यह कहानी आकाश और भूमि के बीच की बातचीत के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसमें आकाश अपनी माँ को अपने साथ अमेरिका ले जाने की योजना बनाता है। भूमि उसे समझाती है कि उनकी माँ को अकेले नहीं छोड़ा जा सकता और यह भी कि उसके माता-पिता की अनुमति के बिना ऐसा करना संभव नहीं है। भूमि सुझाव देती है कि उन्हें माँ को वहीं छोड़ देना चाहिए और बाद में आकर देख सकते हैं। आकाश अपने चाचा से माफी माँगता है, उन्हें समझाता है और कुछ पैसे देकर माँ को छोड़कर अमेरिका चला जाता है। वहाँ, गोमती, आकाश की माँ, अकेलेपन का सामना करती है। आकाश पहले तो नियमित रूप से फोन करता है, लेकिन धीरे-धीरे उसकी कॉल्स में कमी आ जाती है। गोमती को चाचा की मदद मिलती है, लेकिन वे भी बूढ़े हो चुके हैं और गोमती की देखभाल के लिए कोई सहारा नहीं बचा है। अंत में, गोमती पूरी तरह से अकेली हो जाती है। माँ का कंकाल - भाग दो Ved Prakash Tyagi द्वारा हिंदी लघुकथा 47.3k 2k Downloads 9.6k Views Writen by Ved Prakash Tyagi Category लघुकथा पढ़ें पूरी कहानी मोबाईल पर डाऊनलोड करें विवरण बेटे की हर खुशी में खुश होने वाली माँ को क्या पता था कि एक दिन इस बेटे के कारण ही उसकी मौत का स्वरूप इतना भयंकर होगा और बेटे को माँ की जगह मिलेगा सिर्फ कंकाल। More Likes This पढ़ाकू द्वारा Vandna Sharma कोन्निचिवा: माय देसी लव - 1 द्वारा Kajal Soam किराए का घर द्वारा Vandna Sharma First Love - 1 द्वारा Sah Ankita जिस जीवन में तुम थे - 2 द्वारा SHREYA INDUSHREE तुम्हें भी तो याद आती होगी - 1 द्वारा Anil Kundal मेरा साहित्य लेखन द्वारा Rakesh Kumar Sharma अन्य रसप्रद विकल्प हिंदी लघुकथा हिंदी आध्यात्मिक कथा हिंदी फिक्शन कहानी हिंदी प्रेरक कथा हिंदी क्लासिक कहानियां हिंदी बाल कथाएँ हिंदी हास्य कथाएं हिंदी पत्रिका हिंदी कविता हिंदी यात्रा विशेष हिंदी महिला विशेष हिंदी नाटक हिंदी प्रेम कथाएँ हिंदी जासूसी कहानी हिंदी सामाजिक कहानियां हिंदी रोमांचक कहानियाँ हिंदी मानवीय विज्ञान हिंदी मनोविज्ञान हिंदी स्वास्थ्य हिंदी जीवनी हिंदी पकाने की विधि हिंदी पत्र हिंदी डरावनी कहानी हिंदी फिल्म समीक्षा हिंदी पौराणिक कथा हिंदी पुस्तक समीक्षाएं हिंदी थ्रिलर हिंदी कल्पित-विज्ञान हिंदी व्यापार हिंदी खेल हिंदी जानवरों हिंदी ज्योतिष शास्त्र हिंदी विज्ञान हिंदी कुछ भी हिंदी क्राइम कहानी