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    दास्तान-ए-अश्क - 23
    by SABIRKHAN
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    मौत ही इंसान की दुश्मन नहीं ज़िंदगी भी जान लेकर जाएगी - 'जोश' मलासियानी ...................  .... बहुत ही अजीब बात थी उसको धिन्न हो उठी थी पुरुष जात से..! ...

    असली आज़ादी वाली आज़ादी
    by devendra kushwaha
    • (2)
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    देश को आज़ाद कराना आसान नही था बहुत त्याग और संघर्ष के बाद इस देश को आज़ादी नसीब हुई। आजादी बेशकीमती थी क्योंकि लाखों लोगों ने इसे पाने के ...

    लल्लू
    by Pushp Saini
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    ( कहानी -- लल्लू ✍)__________________"बेटा हुआ है" नर्स ने जैसे ही यह ख़बर दी तो अम्मा चहक उठी और बोली --"अरे लल्लू तू बाप बन गया,छोटा लल्लू आया है" ...

    दास्तान-ए-अश्क - 22
    by SABIRKHAN
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    एक औरत जब कोई भी बात मन में ठान लेती है ,तो कहते हैं भगवान भी उसे उसकी जगह से हिला नहीं सकते!उसने मन ही मन फैसला कर ही ...

    दूर देश में मेरा दोस्त
    by Manjeet Singh Gauhar
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    एक बात तो है भाइयों अपना देश अपना होता है।इस विषय में मैं आपको एक कहानी सुनाता हूँ-:मेरा एक बहुत प्यारा दोस्त था। जिसका नाम शिवम् था। लेकिन मैं ...

    दास्तान-ए-अश्क - 21
    by SABIRKHAN
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    वह कई दिनों से देख रही थी उसका नंना बहुत रोता था!दूध भी नहीं पीता था जैसे जैसे वह बड़ा होता जा रहा था उसकी फिजिकल ग्रोथ बहुत कम ...

    दास्तान-ए-अश्क - 20
    by SABIRKHAN
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    (पिछले पार्ट में हमने देखा कि प्रेगनेंसी के वक्त उसे सास ससुर सभी बताते हैं कि तुझे अपने मायके जाना पड़ेगा..  यह सुनकर उसका मन काफी उदास हो जाता ...

    कठपुतली
    by Mukteshwar Prasad Singh
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                       'कठपुतली‘मेनका की शादी की लगभग सारी तैयारियाँ पूरी हो चुकी थी। आज की रात ही मेनका की शादी थी। मेनका ...

    उत्तेजना
    by r k lal
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    उत्तेजना           आर0 के0 लाल               श्वेता का तो जवाब ही नहीं है इतनी सुंदर लड़की लाखों में एक होगी। उसकी लंबी टांगे, काले खुले बाल, काली आंखें और ...

    दास्तान-ए-अश्क - 19
    by SABIRKHAN
    • (18)
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    एक ऐसा एहसास था!मानो उसके जिस्म पर बिच्छू रेग रहे हो..!क्या आज तक वह जूठन  खाती रही?!जैसे किसी बदचलन औरत से कोई मर्द संबंध नहीं रखना चाहता और उसे ...

    दास्तान-ए-अश्क - 18
    by SABIRKHAN
    • (23)
    • 238

    "अो ईश पलट कर मेरी जिंदगी  देख लेता मेरी बर्बादी मे कही कोई कसर तो नही थी"           ...........                 दास्तान-ए-अश्क &n

    दास्तान-ए-अश्क -17
    by SABIRKHAN
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    कोई अपना सा होता जो मेरे मन को छुता.. कोई सपना सा था जो सारी रात न रुठा कहा से सिमट आई बरखा आंखो तले जमकर  उसने मन के ...

    शक्ति
    by सरिता बघेला "अनामिका"
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    कहानी = "शक्ति"---------------------- रात के 3:00 बजे थे भोपाल स्टेशन पर रेल की आने की आहट पाकर सारे ऑटो वालों की हलचल तेज हो गई थी।भले हो भी क्यों ...

    परिवार की वापसी
    by r k lal
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    परिवार की वापसी                                                                                                                               आर0 के0 लाल             मोहल्ले की किटी पार्टी मैं आज नीलम कहीं दिखाई नहीं दे रही थी। पूछने पर शीला ने बताया कि अ

    दास्तान-ए-अश्क - 16
    by SABIRKHAN
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    " खामोश रहने से दम घुटता है ! और बोलने से जुबान छिलती है डर लगता है नंगे पांव चलने से पांव के नीचे कोई  कब्र हिलती है!"            ...