चैप्टर 1: अवेकनिंग फेल
आसमान में ढलते सूरज की लालिमा धीरे-धीरे पूरे लोटस माउंटेन पर फैल रही थी।
छोटी सी सिटी की सड़कों पर लोग अपने-अपने घरों की तरफ लौट रहे थे।
पेड़ों के ऊपर बैठे पंछी भी शोर मचाते हुए अपने घोंसलों की तरफ उड़ चुके थे।
क्योंकि दिन खत्म हो रहा था।
और ये वक्त था… अपने घर लौटने का।
लेकिन उसी शहर के किनारे एक पुराने बरगद के पेड़ की एक ऊँची शाख पर एक लड़का चुपचाप बैठा हुआ था।
उसकी नज़रें सामने डूबते हुए सूरज पर टिकी थीं।
आँखें हल्की लाल हो चुकी थीं।
मानो वो बहुत देर से खुद को रोने से रोक रहा हो।
उसने अपनी मुट्ठियाँ कस लीं।
क्योंकि बचपन से उसने बस एक ही बात सुनी थी।
“लड़के रोते नहीं हैं।”
रोना सिर्फ लड़कियों का काम होता है।
लेकिन इस वक्त…
उसे दिल से लग रहा था कि काश वो रो सकता।
काश वो अपने सीने में भरे उस दर्द को बाहर निकाल सकता।
उस लड़के का नाम था… समीर।
एक बहुत ही साधारण मिडिल क्लास परिवार का लड़का।
उसके पिता एक छोटी कंपनी में क्लर्क थे।
और उसकी माँ एक साधारण हाउस वाइफ थी।
उनका परिवार बस किसी तरह से अपना गुजारा चला लेता था।
लेकिन फिर भी उनके घर में खुशियाँ थीं।
उम्मीदें थीं।
और उन उम्मीदों का सबसे बड़ा कारण था… समीर।
क्योंकि इस दुनिया में सिर्फ दो तरह के लोग सम्मान के साथ जीते थे।
पहले… जादूगर।
और दूसरे… जादूगरों के पीछे खड़े बड़े लोग।
बाकी आम इंसानों की जिंदगी की कीमत यहां लगभग कुछ भी नहीं थी।
क्योंकि ये दुनिया इंसानों की नहीं थी।
ये दुनिया मॉन्स्टर्स की थी।
खूंखार राक्षसों की।
ऐसे जीवों की… जो इंसानों को बस खाने के रूप में देखते थे।
मगर फिर भी आज अगर इंसान जिंदा बचे थे…
तो सिर्फ इसलिए क्योंकि जादूगर उनके सामने ढाल बनकर खड़े थे।
जो अपने मैजिक एलिमेंट की ताकत से उन राक्षसों का सामना करते थे।
इसलिए इस समाज में जादूगर बनना सिर्फ एक करियर ऑप्शन नहीं था।
वो सम्मान था।
शक्ति थी।
एक जिम्मेदारी थी।
और एक नई जिंदगी का दरवाज़ा था।
और समीर…
उस दरवाज़े तक पहुँच चुका था।
उसने दिन-रात मेहनत करके अपने एग्जाम में बयासी प्रतिशत हासिल किए थे।
और इस दुनिया में जादूगर बनने की सबसे पहली यही शर्त थी जादूगरी के लिखित एग्जाम में कम से कम 70 परसेंट लाना।
जब रिज़ल्ट आया था…
उस दिन उसके घर में पहली बार ऐसा माहौल था मानो कोई त्योहार हो।
उसके पिता खुशी से बार-बार लोगों को उसका रिज़ल्ट दिखा रहे थे।
और उसकी माँ…
उन्होंने तो उसे सीधा गले से लगा लिया था।
उनकी आँखों से खुशी के आँसू रुक ही नहीं रहे थे।
“मेरा बेटा जादूगर बनेगा…”
वो बार-बार यही कह रही थीं।
उसकी मां ने मारे खुशी के पूरे महीने का बजट बिगाड़ कर समीर की फेवरेट बिरयानी बनाई थी।
सबकी खुशी और अपनी फेवरेट बिरयानी को देख कर समीर भी खुश था।
बहुत ज्यादा खुश।
क्योंकि उसे लग रहा था कि अब उसकी जिंदगी बदल जाएगी।
अब उसकी मां को हर पल अपने घर के बजट की नहीं सोचनी पड़ेगी।
उसके पिता को अब धक्के खाते हुए उस भीड़ भाड़ वाली बस का सफर नहीं करना पड़ेगा।
अब वो अपने माँ-बाप को वो जिंदगी दे पाएगा… जिसके वो हकदार थे।
और फिर…
आखिर कार आज अवेकनिंग का दिन आ ही गया।
वो दिन… जो किसी भी छात्र की जिंदगी का सबसे बड़ा दिन माना जाता था।
समीर को कोई खास बड़े और खास मैजिक एलिमेंट की चाहत नहीं थी।
वो तो बस एक आम सा मैजिक एलिमेंट जगाकर भी खुश हो जाता।
वो बस अपने लोगों के कुछ न कुछ काम आना चाहता था और खास कर अपने माता पिता के।
इसलिए अगर वो एक आम सा लाइट या वॉटर एलिमेंट भी जगा लेता तो भी वो खुश हो जाता।
क्योंकि इस दुनिया में लाइट एलिमेंट और वाटर एलिमेंट वाले अनगिनत जादूगर थे।
जो कि अपनी जिंदगी में कुछ खास नहीं कर पाए थे।
मगर फिर भी उनके पास आम लोगों से ज्यादा पैसा और संसाधन थे।
इसलिए लोटस माउंटेन जैसे छोटे से शहर में एक लाइट एलिमेंट या वॉटर एलिमेंट जादूगर को भी बहुत ज्यादा इज्जत भरी नजरों से देखा जाता था।
समीर अपने माता पिता के साथ अपनी अवेकनिंग करवाने के लिए अवेकनिंग हॉल में गया था।
विशाल हॉल के बीचों-बीच एक सफेद चमकता हुआ अवेकनिंग स्टोन रखा हुआ था।
एक-एक करके छात्र आगे जा रहे थे।
जैसे ही कोई अपना हाथ उस अवेकनिंग स्टोन पर रखता…
पूरा अवेकनिंग स्टोन चमक उठता।
किसी के अंदर विंड एलिमेंट जाग रहा था।
किसी के अंदर अर्थ।
तो किसी के अंदर आइस।
हर नई चमक के साथ हॉल तालियों और खुशियों से गूंज उठता।
और फिर…
समीर का नंबर आया।
उसने गहरी सांस ली।
उसके माता-पिता की आँखें उम्मीद से चमक रही थीं।
समीर धीरे-धीरे आगे बढ़ा।
उसका दिल इतनी तेज़ धड़क रहा था कि उसे खुद अपनी धड़कनें सुनाई दे रही थीं।
फिर उसने दोनों हाथ उस अवेकनिंग स्टोन पर रख दिए।
एक सेकंड बीता।
दो सेकंड।
तीन सेकंड।
लेकिन… कुछ नहीं हुआ।
अवेकनिंग स्टोन बिल्कुल शांत रहा।
ना कोई रोशनी।
ना कोई प्रतिक्रिया।
पूरा हॉल अचानक खामोश हो गया।
समीर की आँखों में उम्मीद धीरे-धीरे टूटने लगी।
वो मन ही मन बोला, “पर ये तो सिर्फ 2 या 3 सेकंड में एक अलग रंग की रोशनी से जल उठता है?”
उसने दोबारा कोशिश की।
लेकिन फिर भी… कुछ नहीं हुआ।
बार बार कोशिश करने के बाद भी अवेकनिंग स्टोन पूरी तरह से शांत था।
और उसी पल…
उसके कानो में किसी की आवाज गूंजी।
“अब रहने दीजिए और ज्यादा वक्त बर्बाद करने का कोई फायदा नहीं हैं। आपकी अवेकनिंग फेल हो चुकी हैं।”
“आपके पूरे शरीर में कोई जादू है ही नहीं।”
“आप जिंदगी में कभी भी कोई मैजिक एलिमेंट नहीं जगा सकते।”
वो फेल हो चुका था।
उसका कोई मैजिक एलिमेंट नहीं जागा था।
और वो अपनी जिंदगी में कोई भी मैजिक एलिमेंट नहीं जगा सकता था।
समीर को ऐसा लगा मानो ये शब्द उसे बहुत दूर से सुनाई दे रहे थे।
तभी उस अनाउंसर ने समीर का हाथ पकड़ा और उसे नीचे उतार दिया।
वहां मौजूद हर कोई ये देख कर हैरान था।
उसके पीछे खड़े कुछ छात्रों के चेहरे पर दया थी।
तो कुछ के चेहरे पर छुपी हुई हँसी।
उसके पिता का चेहरा एक पल के लिए उतर गया।
लेकिन अगले ही पल उन्होंने जबरदस्ती मुस्कुराने की कोशिश की।
मानो वो अपने बेटे के सामने टूटना नहीं चाहते थे।
उसकी माँ तुरंत उसके पास आईं।
“कोई बात नहीं बेटा…”
उन्होंने कांपती आवाज़ में कहा।
“तुम दूसरी किसी चीज की पढ़ाई कर सकते हो… हम तुम्हें दूसरे शहर भेज देंगे…”
लेकिन समीर कुछ बोल ही नहीं पाया।
उसे समझ ही नहीं आ रहा था कि आखिर अभी अभी उसके साथ हुआ क्या था।
अवेकनिंग फेल…
ये ऐसे शब्द थे जिसे समीर ने कभी सुना ही नहीं था।
और न कभी देखा था।
कोई कितन भी बुरा क्यों न हो वो अवेकनिंग स्टोन को छूकर एक मैजिक एलिमेंट तो जगा ही लेता था।
पर उसके साथ ये क्या हो रहा था?
उसे ऐसा लग रहा था…
मानो किसी ने उसके सारे सपने उसकी आंखों के सामने कुचल दिए हों।
तभी पीछे से एक लड़के की तेज़ आवाज़ आई।
“मैंने पहले ही कहा था… इससे कुछ नहीं होगा।”
“ये पूरा का पूरा बेकार है।”
उस लड़के की बात सुनकर कुछ और लड़के भी हँसने लगे।
समीर ने बस चुपचाप अपना सिर नीचे कर लिया।
तभी भीड़ को हटाते हुए उसका सबसे अच्छा दोस्त सूर्या उसके पास आया।
“भाड़ में गया जादूगर बनना…”
उसने समीर के कंधे पर हाथ रखते हुए कहा।
“मैं भी तेरे साथ अकाउंट्स की पढ़ाई करूँगा।”
“हम दोनों इस सड़े हुए शहर को छोड़ देंगे।”
“भाई दुनिया बहुत बड़ी है ऊपर वाले ने चाहा तो हम कुछ न कुछ ढंग का कर ही लेंगे अपनी लाइफ में।”
समीर ने उसकी तरफ देखा।
और पहली बार उसके चेहरे पर हल्की सी मुस्कान आई।
वो अपने दोस्त सूर्या से बोला।
“पागल है क्या?”
“ये मौका मत छोड़…”
सूर्या कुछ बोलता… उससे पहले ही समीर फिर बोला।
“कम से कम बाद में तू मेरी रक्षा तो कर सकेगा।”
“में नहीं तो क्या। कम से कम तू तो जादूगर बन ही सकता है।”
फिर समीर ने धीमे से कह। “इस पूरी दुनिया में शायद ही कोई दूसरा हो जो अपनी अवेकनिंग में फेल हो जाए।”
ये सुनकर सूर्या चुप हो गया।
पर उसकी आँखों में अपने दोस्त के पीछे छुटने का दर्द साफ दिखाई दे रहा था।
क्योंकि उसे पाता था कि आज से उसके और उसके दोस्त के रास्ते बिल्कुल ही अलग हो जाएंगे।
सूर्या कुछ कहना चाहता था पर उसे सही शब्द ही नहीं मिल रहे थे।
ये देख समीर ने जबरदस्ती मुस्कुराते हुए उसके कंधे पर मुक्का मारा।
“जा… जाके अपना मैजिक एलिमेंट जगा।”
कुछ देर तक तो सूर्या उसे देखता रहा।
फिर आखिरकार वो धीरे-धीरे पीछे मुड़ गया।
और वापस उस लाइन में जाके खड़ा हो गया जहां पर दूसरे बच्चे खड़े हुए थे।
और समीर…
वहाँ से अपने माता पिता के साथ अकेला निकल गया।
जब समीर अपने माता पिता के साथ घर पहुंचा तो वो अपने घर के अंदर जाने के बाद सीधे यही आ गया।
इस बरगद के पेड़ के पास जहां वो बचपन में अक्सर अपने दादा के साथ आया करता था।
समीर अपना सिर झुकाए उस बरगद के पेड़ की शाखा पर चुप चाप बैठा हुआ था।
उसे अपने दादा की एक बात याद आ रही थी।
उसके दादा अकसर कहा करते थे कि ऊपर वाला सबको देखता हैं।
और वो सबकी दिल की बात भी सुनता हैं।
समीर ने शाम के ये नारंगी आसमान की तरफ देखा।
उसकी आंखों में अब भी कुछ उम्मीद बची थी।
उसे लग रहा था कि शायद ऊपर वाला कुछ चमत्कार ही करदे।
पर कुछ भी नहीं हुआ।
तभी उसके कान में चिड़िया के बच्चों की आवाज गूंजी।
समीर ने देखा कि उसके पास की एक दूसरी डाल पर एक चिड़िया का घोंसला था।
उसके अंदर चिड़िया के 2 बच्चे उसी की तरफ देख कर जोर जोर से चीख रहे थे।
मानो वो उसे कोई शिकारी समझ रहे हो।
समीर ने उन्हें देखते हुए कहा। “हा बाबा जा रहा हूं, में तुम्हे कोई चोट पहुंचाने नहीं आया हूं।”
इतना बोलकर समीर उस पेड़ से नीचे उतरने लगा।
समीर ने अभी अपना एक कदम ही नीचे लिया था।
की तभी उसकी नजर आसमान में किसी चमकती हुई चीज पर पड़ी।
समीर ने उसे गौर से देखा तो उसे ऐसा लगा मानो आसमान में कोई लाल तारा चमक रहा हो।
पर अगले ही पल वो लाल तारा धीरे धीरे बड़ा होने लगा।
समीर कुछ समझ पता उससे पहले ही वो तारा एक छोटे जुगनू के आकर से बढ़कर एक फुटबॉल के आकर का हो गया था।
समीर को समझते ज्यादा देर नहीं लगी कि ये कोई तारा नहीं है।
ये कोई उल्का पिंड का टुकड़ा है जो तेजी से उसी की तरफ बड़ रहा था।