भाग एक: एक नई सुबह और नताशा का अल्टीमेटम
अगली सुबह मुंबई में हमेशा की तरह तेज रफ्तार से शुरू हुई. धूप कांच की उस बडी सी बिल्डिंग पर पड रही थी, जिसके अंदर' रायचंद कॉर्प' का मेन ऑफिस था. पूरे ऑफिस में एक अलग ही हडबडी थी. कॉर्पोरेट एम्प्लॉइज अपने हाथों में आईपैड और कॉफी के कप लिए इधर- उधऱ भाग रहे थे. हर कोई बस अपने काम में डूबा हुआ था.
ठीक सुबह के आठ बजने में पंद्रह मिनट बाकी थे जब कायरा ने बिल्डिंग के अंदर कदम रखा. उसने आज नेवी ब्लू रंग का एक बहुत ही क्लासी फॉर्मल पैंट- सूट पहना था, जिसके अंदर एक व्हाइट सिल्क शर्ट थी. उसके बाल एक परफेक्ट पोनीटेल में बंधे हुए थे और चेहरे पर बहुत ही लाइट, प्रोफेशनल मेकअप था. वह दिखने में जितनी शांत और प्रोफेशनल लग रही थी, उसके अंदर उतना ही बडा तूफान चल रहा था.
बिल्डिंग के अंदर जाते हुए उसने अपने मन में कहा, पापा, आज से मेरा पहला दिन है. इसी ऑफिस के किसी कोने में आपके खिलाफ वो घिनौनी साजिश रची गई थी. आज मैं उस दुनिया में कदम रख रही हूँ जहाँ हर कदम पर झूठ और फरेब है. मुझे तब तक रुकना नहीं है, जब तक मैं उस सच को सबके सामने न ले आऊं जिसने आपकी जान ले ली।
जैसे ही कायरा लिफ्ट से बाहर निकलकर टॉप फ्लोर पर बनी अपनी नई डेस्क की तरफ बढी, उसने देखा कि वहां पहले से ही कोई खडा था. वह कोई और नहीं, बल्कि रायचंद कॉर्प की चीफ स्ट्रेटेजिस्ट, नताशा थी. नताशा ने एक महंगी पेस्टल पिंक Color की ड्रेस पहनी थी और उसके हाथ में एक आईपैड था. जैसे ही उसने कायरा को आते देखा, उसकी आँखों में कायरा के लिए साफ तौर पर जलन और नापसंदगी देखी जा सकती थी.
गुड मॉर्निंग, कायरा, नताशा ने अपनी आवाज को थोडा कडक करते हुए कहा.
गुड मॉर्निंग, मैम, कायरा ने बहुत ही सलीके से जवाब दिया और अपने बैग को डेस्क पर रख दिया.
नताशा ने टेबल पर रखी फाइलों के एक बडे से ढेर पर हाथ पटकते हुए कहा, कल तुमने जो दस मिनट का स्टंट किया था, उससे ज्यादा हवा में उडने की जरूरत नहीं है. शौर्य रायचंद के साथ काम करना कोई बच्चों का खेल नहीं है. वह एक परफेक्शनिस्ट हैं. उन्हें काम में एक सेकंड की भी देरी या एक छोटी सी गलती बर्दाश्त नहीं है. पिछले तीन महीनों में पांच सेक्रेटरी बदली जा चुकी हैं, सो आई होप तुम अपना बोरिया- बिस्तर जल्दी नहीं समेटोगी।
कायरा ने सीधे नताशा की आंखों में देखा. उसने तुरंत भांप लिया कि नताशा सिर्फ एक सीनियर की तरह बात नहीं कर रही है, बल्कि वह शौर्य को लेकर हद से ज्यादा पजेसिव है. उसे कायरा का शौर्य के इतने करीब होना खटक रहा था.
कायरा ने बहुत ही शांत लहजे में कहा, थैंक You फॉर द एडवाइस, मैम. लेकिन मैं यहाँ किसी स्टंट के लिए नहीं, बल्कि अपना काम करने आई हूँ. आप काम की चिंता मत कीजिए।
नताशा का चेहरा गुस्से से लाल हो गया. उसने अपनी हील्स को फर्श पर जोर से गूंजाते हुए कहा, वी विल सी, कायरा. और हां, एक आखिरी बात. शौर्य के पर्सनल स्पेस में दखल देने की कोशिश बिल्कुल मत करना. तुम यहाँ सिर्फ एक एम्प्लॉई हो, अपनी हद याद रखना।
यह कहकर नताशा वहां से तेज कदमों से चली गई. कायरा ने एक लंबी सांस ली और मुस्कुराई. उसने अपने मन में सोचा, हद? नताशा मैम, मैं तो यहाँ सारी हदें पार करके उस सच तक पहुंचने आई हूँ, जिसे आप लोग छुपा रहे हैं। तभी शौर्य के केबिन का जो बडा सा शीशे का दरवाजा था, उसका ऑटोमैटिक ब्लाइंड्स ऊपर उठा. अंदर शौर्य रायचंद आ चुका था.
भाग दो: केबिन का ठंडा माहौल और कॉफी का टेस्ट
ठीक सुबह के आठ: शून्य बजे कायरा ने शौर्य के केबिन के भारी शीशे वाले दरवाजे पर Knock किया. अंदर से एक भारी, कडक आवाज आई, कम इन।
कायरा ने गहरी सांस ली और अंदर दाखिल हुई. शौर्य अपनी बडी सी ब्लैक लेदर चेयर पर बैठा हुआ था. उसकी आस्तीनें थोडी ऊपर चढी हुई थीं, और वह अपने लैपटॉप स्क्रीन पर बहुत गंभीरता से उंगलियां चला रहा था. वह हमेशा की तरह बेहद Attractive लेकिन उतना ही खतरनाक लग रहा था. कायरा ने आगे बढकर एक खूबसूरत सिरेमिक मग में ब्लैक कॉफी उसकी टेबल पर रख दी.
गुड Morning सर. आपकी ब्लैक कॉफी, बिना शुगर के, ठीक वैसी ही जैसी आपको पसंद है. और यह रहा आपका आज का पूरा शेड्यूल, कायरा ने अपनी आवाज को पूरी तरह प्रोफेशनल और बैलेंस्ड रखते हुए कहा.
शौर्य ने लैपटॉप से अपनी नजरें हटाईं और कायरा को देखा. उसकी गहरी, पारखी आंखें तुरंत कायरा के चेहरे पर टिक गईं. शौर्य का' माइंड रीडर' दिमाग हमेशा की तरह तुरंत एक्टिव हो गया. उसने कायरा के खडे होने के तरीके, उसकी बॉडी लैंग्वेज और उसकी आंखों के कॉन्फिडेंस को स्कैन करना शुरू किया. शौर्य ने नोटिस किया कि कायरा ने कॉफी का मग टेबल पर बिल्कुल सही दूरी पर रखा था—न बहुत पास, न बहुत दूर. उसकी आवाज में एक अजीब सा ठहराव था.
अजीब बात यह थी कि आज सुबह से ही शौर्य को अपने सीने में एक अजीब सी जकडन महसूस हो रही थी, उसकी एंग्जायटी धीरे- धीरे बढ रही थी. लेकिन जैसे ही कायरा केबिन में आई और उसकी शांत आवाज कमरे में गूंजी, शौर्य को लगा कि उसके दिमाग का शोर थोडा कम हो रहा है. वह खुद इस बात से हैरान था, लेकिन उसने अपने चेहरे पर कोई भाव आने नहीं दिया.
उसने कॉफी का एक Sip लिया. उसका स्वाद बिल्कुल परफेक्ट था. आमतौर पर पुरानी सेक्रेटरी हमेशा कॉफी का टेम्परेचर या कडवाहट बिगाड देती थीं, लेकिन कायरा ने पहली ही बार में इसे बिल्कुल सटीक बनाया था. शौर्य ने मग को वापस टेबल पर रखा और ठंडे लहजे में कहा, कॉफी ठीक है. लेकिन मुझे चापलूसी या परफेक्ट दिखने वाले ड्रामे पसंद नहीं हैं. शेड्यूल यहीं छोड दो।
उसने फाइल की तरफ इशारा करते हुए आगे कहा, आज दोपहर ठीक दो बजे हमारी एक बहुत ही इम्पोर्टेंट बोर्ड Meeting है. कल तुमने जिस डेटा लीक वाले रिस्क को पकडा था, आज बोर्ड के बडे- बडे इन्वेस्टर्स के सामने तुम्हें उसे साबित करना होगा. नताशा का मानना है कि तुम सिर्फ एक नया बखेडा खडा कर रही हो. अगर आज तुम बोर्ड मेंबर्स के तीखे सवालों का जवाब नहीं दे पाईं, तो रायचंद कॉर्प में तुम्हारा यह पहला और आखिरी दिन होगा. क्या तुम तैयार हो?
कायरा ने एक पल के लिए भी अपनी नजरें नहीं झुकाईं. उसने सीधे शौर्य की आंखों में देखते हुए कहा, मैं बिना तैयारी के कोई काम नहीं करती, सर. अगर मैंने कोई रिस्क ढूंढा है, तो मेरे पास उसे साबित करने के लिए पुख्ता सबूत भी हैं. आप Meeting की चिंता मत कीजिए।
शौर्य ने अपनी आंखें थोडी छोटी कीं. वह कायरा के इस बेखौफ अंदाज को समझने की कोशिश कर रहा था. आमतौर पर लोग उसके सामने आने पर हकलाने लगते थे या नर्वस हो जाते थे, लेकिन यह लडकी जैसे किसी अलग ही मिट्टी की बनी थी. उसने हल्के से सिर हिलाया और कहा, ठीक है. तुम जा सकती हो।
कायरा मुडी और केबिन से बाहर आ गई. जैसे ही दरवाजा बंद हुआ, शौर्य ने अपनी कुर्सी पर पीछे की तरफ टेक लगाई. उसने अपने दिल पर हाथ रखा, जो अब बिल्कुल नॉर्मल स्पीड से धडक रहा था. उसने बुदबुदाया, यह लडकी. जब यह बात करती है, तो मेरी घबराहट गायब क्यों हो जाती है? क्या यह सिर्फ मेरा वहम है, या कोई इत्तेफाक?
भाग तीन: सीक्रेट फाइल्स की तलाश और एक करीबी Call
दोपहर के एक बज रहे थे. ऑफिस का लंच ब्रेक शुरू हो चुका था और ज्यादातर एम्प्लॉइज नीचे कैफेटेरिया की तरफ जा चुके थे. पूरे फ्लोर पर सन्नाटा छाया हुआ था. कायरा ने इस मौके को हाथ से नहीं जाने देने का फैसला किया. वह अपनी सीट से उठी और दबे पांव ऑफिस के उस हिस्से की तरफ बढी जहाँ कंपनी का पुराना डेटा सेंटर और रिकॉर्ड Room था.
उसका असली मकसद नौकरी करना नहीं, बल्कि अपने पिता आनंद शर्मा से जुडे पांच साल पुराने दस्तावेज ढूंढना था. उसके पिता इस कंपनी के चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर (CFO) थे, जिन पर अचानक पांच सौ करोड के घोटाले का इल्जाम लगा था और बदनामी के डर से उन्होंने सुसाइड कर लिया था. कायरा को पूरा यकीन था कि उसके पिता बेकसूर थे और उन्हें फंसाया गया था.
रिकॉर्ड Room के अंदर अंधेरा था, सिर्फ कंप्यूटर स्क्रीन्स की नीली रोशनी चमक रही थी. कायरा ने तेजी से एक खाली सिस्टम को ऑन किया और कंपनी के आर्काइव फोल्डर में जाकर अपने पिता का नाम' आनंद शर्मा' टाइप किया. जैसे ही उसने एंटर दबाया, स्क्रीन पर लाल अक्षरों में एक एरर मैसेज फ्लैश हुआ—' एक्सेस डिनाइड. सिक्योरिटी लेवल पाँच रिक्वायर्ड।
शिट! कायरा के मुंह से एक दबी हुई गाली निकली. वह समझ गई कि उसके पिता से जुडी हर एक फाइल को किसी बहुत ही हाई- लेवल पासवर्ड से प्रोटेक्ट किया गया है. यह पासवर्ड या तो नताशा के पास हो सकता था, या फिर खुद मैनेजिंग डायरेक्टर शौर्य रायचंद के पास.
वह अभी आगे का कोई रास्ता सोच ही रही थी कि अचानक उसे रिकॉर्ड Room के बाहर किसी के भारी जूतों की आवाज सुनाई दी. कोई बहुत धीरे- धीरे अंदर की तरफ आ रहा था. कायरा का दिल जोर से धडकने लगा. अगर वह आज अपने पहले ही दिन यहाँ पकडी गई, तो उसका पूरा प्लान मिट्टी में मिल जाता.
उसने फुर्ती से कंप्यूटर स्क्रीन को बंद किया और खुद को एक बडी सी अलमारी के पीछे छुपा लिया. कदमों की आवाज और पास आई. रिकॉर्ड Room का दरवाजा खुला और अंदर कोई दाखिल हुआ. अलमारी की दरार से कायरा ने देखा—वह कोई और नहीं, बल्कि शौर्य का पर्सनल सिक्योरिटी हेड था. वह हाथ में टॉर्च लिए चारों तरफ देख रहा था.
कायरा ने अपनी सांसें रोक लीं. उसकी पीठ दीवार से सटी हुई थी और उसका पूरा शरीर डर के मारे कांप रहा था. सिक्योरिटी हेड की टॉर्च की रोशनी ठीक उसी अलमारी पर पडी जिसके पीछे कायरा छुपी हुई थी. वह बस आगे बढने ही वाला था कि तभी उसके वॉकी- टॉकी पर एक मैसेज आया, सर, एमडी sir आपको बोर्डरूम में बुला रहे हैं।
सिक्योरिटी हेड रुका, उसने एक बार फिर चारों तरफ देखा और वापस बाहर चला गया. जैसे ही दरवाजा बंद होने की आवाज आई, कायरा घुटनों के बल बैठ गई. उसने अपने सीने पर हाथ रखा और लंबी- लंबी सांसें लीं. उसने खुद को संभाला, अपने कपडों को ठीक किया और तेजी से बाहर निकल गई. उसे समझ आ गया था कि रायचंद कॉर्प के राज जितने गहरे हैं, पहरा उतना ही सख्त है. उसे शौर्य के और करीब जाना होगा, तभी वो पासवर्ड मिल पाएगा.
भाग चार: बोर्डरूम का तूफान और शौर्य का पैनिक अटैक
दोपहर के ठीक दो बजे, रायचंद कॉर्प का आलीशान बोर्डरूम पूरी तरह से भरा हुआ था. कमरे के बीचों- बीच एक बहुत बडी लकडी की टेबल थी, जिसके चारों तरफ कंपनी के सबसे बडे इन्वेस्टर्स, बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स और नताशा बैठे थे. शौर्य टेबल के हेड पर बैठा हुआ था, उसका चेहरा हमेशा की तरह सख्त और गंभीर था. कायरा फाइलों और अपने आईपैड के साथ शौर्य के ठीक पीछे खडी थी.
Meeting शुरू हुई और नताशा ने स्क्रीन पर उस इंटरनेशनल टेक- डील की डिटेल्स शेयर करना शुरू किया. उसने बहुत ही Attractive तरीके से बताया कि कैसे इस डील से कंपनी का प्रॉफिट अगले दो सालों में दोगुना हो जाएगा. सभी बोर्ड मेंबर्स नताशा की बात सुनकर काफी इम्प्रेस लग रहे थे और आपस में तारीफ करने लगे.
तभी शौर्य ने हाथ उठाकर नताशा को रोका और पीछे मुडकर कायरा की तरफ देखा. कायरा, तुम्हारा क्या कहना है इस डील पर? बोर्ड को बताओ।
नताशा ने कायरा को एक घूरती हुई नजर से देखा, लेकिन कायरा बिना किसी झिझक के आगे बढी. उसने अपने आईपैड को मेन स्क्रीन से कनेक्ट किया और बोलना शुरू किया. उसकी आवाज में एक ऐसी क्लैरिटी और दम था कि पूरा कमरा तुरंत शांत हो गया.
थैंक यू, सर. जैसा कि नताशा मैम ने कहा, यह डील प्रॉफिटेबल दिख रही है, लेकिन यह सिर्फ सिक्के का एक पहलू है, कायरा ने स्क्रीन पर एक खास कोडिंग ग्राफ दिखाते हुए कहा, अगर आप इस कॉन्ट्रैक्ट के पेज एक सौ बारह के क्लॉज बयालीस को ध्यान से देखें, तो इसमें साफ लिखा है कि पार्टनरशिप के बाद सामने वाली कंपनी को हमारे क्लाइंट्स के पर्सनल डेटा का डायरेक्ट एक्सेस मिल जाएगा. इसका सीधा मतलब यह है कि हमारी कंपनी का कोर डेटा लीक हो जाएगा. यह कोई बिजनेस डील नहीं है, बल्कि रायचंद कॉर्प की प्राइवेसी को हैक करने की एक सोची- समझी कोशिश है।
कायरा की बात सुनते ही बोर्डरूम में सन्नाटा छा गया. नताशा का चेहरा गुस्से से पीला पड गया. वह अपनी सीट से खडी हुई और तीखे लहजे में बोली, शौर्य! यह बकवास है. यह लडकी अभी कल ही कंपनी में आई है. इसे हमारी डील्स की गहराई का कोई अंदाजा नहीं है. इतने बडे प्रॉफिट को हम सिर्फ एक नए एम्प्लॉई के शक के बिनाह पर नहीं छोड सकते!
हाँ, Mister शौर्य! नताशा बिल्कुल सही कह रही है, एक बुजुर्ग बोर्ड मेंबर ने टेबल थपथपाते हुए कहा, बिजनेस में थोडे बहुत रिस्क तो होते ही हैं. हम इस लडकी की वजह से करोडों का नुकसान नहीं झेल सकते।
अचानक कमरे में बहस शुरू हो गई. हर तरफ से बोर्ड मेंबर्स एक साथ चिल्लाने लगे, कोई कायरा के खिलाफ बोल रहा था तो कोई नताशा का सपोर्ट कर रहा था. कमरे का माहौल बहुत ही ज्यादा स्ट्रेसफुल और शोर- शराबे से भर गया.
और इसी शोर के बीच. अचानक शौर्य के साथ कुछ अजीब होने लगा.
कमेटी में चिल्लाते हुए लोगों की आवाजें शौर्य के कानों में गूंजने लगीं, लेकिन उसे वो शब्द समझ नहीं आ रहे थे. उसके कानों में एक बहुत तेज साय- साय की आवाज होने लगी. उसकी आंखों के सामने का नजारा धुंधला होने लगा. उसका दम घुटने लगा और उसके माथे पर पसीने की बूंदें चमकने लगीं. शौर्य को एक बहुत ही गंभीर पैनिक अटैक आ रहा था.
उसका दिल इतनी जोर से धडक रहा था मानो सीने से बाहर आ जाएगा. उसने अपनी कांपती उंगलियों से टेबल के कोने को कसकर पकड लिया. उसका पूरा शरीर अकड रहा था. वह चाहकर भी किसी को आवाज नहीं दे पा रहा था. नताशा फाइलों को पलटने और बहस करने में इतनी व्यस्त थी कि उसने शौर्य की हालत पर ध्यान ही नहीं दिया. बाकी मेंबर्स भी आपस में लडने में मग्न थे. शौर्य धीरे- धीरे उस अंधेरे में डूब रहा था जहाँ से बाहर आना उसके लिए मुश्किल होता जा रहा था.
भाग पाँच: एक जादुई स्पर्श
लेकिन उस पूरे कमरे में सिर्फ एक जोडी आंखें ऐसी थीं, जो बहस को नहीं, बल्कि शौर्य को देख रही थीं. वह थीं कायरा की आंखें. कायरा ने तुरंत नोटिस किया कि शौर्य की सांसें बहुत भारी हो चुकी हैं और उसके हाथ बुरी तरह कांप रहे हैं. वह समझ गई कि शौर्य इस समय एक भयानक मानसिक तकलीफ से गुजर रहा है.
बिना एक सेकंड गंवाए, कायरा अपनी जगह से हटी और सीधे शौर्य के पास पहुंच गई. उसने प्रोटोकॉल की परवाह किए बिना, बहुत ही सहजता से अपना एक हाथ शौर्य के कांपते हुए कंधे पर रखा. उसका हाथ छूते ही शौर्य के पूरे शरीर में एक करंट सा दौड गया.
कायरा शौर्य के बिल्कुल करीब झुकी. इतनी करीब कि उसकी सांसों की गर्माहट शौर्य के गालों पर महसूस हो रही थी. उसने बहुत ही धीमी, गहरी और हीलिंग आवाज में शौर्य के कान के पास कहा, सर. मेरी तरफ देखिए. सिर्फ मेरी आंखों में देखिए. बाकी सब भूल जाइए. यहाँ कोई नहीं है. बस एक लंबी सांस लीजिए. इनहैल. एक्जहेल. जस्ट ब्रीद, शौर्य।
पहली बार कायरा ने उसे' सर' की जगह उसके नाम से पुकारा था. उसकी उस शांत, जादू जैसी आवाज और उसके हाथ के स्पर्श में कुछ ऐसा था कि शौर्य के कानों का वो भयानक शोर पल भर में गायब हो गया. उसकी धुंधली आंखों के सामने कायरा का चेहरा साफ होने लगा. शौर्य ने कायरा की आंखों में देखा, जहाँ इस समय कोई चालाकी, कोई बदला नहीं था, बल्कि सिर्फ एक अजीब सी फिक्र और सुकून था.
कायरा की मौजूदगी ने एक बार फिर किसी ढाल की तरह काम किया और शौर्य को उस पैनिक अटैक से बाहर खींच लिया. शौर्य की सांसें धीरे- धीरे नॉर्मल होने लगीं. उसने एक गहरी सांस ली और खुद को संभाला.
जैसे ही वह पूरी तरह होश में आया, उसने अपनी कडक आवाज में टेबल पर हाथ मारा, इनफ! बहुत हुई बहस।
पूरे कमरे में एक झटके में सन्नाटा पसर गया. सबने हैरान होकर शौर्य की तरफ देखा. शौर्य ने अपनी पैनी नजरें नताशा और बाकी मेंबर्स पर डालीं और कहा, कायरा ने जो लूपहोल पकडा है, वो बिल्कुल सही है. रायचंद कॉर्प अपना डेटा किसी भी कीमत पर दांव पर नहीं लगाएगी. जब तक सामने वाली कंपनी क्लॉज बयालीस को नहीं बदलती, यह डील Sign नहीं होगी. Meeting डिसमिस!
नताशा ने गुस्से में अपनी फाइलें समेटीं और कायरा को एक जानलेवा नजर से देखते हुए बोर्डरूम से बाहर निकल गई. बाकी मेंबर्स भी फुसफुसाते हुए कमरे से बाहर चले गए. अब उस बडे से बोर्डरूम में सिर्फ शौर्य और कायरा अकेले बचे थे.
शौर्य अपनी कुर्सी से खडा हुआ. वह धीरे- धीरे चलकर कायरा के बिल्कुल करीब आकर रुक गया. दोनों के बीच सिर्फ कुछ इंच का फासला था. शौर्य ने उसकी आंखों में गहराई से झांकते हुए पूछा, तुमने कैसे जाना कि मुझे उस वक्त क्या हो रहा था? मेरी उस हालत को कोई नहीं देख पाया, यहाँ तक कि नताशा भी नहीं. फिर तुमने कैसे भांप लिया? और तुम्हारी इस आवाज में ऐसा क्या है जो मेरे इस अशांत दिमाग को एक पल में खामोश कर देता है? कौन हो तुम कायरा?
कायरा का दिल इस नजदीकी की वजह से बहुत तेजी से धडक रहा था. शौर्य का औरा इतना स्ट्रॉन्ग था कि पल भर के लिए वह अपने पिता के बदले की बात भी भूल गई. लेकिन उसने तुरंत खुद को संभाला और अपने चेहरे पर वही प्रोफेशनल मुस्कान ले आई.
उसने धीरे से कहा, मैंने कहा था ना सर, मैं सिर्फ आपकी सेक्रेटरी हूँ. और एक अच्छी सेक्रेटरी का काम सिर्फ फाइल्स संभालना नहीं, बल्कि अपने बॉस की हर जरूरत का ख्याल रखना होता है. आई होप आपको आपकी कॉफी और मेरा काम दोनों पसंद आया होगा।
यह कहकर कायरा ने अपनी फाइल उठाई, शौर्य को एक छोटा सा सिर हिलाकर इशारा दिया और पूरे ग्रेस के साथ कमरे से बाहर निकल गई.
शौर्य वहीं खडा खिडकी के कांच से बाहर देखने लगा. उसका' माइंड रीडर' दिमाग चिल्ला- चिल्लाकर कह रहा था कि इस लडकी में कुछ तो गडबड है, लेकिन उसका दिल पहली बार किसी की मौजूदगी में सुकून महसूस कर रहा था. शौर्य को अंदाजा भी नहीं था कि जिस लडकी को उसने अपनी पर्सनल असिस्टेंट बनाया है, वो उसकी जिंदगी की सबसे बडी कमजोरी बनने वाली है.
इस माइंड गेम का अगला ट्विस्ट देखने के लिए बने रहिए. क्योंकि असली खेल तो अब शुरू होगा, सिर्फ एपिसोड तीन में!