पिंकू की परी - 7 Deepak Kumar Tiwari Deeptansh द्वारा फिक्शन कहानी में हिंदी पीडीएफ

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पिंकू की परी - 7

'द डार्क सेक्टर' के उस लंबे, काले और डरावने गलियारे में पिंकू पांडे और परी (P444) दबे पाँव आगे बढ़ रहे थे। दीवारों पर लगी बड़ी-बड़ी स्क्रीन पर पूरी पृथ्वी के शहरों के लाइव फुटेज चल रहे थे और नीचे लाल रंग का वह खतरनाक टाइमर अब घटते-घटते "00:38:12" पर पहुँच चुका था। यानी धरती को गुलामी की कगार पर पहुँचाने वाले माइंड-कंट्रोल सर्वर को एक्टिवेट होने में सिर्फ अडतीस मिनट बाकी थे।पिंकू ने हाथ में पकड़ी एलियन लेज़र गन को थोड़ा कसकर पकड़ा। गन भारी थी और उसमें से रह-रहकर हल्की नीली चिंगारियाँ निकल रही थीं। पिंकू ने बगल में चल रही परी की तरफ देखा, जो चौकन्नी होकर चारों तरफ अपनी नीली आँखें घुमा रही थी।




पिंकू पांडे:"अरे परी डार्लिंग, थोड़ा रफ़्तार बढ़ाओ बे! ई घड़ी का सुई तो ऐसे भाग रहा है जैसे बनारस की सड़क पर छुट्टा सांड दौड़ रहा हो। सिर्फ अडतीस मिनट बचा है। अगर साला ई टाइमर जीरो हो गया, तो हमारे बनारस के लोग पान चबाना भूलकर इस सींग वाले पाजी के इशारे पर रोबोट की तरह नाचने लगेंगे। हम ऐसा कतई नहीं होने देंगे!"परी ने गलियारे के मोड़ पर रुककर आगे झांका। सामने का नजारा देखकर उसके चेहरे का रंग उड़ गया। उसने तुरंत पिंकू को पीछे खींचा।परी (P444):"पिंकू, रुको! आगे का रास्ता सादा गलियारा नहीं है। पाजी ने मुख्य सर्वर रूम की सुरक्षा के लिए 'द माइंड-मेज़' (दिमागी भूलभुलैया) एक्टिवेट कर दिया है। यह इस आकाशगंगा का सबसे खतरनाक चक्रव्यूह है।"पिंकू ने गमछा सीधा किया और आगे बढ़कर देखा। सामने एक बहुत बड़ा, गोल हॉल था।




उस हॉल में कोई दीवार नहीं थी, बल्कि हरे और नीले रंग की चमकदार लेज़र दीवारें हवा में तैर रही थीं, जो हर दो सेकंड में अपनी जगह बदल रही थीं। सबसे अजीब बात यह थी कि उस हॉल के फर्श पर सैकड़ों अदृश्य कांच के दरवाजे थे, जो कभी खुलते थे और कभी बंद होते थे। अगर कोई एक गलत कदम रखता, तो वह सीधे अंतरिक्ष के उस अनंत शून्य (Space Vacuum) में गिर जाता जहाँ न हवा थी, न बचने का कोई रास्ता।पिंकू पांडे:"अरे दद्दा रे! ई का तामझाम बना के रखा है बे सींग वाले ने? ई तो हमारे बनारस के सावन के मेले वाली भूलभुलैया से भी दस गुना कड़क लग रहा है। इसमें तो रास्ता ही समझ नहीं आ रहा है कि पैर कहाँ रखें और कहाँ न रखें। साली खोपड़िया एकदम कन्फुसिया गई है रे बाबा!




परी ने अपनी गन को नीचे रखते हुए गहरी सांस ली और उदास आवाज़ में बोली—परी (P444):"इस चक्रव्यूह की लेज़र दीवारें हमारी किसी भी गन की एनर्जी को सोख लेती हैं। अगर हम इस पर गोली चलाएंगे, तो यह और मजबूत हो जाएगी। इसे पार करने का सिर्फ एक ही तरीका है—पाजी के सुपर कंप्यूटर का कोड समझना, जो हर सेकंड बदलता है। मेरी माइंड-स्क्रीन टूट चुकी है, मैं उस कोड को क्रैक नहीं कर सकती। हम यहीं फंस गए हैं पिंकू..."तभी हॉल के लाउडस्पीकर से विलेन पाजी की वही भयानक, भारी और चुभने वाली हंसी गूँज उठी—'हाहाहा... हूशशश...'। हॉल के केंद्र में लगी एक बड़ी स्क्रीन पर पाजी का चेहरा दिखाई दिया। उसके दोनों काले सींग गुस्से में कांप रहे थे।




विलेन पाजी:"बेवकूफ मानव सैंपल! और गद्दार P444! तुम लोगों को क्या लगा कि मेरे सायबोर्ग सैनिकों को गमछे और थूक से हराकर तुम मेरे मुख्य सर्वर तक पहुँच जाओगे? यह 'माइंड-मेज़' तुम्हारी सोच से परे है। अगले पैंतीस मिनट में जब मेरा सर्वर चालू होगा, तो सबसे पहले भारत देश के इसी पिंकू पांडे के मोहल्ले के लोगों का दिमाग मेरे कंट्रोल में होगा। तुम दोनों यहीं खड़े होकर तमाशा देखो!"स्क्रीन दोबारा काली हो गई। परी हताश होकर फर्श पर बैठ गई, लेकिन पिंकू पांडे के दिमाग में इस समय एक बहुत ही अजीब, अनोखा और पूरी तरह से 'देसी बनारसी जुगाड़' चल रहा था।



पिंकू ने अपनी कुर्ते की ऊपर वाली जेब में हाथ डाला। उनकी उंगलियों को कुछ सूखा हुआ महसूस हुआ। उन्होंने जेब से बाहर निकाला—वह बनारस के घाट से निकलते समय खरीदा हुआ कत्था, चूना और सूखे सुपारी के टुकड़ों वाला 'सूखा बनारसी पान' था, जो अनजाने में उनके कुर्ते में ही रह गया था! पिंकू के चेहरे पर एक शैतानी और मज़ेदार मुस्कान आ गई।पिंकू पांडे:"अरे उठो परी डार्लिंग! तुम फिर से हार मान लीं? अरे ई पाजी क्या समझता है कि उसके पास कंप्यूटर है तो वह भगवान हो गया? अरे उसके कंप्यूटर को क्या पता कि भारत के लोग बिना किसी कोड के भी रास्ता ढूंढ लेते हैं। ई देखो, हमारे पास का है!"परी ने अचरज से पिंकू के हाथ में मौजूद उन अजीबोगरीब पत्तों और कत्थे के टुकड़ों को देखा।परी (P444):"पिंकू, यह क्या है? क्या यह पृथ्वी का कोई प्राचीन खोजी यंत्र (Tracking Device) है?



पिंकू पांडे:"अरे खोजी यंत्र की अम्मा है ई! इसे कहते हैं 'बनारसी पान'। अब देखो ई पान कैसे इस सींग वाले के कंप्यूटर की हेकड़ी निकालता है। इस चक्रव्यूह का नियम का है? यही ना कि फर्श पर कहाँ कांच का अदृश्य दरवाज़ा खुला है और कहाँ बंद है, हमको दिखता नहीं है?"पिंकू ने पान के सूखे पत्तों को थोड़ा सा चूना लगाया, उन्हें मरोड़ा और मुँह में डाल लिया। दो-तीन बार ज़ोर से चबाया, जिससे उनके मुँह में कड़क लाल रंग का रस बन गया। फिर पिंकू ने चक्रव्यूह के पहले खाली हिस्से की तरफ निशाना साधा।पिंकू पांडे:"अब ध्यान से देखना परी, जहाँ हमारा निशाना लगेगा, अगर वहां फर्श पर कांच बंद होगा तो रस रुक जाएगा, और अगर नीचे खाई होगी तो रस सीधे नीचे पाताल में चला जाएगा! समझीं?



पिंकू ने मुँह सिकोड़ा और पूरी ताकत से चक्रव्यूह के पहले स्क्वायर पर थूका—'छपाक!'लाल रस फर्श पर एक ठोस सतह पर जाकर बिखर गया और चमकने लगा।पिंकू पांडे:"ई देखो! पहला कदम पक्का है। चलो, हमारे पीछे-पीछे पैर रखो!"पिंकू ने पैर आगे बढ़ाया। परी की आँखें फटी की फटी रह गईं। पिंकू का यह देसी आइडिया इतना सटीक था कि बिना किसी कंप्यूटर और कोड के, सिर्फ पान की पीक थूक-थूक कर वे लोग अदृश्य दरवाजों का पता लगा रहे थे!पिंकू आगे बढ़ते गए—'छपाक!'—"यहाँ पैर रखो परी।"—'छपाक!'—"अरे रुको-रुको, यहाँ मत रखना, यहाँ रस सीधे नीचे गिर गया, मतलब यहाँ पाजी ने गड्ढा खोद रखा है!"इस मज़ेदार और अनोखे पैंतरे से पिंकू पांडे और परी ने अगले दस मिनट के भीतर उस भयानक 'माइंड-मेज़' को पार कर लिया, जिसे आकाशगंगा का कोई बड़े से बड़ा वैज्ञानिक भी पार नहीं कर पाया था। पाजी का चक्रव्यूह एक बनारसी पान के सामने पूरी तरह फेल हो चुका था।जैसे ही वे दोनों चक्रव्यूह के आखिरी छोर पर पहुँचे, 


सामने लोहे का एक विशाल, ऑटोमैटिक दरवाज़ा था जिसके ऊपर लिखा था—"MAIN SERVER ROOM"। टाइमर अब "00:22:05" पर आ चुका था। केवल बाईस मिनट बाकी थे।पिंकू ने दरवाजे पर हाथ रखा, लेकिन तभी दरवाजे के पीछे से किसी के ज़ोर-ज़ोर से रोने की आवाज़ आई। वह परी की छोटी बहन की आवाज़ थी! परी चीख पड़ी—"किशू!"। लेकिन जैसे ही वे अंदर घुसने के लिए आगे बढ़े, दरवाजे के ऊपर लगे दो विशाल ऑटोमैटिक लेज़र गन के बैरल सीधे पिंकू पांडे की छाती पर आकर लॉक हो गए।

आगे क्या होगा जानने के लिए पड़े पिंकू की परी का अगला भाग क्या पिंकू पांडे अपनी जान बचा पाएंगे। 

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