कहानी "संत जी बनाम 512" में मन्नू और शन्नो अपनी मां उर्मिला के हत्यारे को सजा दिलाने के लिए दृढ़ संकल्पित हैं। उनकी ताई शान्ति बाहर रो रही है, जिससे मन्नू और शन्नो की घृणा बढ़ती है। मन्नू ने फैसला किया है कि जब तक वह हत्यारे को मृत्युदंड नहीं दिला देता, तब तक वह नहीं सोएगा। संत जी ने मन्नू को बताया कि न्याय पाने के लिए पैसे की जरूरत होती है, और पैतृक संपत्ति बेचने का सुझाव दिया। मन्नू ने संत जी की बात को मानकर अपनी संपत्ति बेचने का निर्णय लिया, जबकि राम सहाय, जो खुद को निर्दोष मानता है, भी अपनी संपत्ति बेचकर वकील करने को मजबूर हुआ। छह वर्षों तक दोनों पक्ष अदालत में खड़े रहते हैं, एक-दूसरे के प्रति घृणा व्यक्त करते हैं और पैसे खर्च करते हैं। राम सहाय के परिवार को विश्वास है कि न्याय होगा और निर्दोष को सजा नहीं मिलेगी। कहानी में न्याय, प्रतिशोध और धन के प्रभाव को दर्शाया गया है। संत जी बनाम 512 Dr kavita Tyagi द्वारा हिंदी लघुकथा 1.5k 1.9k Downloads 6.2k Views Writen by Dr kavita Tyagi Category लघुकथा पढ़ें पूरी कहानी मोबाईल पर डाऊनलोड करें विवरण प्रस्तुत कहानी प्रेममय-त्यागमय रिश्तों पर भारी स्वार्थअंधता और धन लोलुपता को आधार बनाकर सृजित कहानी संत जी बनाम 512 का अंतिम भाग है। कहानी के इस भाग में संत जी का दोहरा चरित्र उजागर होता है । More Likes This पहली मुलाक़ात - 1 द्वारा puja नेहरू फाइल्स - भूल-113 द्वारा Rachel Abraham प्रतिघात: दिल्ली की वो शाम - 2 द्वारा Abantika हिकमत और कमाई द्वारा Devendra Kumar उड़ान (1) द्वारा Asfal Ashok नौकरी द्वारा S Sinha रागिनी से राघवी (भाग 1) द्वारा Asfal Ashok अन्य रसप्रद विकल्प हिंदी लघुकथा हिंदी आध्यात्मिक कथा हिंदी फिक्शन कहानी हिंदी प्रेरक कथा हिंदी क्लासिक कहानियां हिंदी बाल कथाएँ हिंदी हास्य कथाएं हिंदी पत्रिका हिंदी कविता हिंदी यात्रा विशेष हिंदी महिला विशेष हिंदी नाटक हिंदी प्रेम कथाएँ हिंदी जासूसी कहानी हिंदी सामाजिक कहानियां हिंदी रोमांचक कहानियाँ हिंदी मानवीय विज्ञान हिंदी मनोविज्ञान हिंदी स्वास्थ्य हिंदी जीवनी हिंदी पकाने की विधि हिंदी पत्र हिंदी डरावनी कहानी हिंदी फिल्म समीक्षा हिंदी पौराणिक कथा हिंदी पुस्तक समीक्षाएं हिंदी थ्रिलर हिंदी कल्पित-विज्ञान हिंदी व्यापार हिंदी खेल हिंदी जानवरों हिंदी ज्योतिष शास्त्र हिंदी विज्ञान हिंदी कुछ भी हिंदी क्राइम कहानी