इस कहानी में हर्ष अपने बेटे मनु की इंटरमीडिएट परीक्षा की तैयारी के लिए छुट्टी पर है। मनु अपने कर्तव्यों को निभाते हुए पढ़ाई कर रहा है, जबकि हर्ष उसे विज्ञान के सिद्धांत रटवा रहा है। मनु के दादा विक्रम इस अध्ययन पद्धति की आलोचना करते हैं और व्यवहारिक ज्ञान की आवश्यकता पर जोर देते हैं। हर्ष इस पर हंसते हैं और कहते हैं कि आजकल अंक प्रतिशत ही मायने रखता है, न कि ज्ञान। विक्रम ने मनु को व्यायाम के लिए पार्क ले जाने की योजना बनाई थी, लेकिन परीक्षा के तनाव के कारण वह स्थगित कर देते हैं। हर्ष विक्रम की बातों को नजरअंदाज करते हैं और मनु के लिए तनाव का अनुभव करते हैं। अंत में, विक्रम सुझाव देते हैं कि मनु को आराम करने का समय दिया जाए, ताकि वह बेहतर तरीके से पढ़ाई कर सके। कहानी ज्ञान और परीक्षा के दबाव के बीच संतुलन बनाने की कोशिश को दर्शाती है। मानवता के झरोखे Dr kavita Tyagi द्वारा हिंदी सामाजिक कहानियां 5.2k 2.4k Downloads 9.5k Views Writen by Dr kavita Tyagi Category सामाजिक कहानियां पढ़ें पूरी कहानी मोबाईल पर डाऊनलोड करें विवरण जीवन के वास्तविक अर्थ को भूलकर अर्थ(धन) के पीछे दौड़ते हुए व्यक्ति मानवता को भूलते जा रहे हैं । मानवीय मूल्य विघटित हो रहे हैं और जीवन-दर्शन निरन्तर बदलता जा रहा हैं। इसी विडंबना को लेकर यह कहानी की रचना की गयी है। More Likes This देवर्षि नारद की महान गाथाएं - 1 द्वारा Anshu पवित्र बहु - 1 द्वारा archana ज़िंदगी की खोज - 1 द्वारा Neha kariyaal अधूरा इश्क़ एक और गुनाह - 1 द्वारा archana सुकून - भाग 1 द्वारा Sunita आरव और सूरज द्वारा Rohan Beniwal विक्रम और बेताल - 1 द्वारा Vedant Kana अन्य रसप्रद विकल्प हिंदी लघुकथा हिंदी आध्यात्मिक कथा हिंदी फिक्शन कहानी हिंदी प्रेरक कथा हिंदी क्लासिक कहानियां हिंदी बाल कथाएँ हिंदी हास्य कथाएं हिंदी पत्रिका हिंदी कविता हिंदी यात्रा विशेष हिंदी महिला विशेष हिंदी नाटक हिंदी प्रेम कथाएँ हिंदी जासूसी कहानी हिंदी सामाजिक कहानियां हिंदी रोमांचक कहानियाँ हिंदी मानवीय विज्ञान हिंदी मनोविज्ञान हिंदी स्वास्थ्य हिंदी जीवनी हिंदी पकाने की विधि हिंदी पत्र हिंदी डरावनी कहानी हिंदी फिल्म समीक्षा हिंदी पौराणिक कथा हिंदी पुस्तक समीक्षाएं हिंदी थ्रिलर हिंदी कल्पित-विज्ञान हिंदी व्यापार हिंदी खेल हिंदी जानवरों हिंदी ज्योतिष शास्त्र हिंदी विज्ञान हिंदी कुछ भी हिंदी क्राइम कहानी