यह कहानी एक काल्पनिक सुपरहीरो से प्रेरित है, लेकिन इसके किरदार और जज़्बात पूरी तरह से मौलिक हैं।" लेखक _समीर खान क़िस्त 1: शिकागो की ठंडी धूप शिकागो की शाम और ऊपर से गिरती हल्की बर्फ की फुहारें। कांच की बड़ी-बड़ी इमारतों पर जब डूबते सूरज की नारंगी रोशनी पड़ती है, तो पूरा शहर किसी ताश के महल की तरह चमकने लगता है। सड़कों पर गाड़ियों का शोर है, लोग अपने कोट के कॉलर ऊपर किए तेज़ी से अपने घरों की तरफ भाग रहे हैं।
नकाब और तन्हाई - 1
यह कहानी एक काल्पनिक सुपरहीरो से प्रेरित है, लेकिन इसके किरदार और जज़्बात पूरी तरह से मौलिक हैं।" लेखक खानक़िस्त 1: शिकागो की ठंडी धूपशिकागो की शाम और ऊपर से गिरती हल्की बर्फ की फुहारें। कांच की बड़ी-बड़ी इमारतों पर जब डूबते सूरज की नारंगी रोशनी पड़ती है, तो पूरा शहर किसी ताश के महल की तरह चमकने लगता है। सड़कों पर गाड़ियों का शोर है, लोग अपने कोट के कॉलर ऊपर किए तेज़ी से अपने घरों की तरफ भाग रहे हैं।इन्हीं इमारतों के बीच एक पुरानी और जर्जर सी बिल्डिंग की तीसरी मंज़िल पर 'जैक' खड़ा था।जैक—जिसकी उम्र ...और पढ़े
नकाब और तन्हाई - 2
किस्त 2: आधा नकाब, अधूरी चायशिकागो की सुबह जितनी खूबसूरत दिखती है, जैक के लिए उतनी ही थकाने वाली है। सूरज की पहली किरण जब उसकी कांच की खिड़की से टकराकर सीधे उसके चेहरे पर पड़ी, तो जैक की नींद टूट गई। रात भर वह शहर के 'क्वींस ब्रिज' के पास एक एक्सीडेंट में फंसे लोगों की मदद कर रहा था। उसके कंधे पर एक बड़ा सा नीला निशान पड़ गया था, जो रह-रह कर टीस मार रहा था।उसने अपने बिस्तर के पास रखे छोटे से मेज़ पर हाथ मारा। वहां उसकी पुरानी घड़ी पड़ी थी, जिसका कांच धुंधला ...और पढ़े
नकाब और तन्हाई - 3
किस्त 3: लाइब्रेरी की वो अजनबीशिकागो पब्लिक लाइब्रेरी का 'सेक्शन 4'—यहाँ रोशनी कम और पुरानी किताबों की खुशबू ज़्यादा जैक एक ऊँची सीढ़ी पर चढ़कर 19वीं सदी के कुछ पुराने रिकॉर्ड्स तरतीब से रख रहा था। उसके हाथ धूल से सने थे और ज़हन में अभी भी रात वाले हादसे की टीस बाकी थी।तभी, नीचे से एक आवाज़ आई। साफ़, मीठी और थोड़ी सी झिझकती हुई।"एक्सक्यूज़ मी... क्या आप बता सकते हैं कि 'उर्दू शायरी का इतिहास' (History of Urdu Poetry) वाली शेल्फ कहाँ मिलेगी?"जैक ने नीचे झुककर देखा। सीढ़ी के ठीक नीचे एक लड़की खड़ी थी। उसने सफ़ेद ...और पढ़े
नकाब और तन्हाई - 4
किस्त 4: बारिश, कॉफ़ी और अधूरी पेंटिंगशिकागो का मौसम भी जैक की ज़िंदगी की तरह अनिश्चित है। अभी दोपहर हल्की धूप खिली थी और देखते ही देखते आसमान स्याह बादलों से घिर गया। लाइब्रेरी की ऊँची खिड़कियों पर बारिश की बूंदें ज़ोर-ज़ोर से थपकियाँ देने लगीं।जैक अपना काम खत्म कर के बाहर निकलने ही वाला था कि उसने देखा—एली लाइब्रेरी के मुख्य द्वार पर खड़ी है। वह बाहर गिरती मूसलाधार बारिश को देख रही थी और उसके पास छाता नहीं था। उसके हाथ में वही स्केचबुक थी, जिसे उसने अपने ओवरकोट के अंदर बड़ी हिफाज़त से छुपा रखा था ...और पढ़े
नकाब और तन्हाई - 5
किस्त 5: जिम्मेदारी की पुकारकैफे की उस मेज पर रखी कॉफी अभी भी गर्म थी। एली अपनी स्केचबुक में हुई थी, वह उस 'जाले' वाले डिजाइन को और बारीक बना रही थी। लेकिन जैक का ध्यान अब वहां नहीं था। उसकी जेब में रखा स्कैनर लगातार थरथरा रहा था—यह 'कोड रेड' था। शिकागो की 'वेस्ट स्ट्रीट' पर एक बहुत बड़ा हादसा हुआ था, जहाँ एक पुरानी इमारत ढहने की कगार पर थी।जैक ने एली की तरफ देखा। उसका चेहरा सुकून से भरा था। उसे लग रहा था कि शायद आज उसे वह दोस्त मिल गया है जिसका वह बरसों ...और पढ़े
नकाब और तन्हाई - 6
किस्त 6: आँखों की गवाहीवेस्ट स्ट्रीट की वो ढही हुई इमारत अब मलबे और धूल के गुबार में लिपटी एम्बुलेंस के सायरन और लोगों के शोर के बीच (नकाबपोश जैक) एक ऊंचे खंभे पर खड़ा था। उसकी सांसें फूल रही थीं और सीने में उठा दर्द उसे याद दिला रहा था कि वो फौलाद का नहीं, खून-मांस का बना एक इंसान ही है।उसने नीचे भीड़ की तरफ देखा। तभी उसकी धड़कन रुक गई।वही सफेद ओवरकोट, वही उलझे हुए बाल। एली! वह पुलिस की लगाई हुई पीली टेप (Crime Scene Tape) के बिल्कुल पास खड़ी थी। उसके हाथ में वही ...और पढ़े
नकाब और तन्हाई - 7
किस्त 7: एक और नकाब (The Second Mask)लाइब्रेरी के उस ठंडे कोने में वक्त जैसे थम गया था। एली नज़रें जैक की फटी हुई आस्तीन और उसके जमे हुए खून पर टिकी थीं। जैक को महसूस हुआ कि अगर उसने अगले चंद सेकंड में कुछ नहीं कहा, तो एली सच के इतने करीब पहुँच जाएगी जहाँ से वापसी मुमकिन नहीं होगी।जैक ने एक ठंडी और बनावटी हंसी हंसी—एक ऐसी हंसी जिसमें कोई चमक नहीं थी। उसने अपनी आस्तीन को झटके से नीचे किया।"एली, तुम सच में बहुत बड़ी आर्टिस्ट हो! तुम्हारी कल्पना (Imagination) को तो सलाम करना चाहिए,जैक ने ...और पढ़े
नकाब और तन्हाई - 8
किस्त 8: कैमरे का लेंस और एक नई उलझनशिकागो की सुबह आज कुछ ज्यादा ही शोर भरी थी। जैक न्यूज़' के ऊंचे दफ्तर की दहलीज पर खड़ा था। उसके हाथ में उसका पुराना कैमरा था, जिसे उसने अपने पिता की आखिरी निशानी के तौर पर सहेज कर रखा था।दफ्तर के अंदर फाइलों का ढेर और टाइपराइटरों की गूँज थी। न्यूज़ एडिटर ने जैक को ऊपर से नीचे तक देखा। "तो तुम हो वो लड़का जो कहता है कि वो उस 'मसीहा' की तस्वीरें ला सकता है? याद रखना जैक, हमें धुंधली तस्वीरें नहीं चाहिए। हमें वो चाहिए जो शहर ...और पढ़े
नकाब और तन्हाई - 9
किस्त 9: सबूत और सायागली में सन्नाटा था, सिर्फ वैन के टायरों के घिसटने की आवाज़ और जैक की सांसें सुनाई दे रही थीं। जैक (नकाब में) ने एली के दोस्त को सुरक्षित किनारे किया, लेकिन उसका दिल तब बैठा जब उसने एली को दीवार की तरफ बढ़ते देखा। वह ठीक उसी पत्थर की मूर्ति की तरफ देख रही थी जहाँ जैक ने अपना कैमरा सेट किया था।जैक के पास सिर्फ कुछ सेकंड थे। अगर एली ने वो कैमरा उठा लिया, तो उसमें जैक की नकाब पहने हुए और बिना नकाब वाली (सेटअप करते वक्त की) दोनों तस्वीरें मिल ...और पढ़े
नकाब और तन्हाई - 10
किस्त 10: सच का सामना (The Unmasking)एली के हाथ में मौजूद वह लेंस कैप जैक की तरफ एक सवालिया बनकर उठा हुआ था। जैक ने चारों तरफ देखा, लाइब्रेरी का वह कोना खाली था, पर उसे ऐसा लग रहा था जैसे शिकागो की हर दीवार उसे देख रही हो।जैक ने एक लंबी और बोझिल सांस ली। उसने अपनी आँखें बंद कीं और जब खोलीं, तो उनमें वह डर नहीं था जो पिछले एपिसोड्स में दिखता था। अब उन आँखों में एक अजीब सा सुकून था—जैसे किसी ने बहुत भारी बोझ उतार दिया हो।"एली... चलो मेरे साथ। यहाँ नहीं, जैक ...और पढ़े
नकाब और तन्हाई - 11
किस्त 11: आखिरी इम्तिहान (Season 1 Finale)शिकागो की रात आज पहले से कहीं ज्यादा स्याह थी। बंदरगाह (Docks) की से उठते धुएं ने पूरे शहर को अपनी आगोश में ले लिया था। जैक, जो अब एली के सामने पूरी तरह खुल चुका था, हवा की रफ्तार से मुकाबला कर रहा था। उसके कानों में अभी भी एली के वो आखिरी शब्द गूँज रहे थे— "इस नकाब के पीछे एक दिल है, जो मेरा है।"इन शब्दों ने जैक को एक नई ताकत दी थी, लेकिन साथ ही एक डर भी। अब उसके पास खोने के लिए बहुत कुछ था।बंदरगाह पर ...और पढ़े