ये मेरी पहली लव स्टोरी होने वाली है इसलिए थोड़ी बहुत गलती हुई तो माफ़ करिएगा और फोलो भी कर लिजिए 100% फोलो बैंक मिलेगा।सुबह की हल्की धूप खिड़की के पर्दों से छनकर कमरे में फैल रही थी रसोई से बर्तनों की आवाज़ और मसालों की खुशबू पूरे घर में घुल चुकी थी। घर के बाकी लोग अभी अपने-अपने कमरों में थे, लेकिन रवीना काफी पहले उठ चुकी थी।रवीना ने चुपचाप चूल्हे पर रखा दूध उतारा और आटा गूंथते हुए अपने चेहरे से पसीने की बूंदें पोंछ लीं… उसके चेहरे पर थकान थी, पर आदत भी थी।
प्यार की परीभाषा - 1
ये मेरी पहली लव स्टोरी होने वाली है इसलिए थोड़ी बहुत गलती हुई तो माफ़ करिएगा और फोलो भी लिजिए 100 फोलो बैंक मिलेगा।सुबह की हल्की धूप खिड़की के पर्दों से छनकर कमरे में फैल रही थी रसोई से बर्तनों की आवाज़ और मसालों की खुशबू पूरे घर में घुल चुकी थी। घर के बाकी लोग अभी अपने-अपने कमरों में थे, लेकिन रवीना काफी पहले उठ चुकी थी।रवीना ने चुपचाप चूल्हे पर रखा दूध उतारा और आटा गूंथते हुए अपने चेहरे से पसीने की बूंदें पोंछ लीं… उसके चेहरे पर थकान थी, पर आदत भी थी। जैसे ये सब ...और पढ़े
प्यार की परीभाषा - 2
भाग - 3वो धीरे से उठी और रोज़ की तरह बिना किसी आवाज़ के रसोई में चली गई चूल्हा ही आग की हल्की रोशनी उसके चेहरे पर पड़ी उसके चेहरे पर वही शांति थी, लेकिन आँखों के नीचे हल्की थकान भी साफ़ दिख रही थीकुछ ही देर में माँ भी आ गईमाँ- “आज देर नहीं हो गई?”रवीना- “नहीं माँ समय से ही उठी हूँ”माँ ने उसे ऊपर से नीचे तक देखा—माँ- “स्कूल में टीचर हो तो थोड़ा अपने आप पर भी ध्यान दिया करो ये ...और पढ़े
प्यार की परीभाषा - 3
वर्कशॉप का दिन धीरे-धीरे करीब आ रहा था और उसके साथ ही रवीना और तुषार दोनों के भीतर हलचल बढ़ती जा रही थीसुबह का समय था रवीना आज थोड़ा जल्दी उठ गई थी उसके सामने आज सिर्फ रसोई का काम नहीं था, बल्कि एक अलग तरह की जिम्मेदारी भी थी। उसने जल्दी-जल्दी नाश्ता बनाया सबको परोसा और खुद चुपचाप तैयार होने चली गईआज उसने हल्के नीले रंग का सूट पहना जो बहुत साधारण था, लेकिन उस पर साफ-सुथरा और सलीकेदार लग रहा था। उसने आईने में खुद को देखा कुछ पल के लिए ठहरी फिर हल्की सी मुस्कान के ...और पढ़े
प्यार की परीभाषा - 4
शाम का समय था। घर के बाहर गली में बच्चों की आवाज़ें आ रही थीं, लेकिन रवीना के घर अंदर माहौल थोड़ा भारी था।रसोई में माँ और कोई औरत बैठी बात कर रही थीं। रवीना अंदर आकर चुपचाप पानी रखने लगी।औरत— तो काजल की बात आगे बढ़ी?माँ ने हल्की सी हँसी में बात टालने की कोशिश की—क्या बताएं दीदी पहले बड़ी वाली बैठी है कौन करेगा छोटी की शादीरवीना के हाथ वहीं रुक गए। उसने सिर झुका लियाऔरत— अरे आजकल तो लोग छोटी की भी कर देते हैंमाँ— हमारे यहाँ इतना आसान नहीं है लोग सीधे पूछते हैं बड़ी ...और पढ़े
प्यार की परीभाषा - 5
तुषार के घर में उस दिन माहौल थोड़ा अलग था महेश सुबह से ही खाँस रहे थे। पहले तो ध्यान नहीं दिया, लेकिन दोपहर तक उनकी तबीयत और ढीली लगने लगीसुशीला— डॉक्टर को दिखा लेते हैंमहेश— कुछ नहीं है ठीक हो जाएगालेकिन इस बार बात यहीं नहीं रुकी शाम को, जब तुषार ऑफिस से लौटा, तो घर का माहौल शांत थातुषार— क्या हुआ?सुशीला— कुछ नहीं तुम्हारे पापा की तबीयत ठीक नहीं हैतुषार तुरंत उनके पास गया— पापा चलिए डॉक्टर के पास चलते हैंमहेश ने उसका हाथ पकड़ लिया—महेश— डॉक्टर बाद में पहले मेरी एक बात सुनतुषार चुप हो गया।महेश— ...और पढ़े
प्यार की परीभाषा - 6
मंदिर वाली मुलाकात के बाद चीज़ें उम्मीद से ज़्यादा जल्दी आगे बढ़ गईं। दोनों परिवारों के बीच दो-तीन बार हुई, और आखिरकार बिना किसी ज्यादा बहस या दिखावे के शादी की तारीख तय हो गई—अगले महीने की एक साधारण सी सुबह, उसी मंदिर में।तुषार रोज़ की तरह चुपचाप उठा और बाथरूम की तरफ चला गया ठंडे पानी से मुँह धोते हुए भी दिमाग में वही बातें घूम रही थीं—शादी, जिम्मेदारियाँ, और एक अजीब सा खालीपन बाथरुम उसके कमरे में ही अटैच थाजब वह बाहर हॉल में आया, तो माहौल थोड़ा अलग थापायल सोफे पर बैठी थी, चेहरा सख्त, आँखों ...और पढ़े
प्यार की परीभाषा - 7
ज्वेलरी शॉप से बाहर निकलते-निकलते शाम ढलने लगी थी। दिन भर की भागदौड़ के बाद दोनों परिवारों के चेहरों थकान साफ़ दिख रही थी, लेकिन साथ ही एक अजीब-सी औपचारिक संतुष्टि भी थी—जैसे एक और ज़रूरी काम निपट गया हो। महेश ने बाहर खड़े होकर सबको देखा, “चलो, सामने होटल में बैठकर कुछ खा लेते हैं, फिर निकलेंगे” किसी ने मना नहीं किया रेस्टोरेंट ज़्यादा बड़ा नहीं था, लेकिन साफ-सुथरा था सब लोग एक लंबी टेबल पर बैठ गए। बैठने की व्यवस्था अपने-आप बन गई—बड़े लोग एक तरफ, और बीच में तुषार और रवीना कुछ मिनट तक ...और पढ़े
प्यार की परीभाषा - 8
तुषार अपने कमरे में खड़ा था। हाथ में प्रेस थी, लेकिन उसका ध्यान कपड़ों पर नहीं, कहीं और भटक था। तभी दरवाज़ा खुला और महेश और सुषेला अंदर आए।महेश ने सीधे मुद्दे पर आते हुए कहा, “हमें रिश्तेदारों को बुलाने की लिस्ट तैयार करनी होगी। शादी में कोई कमी नहीं रहनी चाहिए।”तुषार ने बस हल्का सा सिर हिला दिया इतने में सुषेला ने एक कड़वी हँसी के साथ महेश की ओर देखा।“मैंने सोचा था मेरे बेटे की शादी धूमधाम से होगी कोई खूबसूरत, किसी हीरोइन जैसी बहू आएगी इस घर में लेकिन किस्मत ने सब बर्बाद कर दिया। या ...और पढ़े
प्यार की परीभाषा - 9
अगली सुबह घर में हमेशा की तरह जल्दी हलचल शुरू हो गई रसोई से तवे पर सिकती रोटियों की खुशबू आ रही थी। सुषेला चुपचाप अपने काम में लगी हुई थीगैस पर एक तरफ साधारण आलू की सब्ज़ी पक रही थी, और साथ में चाय चढ़ी हुई थी न कोई खास बात, न कोई उत्साह सब कुछ सामान्य, लेकिन उस सामान्य में भी एक ठंडापन था।तुषार नींद से उठा, कुछ देर छत को देखता रहा फिर धीरे से उठकर तैयार होने चला गया जब वो हॉल में आया, महेश पहले से ही कुर्सी पर बैठे अख़बार पढ़ रहे थे ...और पढ़े
प्यार की परीभाषा - 10
शादी का दिन सुबह का समय था मंदिर के आँगन में हल्की धूप उतर रही थी हवा में अगरबत्ती फूलों की मिली-जुली खुशबू थी कोई शोर-शराबा नहीं… न ढोल, न बैंड… बस मंत्रों की धीमी गूंज और कुछ गिने-चुने लोग।सब कुछ वैसा ही था जैसा तुषार चाहता था साधारण, शांत लेकिन भीतर की हलचल किसी को नहीं दिख रही थी मंदिर के एक कोने में तुषार खड़ा था सफेद धोती-कुर्ता पहने, माथे पर हल्का सा तिलक लेकिन चेहरे पर कोई खुशी नहीं, सिर्फ एक दबा हुआ तनावउसके हाथ आपस में बंधे हुए थे, उंगलियाँ बार-बार एक-दूसरे को कस रही ...और पढ़े