कहानी "पहल तो करनी होगी" में रोशनी नाम की एक महिला सेमिनार में भाग लेती है, जहाँ उसे अपने अतीत और वर्तमान के बीच के बदलावों का सामना करना पड़ता है। प्रोफेसर असीम के साथ बातचीत करते हुए वह अपनी ज़िंदगी के विकल्पों पर विचार करती है। जब मंच पर उसे बोलने के लिए बुलाया जाता है, तो वह अपने विचारों में तीव्रता से कहती है कि समाज में बढ़ते अपराधों के लिए सभी जिम्मेदार हैं, न कि केवल शिक्षित युवकों या असामाजिक तत्वों को। रोशनी का तर्क है कि ये अपराधी हमारे परिवारों से ही आए हैं और अगर वे असामाजिक हैं, तो हमें अपने आप को सामाजिक कहने का क्या अधिकार है। वह समाज की स्थिति पर गहरा सवाल उठाती है और उन कारकों पर भी प्रकाश डालती है जो वर्तमान में समस्याओं का कारण बन रहे हैं, जैसे मोबाइल फोन और पोर्नोग्राफी। उसकी स्पीच सभी को चौंका देती है, क्योंकि वह परंपरागत विचारों को चुनौती देती है और समाज की वास्तविकता पर ध्यान केंद्रित करती है। पहल तो करनी होगी - 2 Kavita Nandan द्वारा हिंदी लघुकथा 2.2k 1.6k Downloads 8.3k Views Writen by Kavita Nandan Category लघुकथा पढ़ें पूरी कहानी मोबाईल पर डाऊनलोड करें विवरण यह एक लड़की पर केन्द्रित कहानी है जो शिक्षा प्राप्त कर प्रोफेसर बनती है लेकिन समाज में मौजूद पाखंड और पिछड़ेपन के कारण उसका जीवन चुनौतीपूर्ण हो जाता है. More Likes This नेहरू फाइल्स - भूल-113 द्वारा Rachel Abraham प्रतिघात: दिल्ली की वो शाम - 2 द्वारा Abantika हिकमत और कमाई द्वारा Devendra Kumar उड़ान (1) द्वारा Asfal Ashok नौकरी द्वारा S Sinha रागिनी से राघवी (भाग 1) द्वारा Asfal Ashok अभिनेता मुन्नन द्वारा Devendra Kumar अन्य रसप्रद विकल्प हिंदी लघुकथा हिंदी आध्यात्मिक कथा हिंदी फिक्शन कहानी हिंदी प्रेरक कथा हिंदी क्लासिक कहानियां हिंदी बाल कथाएँ हिंदी हास्य कथाएं हिंदी पत्रिका हिंदी कविता हिंदी यात्रा विशेष हिंदी महिला विशेष हिंदी नाटक हिंदी प्रेम कथाएँ हिंदी जासूसी कहानी हिंदी सामाजिक कहानियां हिंदी रोमांचक कहानियाँ हिंदी मानवीय विज्ञान हिंदी मनोविज्ञान हिंदी स्वास्थ्य हिंदी जीवनी हिंदी पकाने की विधि हिंदी पत्र हिंदी डरावनी कहानी हिंदी फिल्म समीक्षा हिंदी पौराणिक कथा हिंदी पुस्तक समीक्षाएं हिंदी थ्रिलर हिंदी कल्पित-विज्ञान हिंदी व्यापार हिंदी खेल हिंदी जानवरों हिंदी ज्योतिष शास्त्र हिंदी विज्ञान हिंदी कुछ भी हिंदी क्राइम कहानी