आकाश की माँ गोमती अमेरिका में अपने बेटे को फोन करती है, लेकिन रोने के कारण कुछ नहीं कह पाती। उसके चाचा फोन लेकर आकाश को बताते हैं कि उसके पिता राघव का निधन हो गया है। आकाश, जो आईआईटी से पढ़ाई करके अमेरिका गया था, अपने पिता की तरक्की पर गर्व महसूस करता था, लेकिन अब उसे जल्दी लौटने की जरूरत है। आकाश ने अपने माता-पिता को साकेत में एक महंगे फ्लैट में शिफ्ट किया था ताकि वे एक बेहतर जीवन जी सकें। हालांकि, वहां जाकर राघव और गोमती खुद को अकेला महसूस करने लगे। पहले कुछ समय तक पड़ोसी उनसे मिलने आते रहे, लेकिन धीरे-धीरे यह सिलसिला बंद हो गया। राघव अकेलेपन के कारण अवसाद में रहने लगे और स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करने लगे। माँ का कंकाल Ved Prakash Tyagi द्वारा हिंदी लघुकथा 53.5k 1.8k Downloads 8.5k Views Writen by Ved Prakash Tyagi Category लघुकथा पढ़ें पूरी कहानी मोबाईल पर डाऊनलोड करें विवरण बेटा जब तरक्की पर तरक्की करता जाए तो माँ-बाप की खुशी का ठिकाना नहीं रहता, लेकिन क्या बेटा समझ पाया उनकी भावनाओं को जानने के लिए पढे मेरी नई कहानी माँ का कंकाल पहला और दूसरा भाग More Likes This लोकतंत्र की ज़मीनी सच्चाई - 1 द्वारा Std Maurya दिल्ली जिमखाना क्लब द्वारा Devendra Kumar Fake Boyfriend real Feelings - 1 द्वारा Mawaskar Pratigya कॉल - 1 द्वारा sky कुछ बातें मां बाप के दिल की । - 3 द्वारा miss k पढ़ाकू द्वारा Vandna Sharma कोन्निचिवा: माय देसी लव - 1 द्वारा Kajal Soam अन्य रसप्रद विकल्प हिंदी लघुकथा हिंदी आध्यात्मिक कथा हिंदी फिक्शन कहानी हिंदी प्रेरक कथा हिंदी क्लासिक कहानियां हिंदी बाल कथाएँ हिंदी हास्य कथाएं हिंदी पत्रिका हिंदी कविता हिंदी यात्रा विशेष हिंदी महिला विशेष हिंदी नाटक हिंदी प्रेम कथाएँ हिंदी जासूसी कहानी हिंदी सामाजिक कहानियां हिंदी रोमांचक कहानियाँ हिंदी मानवीय विज्ञान हिंदी मनोविज्ञान हिंदी स्वास्थ्य हिंदी जीवनी हिंदी पकाने की विधि हिंदी पत्र हिंदी डरावनी कहानी हिंदी फिल्म समीक्षा हिंदी पौराणिक कथा हिंदी पुस्तक समीक्षाएं हिंदी थ्रिलर हिंदी कल्पित-विज्ञान हिंदी व्यापार हिंदी खेल हिंदी जानवरों हिंदी ज्योतिष शास्त्र हिंदी विज्ञान हिंदी कुछ भी हिंदी क्राइम कहानी