रात के ठीक 12 बज रहे थे। सिंहानिया ऑफिस में अफरा–तफरी मची हुई थी। हर तरफ टेंशन… बेचैनी… और एक ही डर—बॉस। किसी ने घड़ी देखते हुए कहा, “आज तो बॉस छोड़ेगे नहीं… literally खा जाएंगे सबको।” दूसरा कर्मचारी झुंझलाया, “हमारी गलती क्या है भला? एक प्रोजेक्ट ही तो था!” पास खड़ी एक लड़की तुरंत बोली, “तुम जानते हो ये प्रोजेक्ट बॉस के लिए कितना ज़रूरी था! पूरा एम्पायर दांव पर लगा है!” कोई और बुदबुदाया, “पर इतनी रात को बुलाने का मतलब क्या है? घर वाले सोच रहे होंगे मैं किडनैप हो गई हूँ!” एक और लड़की भरी सांस लेकर बोली, “यार ये बॉस है या राक्षस? हम पर तो जरा भी दया नहीं आती इन्हें…”

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तुमसे मोहब्बत है - 1

रात के ठीक 12 बज रहे थे।सिंहानिया ऑफिस में अफरा–तफरी मची हुई थी।हर तरफ टेंशन… बेचैनी… और एक ही ने घड़ी देखते हुए कहा,“आज तो बॉस छोड़ेगे नहीं… literally खा जाएंगे सबको।”दूसरा कर्मचारी झुंझलाया,“हमारी गलती क्या है भला? एक प्रोजेक्ट ही तो था!”पास खड़ी एक लड़की तुरंत बोली,“तुम जानते हो ये प्रोजेक्ट बॉस के लिए कितना ज़रूरी था! पूरा एम्पायर दांव पर लगा है!”कोई और बुदबुदाया,“पर इतनी रात को बुलाने का मतलब क्या है? घर वाले सोच रहे होंगे मैं किडनैप हो गई हूँ!”एक और लड़की भरी सांस लेकर बोली,“यार ये बॉस है या राक्षस? हम पर तो जरा ...और पढ़े

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तुमसे मोहब्बत है - 2

रात का वक्त…सड़क पर पसरा हुआ गहरा सन्नाटा…और उसी सन्नाटे को चीरती हुई5–6 ब्लैक लग्ज़री कारें,पूरी रफ़्तार में दौड़ थीं।ऐसा लगता था मानो हवा को नहीं,बल्कि हवा उन्हें रास्ता दे रही हो।काफ़िले के बीच वाली कार के अंदर—ड्राइवर ने धीरे से कहा,“बॉस… थोड़ा AC कम कर दूँ?”पर पीछे बैठे आदमी नेकोई जवाब नहीं दिया।क्योंकि उसकी आँखें ही काफी थीं।गहरी… ठंडी… और इतनी भयानक किसिर्फ़ एक नज़र देखड्राइवर का गला सूख गया।तभी ड्राइवर के बगल में बैठे आदमी नेथोड़ा गुस्से के साथ कहा—“घर से जैकेट पहनकर आने का बोला था ना…?”ड्राइवर शर्मिंदा होकर बोला,“सर… जल्दी में एयरपोर्ट के लिए निकला ...और पढ़े

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तुमसे मोहब्बत है - 3

Singhania ऑफिस के बाहर एक—एक कर के सभी कारें आकर रुकती गईं।दरवाज़े खुलते ही दर्जनों बॉडीगार्ड बाहर निकलकर सीधी में खड़े हो गए—जैसे किसी राजा के महल में सैनिक तैनात हों।असिस्टेंट जल्दी से उतरकरसबसे पीछे चल रही काली, शाही कार का दरवाज़ा खोलता है।और फिर…उस कार से जो शख्स बाहर आया—उसका अंदाज़ ऐसा था मानो कोई रियासत का शासक अपनी धरती पर कदम रख रहा हो।उसकी ऊँचाई करीब 6 फीट,कंधे चौड़े जैसे शक्ति का ढांचा,और शरीर में वो ठंडा सन्नाटा थाजो सिर्फ खतरनाक लोगों में पाया जाता है।उसने गहरे काले रंग का थ्री-पीस सूट पहन रखा था।सूट का कपड़ा ...और पढ़े

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तुमसे मोहब्बत है - 4

उधर वो लड़की आखिरकार अपने घर के बाहर पहुँचती है।थकी हुई साँसें… माथे पर पसीना… और अभी भी हल्का बुखार।वो जैसे ही बेल दबाने के लिए हाथ बढ़ाती है—दरवाज़ा अपने-आप खुल जाता है।सामने खड़ा था एक 16 साल का दुबला-पतला लड़का, बाँहें सीने पर बाँधे, बिलकुल मकान मालिक की तरह अकड़ में।लड़का (कड़क आवाज़ में):“तुम्हें कितनी बार कहा है टाइम से घर आया करो!लेकिन तुम मानती ही नहीं!आखिर तुम्हारी प्रॉब्लम क्या है?किराए पर रहती हो, तो अच्छी किरायेदार बनकर रहा करो!”वो लड़की थकी हुई, ठंड में कँपकँपाती हुई…और हल्की सी शर्मीली मुस्कान देकर बोलती है—“सॉरी मकान मालिक जी… इस ...और पढ़े

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तुमसे मोहब्बत है - 5

Hअगस्त्य अपनी घड़ी पर समय देखता है—रात काफ़ी हो चुकी थी, पर उसका दिमाग़ अटका हुआ था उस लड़की जिसे उसने सड़क पर मुश्किल में देखा था।ऑफिस की केबिन में हल्की-सी पीली रोशनी थी। फाइलें मेज़ पर बिखरी पड़ी थीं, पर अगस्त्य का ध्यान कहीं और था।वो धीरे से मोबाइल उठाता है… और वाणी की फोटो फिर से खोलता है।फोटो में उसका चेहरा साफ़ नहीं दिख रहा था।बस दो बड़ी, काजल से घिरी आँखें… और हल्का-सा हताशा भरा डर।अगस्त्य स्क्रीन पर उँगलियाँ रूकी हुई रखता है।दिल में एक अनजानी-सी खलबली महसूस होती है—कुछ ऐसा, जिसे उसने बहुत सालों से ...और पढ़े

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तुमसे मोहब्बत है - 6

सुबह की हल्की धूप अभी पूरी तरह फैली भी नहीं थी किवाणी नींद से उठकर चुपचाप अपने कमरे से आ गई।रात देर से आने के बावजूद उसकी आदत वही थी—घर में सबसे पहले जागना और रसोई सँभालना।रसोई में पहुँचते ही वह धीरे से चूल्हा जलाती,पानी गर्म करने रखती, और सब्ज़ियाँ काटने लगती है।उसके चेहरे पर हल्की-सी थकान थी,पर उसकी आँखों में वही रोज़ वाला सुकून और ज़िम्मेदारी छिपी हुई थी।कुछ ही देर बाद पीछे से उसकी मासी, रेखा जी, नींद में बिखरे बालों के साथ रसोई में आती हैं।जैसे ही वाणी को काम करता देखती हैं,वे कमर पर हाथ ...और पढ़े

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तुमसे मोहब्बत है - 7

वाणी अपने कमरे में जाती है।सूरज की हल्की किरणें खिड़की से छनकर अंदर आ रही थीं। कमरे में सादगी किताबें, एक टेबल, एक छोटा-सा पॉट में पौधा… और एक बहुत ही शांत-सी लड़की।वाणी अलमारी खोलती है और सोच में पड़ जाती है—“क्या पहनूँ… कहीं ज़्यादा heavy ना लगे… professionalism दिखे… पर मेरी simplicity भी।”आख़िरकार वहहल्के पेस्टल रंग का एक सूती कुर्तानिकालती है, जिसके दुपट्टे में बहुत ही नाजुक-सी किनारी थी।बालों को उसने साफ़-सुथरी ढंग से बाँधा,थोड़ी-सी काजल की लकीर,हल्की-सी लिप बाम,और कानों में छोटे-से मोती के झुमके।दर्पण में खुद को देखते हुए वह धीरे-से मुस्कुराती है—वाणी:“चल वाणी… आज कोई ...और पढ़े

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तुमसे मोहब्बत है - 8

Vinay Damani हल्की मुस्कान के साथ फ़ाइल बंद करते हुए कहते हैं—“Vaani, baaki saari formalities HR se complete kar haan, kal se join kar lena.”वाणी की आँखों में चमक आ जाती है।वो सिर हिलाकर विनम्रता से बोलती है—“Thank you, sir.”वो अपना फोल्डर उठाती है और HR के केबिन की तरफ चली जाती है।HR मैम वाणी को देखकर मुस्कुरा देती हैं—“Congratulations Miss Vaani, please… have a seat.”वाणी बैठ जाती है और joining form, ID proof, offer letter—सब ध्यान से भरने लगती है।दिल तेज़ धड़क रहा था… पर चेहरे पर वही शांत कॉन्फिडेंस।HR:“Welcome to Damani Enterprises.”वाणी हल्की मुस्कान देती है।Vinay Damani ...और पढ़े

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तुमसे मोहब्बत है - 10

Kabir पूरी रास्ते गाड़ी ड्राइव करता है,पास बैठी वाणी खिड़की के बाहर देखती रहती है।ना कोई आँसू,ना कोई शब्द खाली।घर का गेट खुलता है।Rekha ji मुस्कुराते हुए बाहर आती हैं—Rekha ji (खुश होकर):“अरे वाणी!Congratulations beta!”वो तुरंत उसके मुँह में मिठाई रख देती हैं।वाणी बस हल्की सी मुस्कान…बहुत हल्की।साहिल जी आगे आते हैं,उसके सिर पर हाथ फेरते हैं—साहिल जी (गर्व से भरी आवाज़):“मुझे तुझ पर बहुत proud है,मेरी गुड़िया रानी…”वाणी आँखें झुका लेती है।कुछ कह नहीं पाती।उधर Kabir एकदम बच्चे जैसी शक्ल बनाकर—Kabir:“हाँ, बस… अब सब ध्यान उसी पर।मैं भी इतने महीनों बाद घर आया हूँ,उसका कोई मोल नहीं?”Rekha ji ...और पढ़े

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तुमसे मोहब्बत है - 9

वाणी और कबीर लिफ़्ट से निकलकरसीधे 12th-floor boardroom की तरफ चलते हैं।काँच की दीवारों वाले उस कॉन्फ़्रेंस हॉल मेंपहले ही कई लोग मौजूद हैं।टेबल के हेड पर Vinay Damani,उनके दाईं तरफ Vansh,वंश पहले दमानी से मिलने आ गया थाऔर बाईं ओर…अगस्त्य सिंहानियाब्लैक फॉर्मल, तीखी जबड़े की लाइन,और आँखों में वही ठंडा, अहंकारी सन्नाटा—जो किसी को भी घुटनों पर ला दे।Kabir, Vaani के सामने झुककर बैठता है।उसके चेहरे पर एक ही बात साफ थी—शॉक + गुस्सा + बेचैनी।Kabir:“Tu yahin baith. Meeting khatam hoti hi ghar chalte hain.Aur… jab tak main aaun, kuch kha le. Thodi si hi sahi.”Vaani हल्की सी ...और पढ़े

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तुमसे मोहब्बत है - 11

अजय जी गाड़ी रोकते ही जंकी जी को सँभालकर Singhania Office के अंदर ले जाते हैं।अंदर कैबिन में Vansh Agastya दोनों बेचैनी से इंतज़ार कर रहे थे।जैसे ही उन्होंने अपनी माँ को थोड़ा लड़खड़ाते हुए अंदर आते देखा—Vansh की आँखें फैल गईं।Vansh (घबराकर):“Maa! Aap aise kyun chal rahi hain? Dad, Mom ko क्या हुआ?”अजय जी ने उन्हें कुर्सियों पर बैठने का इशारा किया और पूरी घटना धीरे-धीरे बताने लगे—कैसे ड्राइवर कार मारकर भाग गया,कैसे जंकी जी बेहोश थीं,और कैसे एक लड़की ने समय रहते उनकी मदद की।बात सुनते ही Agastya एक झटके से अपनी कुर्सी से उठ गया और ...और पढ़े

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तुमसे मोहब्बत है - 12

सुबह का ऑफिस हमेशा की तरह बिज़ी था…पर आज एक अनजाना-सा तनाव हवा में घुला हुआ था।क्योंकि आज अगस्त्य खुद आ रहा था—Damani-Singhania legal partnership को final करने।Downstairs एक अचानक हलचल मच जाती है।Guards, staff, receptionist — सब एकदम alert।Agastya अपनी कार से नीचे उतरता हैं।सूट पूरी तरह pressed,गहरी आँखें,चेहरा खाली…पर aura इतना sharp कि कोई उसकी आँखों में आँख नहीं डाल पाता।उसके पीछे Vansh उतरता है—थोड़ा cool, थोड़ा normal…पर आज चेहरे पर genuine tension।Kabir अपनी कार में वाणी को लेकर ऑफिस पहुँचता है।Reception से लेकर corridor तक—सबकी नज़रें एक ही चीज़ पर अटक जाती हैं—Kabir + Vaani → ...और पढ़े

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