदी प्रेम कथाएँ हिंदी जासूसी कहानी हिंदी सामाजिक कहानियां हिंदी रोमांचक कहानियाँ हिंदी मानवीय विज्ञान हिंदी मनोविज्ञान हिंदी स्वास्थ्य हिंदी जीवनी हिंदी पकाने की विधि हिंदी पत्र हिंदी डरावनी कहानी हिंदी फिल्म समीक्षा हिंदी पौराणिक कथा हिंदी पुस्तक समीक्षाएं हिंदी थ्रिलर हिंदी कल्पित-विज्ञान हिंदी व्यापार हिंदी खेल हिंदी जानवरों हिंदी ज्योतिष शास्त्र हिंदी विज्ञान हिंदी कुछ भी हिंदी क्राइम कहानी