सूरज की गुनगुनी धूप में सामान से भरी पिकअप वैन नई सोसाइटी के गेट पर आकर रुकी। आज से सात साल की तारा की दुनिया बदलने वाली थी। ​"अरे विजय! वक्त पर पहुँच गया यार," तारा के पापा, आनंद जी ने मुस्कुराते हुए सामने वाले मकान से बाहर आते अपने पुराने कॉलेज फ्रेंड को गले से लगा लिया। ​बचपन की दोस्ती फिर से ताज़ा हो रही थी। एक तरफ बड़े सामान की शिफ्टिंग चल रही थी, तो दूसरी तरफ छोटी सी तारा भी पीछे नहीं रहना चाहती थी। उसने अपनी पूरी ताकत लगाकर अपनी किताबों और खिलौनों से भरा एक भारी कार्टन उठा लिया।

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ध्रुव की तारा - भाग 1

ध्रुव की ताराभाग - १​लेखिका "अनामिका"सूरज की गुनगुनी धूप में सामान से भरी पिकअप वैन नई सोसाइटी के गेट आकर रुकी। आज से सात साल की तारा की दुनिया बदलने वाली थी।​"अरे विजय! वक्त पर पहुँच गया यार," तारा के पापा, आनंद जी ने मुस्कुराते हुए सामने वाले मकान से बाहर आते अपने पुराने कॉलेज फ्रेंड को गले से लगा लिया।​बचपन की दोस्ती फिर से ताज़ा हो रही थी। एक तरफ बड़े सामान की शिफ्टिंग चल रही थी, तो दूसरी तरफ छोटी सी तारा भी पीछे नहीं रहना चाहती थी। उसने अपनी पूरी ताकत लगाकर अपनी किताबों और खिलौनों ...और पढ़े

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ध्रुव की तारा - भाग 2

ध्रुव की ताराभाग - २लेखिका "अनामिका"​वक्त अपनी रफ्तार से बीतता रहा। बचपन की मासूमियत अब किशोरावस्था के संजीदा मोड़ आ खड़ी हुई थी। सात साल की वह छोटी तारा अब 10th क्लास में थी—गोल चश्मा, किताबों का ढेर और पढ़ाई को लेकर वही पुरानी संजीदगी। वहीं दूसरी तरफ, 12th क्लास का ध्रुव आज भी बेफिक्र था। उसकी गिनती क्लास के उन छात्रों में होती थी जो बस 'पासिंग मार्क्स' की उम्मीद रखते थे।​घरवाले हर वक्त ध्रुव को 12th बोर्ड्स का डर दिखाते और पढ़ाई के लिए टोकते रहते। लेकिन कोई नहीं जानता था कि ध्रुव का दिल किताबों में ...और पढ़े

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ध्रुव की तारा - भाग 3

ध्रुव की ताराभाग - ३लेखिका "अनामिका" ​स्विमिंग पूल वाली शाम के बाद रात भर तारा के मन में अजीब सवाल घूमते रहे। प्यार, पसंद या इन सब एहसासों से वह हमेशा दूर ही रही थी, इसलिए उसे समझ ही नहीं आ रहा था कि उसके साथ क्या हो रहा है। वह बस यही सोचती रही कि सिया हमेशा ध्रुव के बारे में ही क्यों पूछती रहती है? और ध्रुव भी आखिर हर वक्त सिया को चुपके-चुपके क्यों देखता रहता है? और अगर ये दोनों ऐसा करते भी हैं, तो उसे अंदर ही अंदर इतना बुरा क्यों लगता है? इन्हीं ...और पढ़े

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ध्रुव की तारा - भाग 4

ध्रुव की तारा​भाग - ४लेखिका: "अनामिका"​मिड-टर्म्स के बाद हफ़्ते भर की छुट्टियों का ऐलान हो चुका था। लेकिन बस पर हुई उस बातचीत के बाद तारा के मन में एक अनजाना डर तैर रहा था—एक अनजान लड़का ट्रिप पर साथ जाने वाला था, क्या यह फैसला सही रहेगा? इसी उलझन में वह और ध्रुव अपने-अपने घर पहुँचे।​ध्रुव के घर में ट्रिप की बात सुनते ही उसके माता-पिता तुरंत मान गए। आखिरकार वह लड़का था और १२th में था। असली चुनौती तो तारा के घर में थी, क्योंकि वह पहली बार बिना परिवार के दोस्तों के साथ कहीं बाहर जा ...और पढ़े

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ध्रुव की तारा - भाग 5

ध्रुव की ताराभाग - ५ लेखिका "अनामिका" ​बुआ ने मुस्कुराते हुए सबका स्वागत किया, "अरे बच्चों, आओ-आओ, अंदर आ बिल्कुल शर्माने की ज़रूरत नहीं है, इसे अपना ही घर समझो। तारा, तुम सिया को लेकर अपने कमरे में चली जाओ। और तुम दोनों लड़के... सामने वाले कमरे में शिफ्ट हो जाओ। जल्दी से फ्रेश हो जाओ, तब तक मैं खाना लगाती हूँ।"​कमरों में जाने के बाद ध्रुव से खुद पर काबू नहीं रखा गया। वह तारा के पास आकर धीरे से बोला, "यार चश्मिश, तू तो सच बोल रही थी! तेरी बुआ तो दूर-दूर से बुआ लगती ही नहीं ...और पढ़े

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ध्रुव की तारा - भाग 6

ध्रुव की ताराभाग - ६लेखिका "अनामिका" दिन भर की भागदौड़ के बाद रात के सन्नाटे में तारा अकेली बालकनी खड़ी थी। सामने आसमान में चाँद-सितारे चमक रहे थे और ठंडी हवा के हल्के झोंके चेहरे को छू रहे थे। तारा उस खूबसूरत नज़ारे को निहारते हुए दिन भर की बातों में उलझी थी। उसके दिमाग में बस यही सवाल घूम रहा था—जब ध्रुव और सिया एक-दूसरे के करीब होते हैं, तो उसके दिल में यह अजीब सी टीस क्यों उठती है?​"यहाँ अकेली क्या कर रही हो, चश्मिश?" ध्रुव की आवाज़ से उसकी सोच का सिलसिला टूटा। वह धीरे से ...और पढ़े

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ध्रुव की तारा - भाग 7

ध्रुव की ताराभाग - ७ लेखिका "अनामिका" छुट्टियाँ खत्म होने के बाद स्कूल का पहला दिन आ गया। तारा ध्रुव रोज़ की तरह एक साथ पैदल ही स्कूल जा रहे थे।​तभी रास्ते में सिया भी आती हुई दिखी। उसने दूर से हाथ हिलाया और मुस्कुराते हुए उन दोनों के पास आ गई।​"और बताओ, छुट्टियाँ खत्म! ट्रिप का नशा उतरा कि नहीं?" सिया ने आते ही हँसकर पूछा।​तारा ने उत्साह में कहा, "अरे यार, ट्रिप के सारे फोटोज़ इतने कमाल के आए हैं न! देखकर मज़ा आ गया।"​सिया ने थोड़ा हैरान होकर पूछा, "क्या? फोटोज़ मिल भी गए? तुम लोगों ...और पढ़े

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ध्रुव की तारा - भाग 8

ध्रुव की ताराभाग -८लेखिका "अनामिका" तारा के घर से ध्रुव के घर तक का सफर सिया के दिल की को शांत करने के बजाय और बढ़ा रहा था।​ध्रुव के घर में कदम रखते ही सिया का सामना वही दीवारों पर टंगे फ्रेमों से हुआ। परिवार की साझी तस्वीरों के साथ-साथ ध्रुव के कमरे का हर कोना भी तारा और ध्रुव की बचपन की यादों, ढेरों फनी स्नैप्स और तस्वीरों से पटा पड़ा था। सिया का चेहरा उतर गया; उसकी असहजता और जलन अब उसके चेहरे पर साफ़ पढ़ी जा सकती थी।​"अरे आओ सिया, बैठो!" ध्रुव ने पूरे उत्साह से ...और पढ़े

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ध्रुव की तारा - भाग 9

ध्रुव की तारा भाग - ९लेखिका "अनामिका"​बोर्ड एग्ज़ाम्स सिर पर आते ही तारा ने अपना ट्यूटर अवतार ऑन कर था, क्योंकि अपनी स्विमिंग प्रैक्टिस में बिज़ी रहने की वजह से ध्रुव पढ़ाई पर ज़्यादा ध्यान नहीं दे रहा था। अपनी 10th की तैयारी के साथ-साथ तारा रोज़ शाम को ध्रुव को 12th की किताबें खोलकर अपने सामने बिठा लेती। ध्रुव जब भी पेन उँगलियों में घुमाते हुए बोरियत से खिड़की के बाहर ताकने लगता, तो तारा ज़ोर से रजिस्टर मेज पर पटककर उसका ध्यान खींचती। ध्रुव चिढ़कर बड़बड़ाता, "अरे यार तारा! पास तो हो ही जाऊँगा, 12th बोर्ड ही ...और पढ़े

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ध्रुव की तारा - भाग 10

ध्रुव की ताराभाग -१०लेखिका "अनामिका" जीत के जश्न और तालियों की गूँज अभी ध्रुव और तारा के कानों में ही रही थी। हाथ में ट्रॉफी थामे और चेहरे पर खुशी समेटे दोनों जब अपनी कॉलोनी पहुँचे, तो हर तरफ़ एक अजीब सा सन्नाटा पसरा था। ध्रुव ने उत्साह में आकर अपने घर का दरवाज़ा खटखटाया, "मम्मी! पापा! देखिए मैं जीत गया!"​लेकिन अंदर से कोई जवाब नहीं आया। ताला बाहर से लटका देख ध्रुव परेशान हो गया। दोनों तुरंत तारा के घर की तरफ़ भागे, पर वहाँ भी मुख्य दरवाज़े पर ताला जड़ा हुआ था। ढलती शाम के अंधेरे में ...और पढ़े

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ध्रुव की तारा - भाग 11

ध्रुव की तारा भाग - ११लेखिका "अनामिका"​हॉस्पिटल से छुट्टी मिलने के बाद जब विजय और ध्रुव, सुमन को संभालते घर के अंदर ला रहे थे, तब सुमन ने हल्का सा मुस्कुराते हुए दोनों को देखा।​"तुम दोनों तो मुझे ऐसे पकड़कर ला रहे हो जैसे मैं बहुत ज़्यादा बीमार हूँ," सुमन ने धीमी आवाज़ में कहा, "बस एक छोटा सा पेट दर्द ही तो था, अब मैं बिल्कुल ठीक हूँ। मुझे इतना क्यों संभाल रहे हो?"​विजय ने गहरी साँस लेते हुए कहा, "सुमन, चुपचाप चलकर बेड पर बैठो। अब से तुम्हें कोई काम करने की ज़रूरत नहीं है, हम तुम्हारा ...और पढ़े

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ध्रुव की तारा - भाग 12

​ध्रुव की तारा भाग - १२लेखिका "अनामिका"​ध्रुव को पास ही के शहर के एक नामी कॉलेज में एडमिशन मिल था। ट्रेन से बस दो घंटे की दूरी पर स्थित यह कॉलेज ध्रुव के लिए पढ़ाई और घर के करीब रहने का एकदम सही संतुलन था। इस सफलता की खुशी में ध्रुव और तारा के परिवारों ने ध्रुव के घर पर ही एक छोटी सी पार्टी रखी थी।​घर में उत्सव जैसा माहौल था। आनंद और विजय पुरानी यादों में खोए हुए ठहाके लगा रहे थे, वहीं सुधा और सुमन मिलकर सबकी पसंद का खाना परोस रही थीं। सब लोग ध्रुव ...और पढ़े

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ध्रुव की तारा - भाग 13

ध्रुव की ताराभाग - १३लेखिका: "अनामिका"​सिया के वे कड़वे शब्द तारा के सीने में सीधे तीर की तरह चुभे ध्रुव के शहर छोड़कर जाने से उसकी ज़िंदगी में जो खालीपन आया था, सिया के इस अचानक और कठोर फैसले ने उसे पूरी तरह तोड़कर बिखेर दिया। स्कूल खत्म होते ही वह भारी कदमों से घर की तरफ लौट आई, लेकिन घर की चारदीवारी उसे काटने को दौड़ रही थी। न ध्रुव का साथ था, न सिया का दिलासा। वह खुद को पूरी दुनिया में एकदम तन्हा और बेबस महसूस कर रही थी।​शाम ढलते ही, अपने बेकाबू कदमों को संभालते ...और पढ़े

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