अध्याय 5
पिछले अध्याय में हमने देखा था कि उस आदमी ने डॉक्टर को बताया था कि वह परिवार बहुत अच्छा था। वे लोग किसी से ज़्यादा बातचीत नहीं करते थे, किसी के झगड़े में नहीं पड़ते थे और सिर्फ अपनी ज़िंदगी से मतलब रखते थे।लेकिन, जिस आदमी ने उस परिवार के खिलाफ गाँव में अफवाहें फैलाई थीं, वह कोई बाहरी व्यक्ति नहीं था। वह तो मुखिया का ही खास आदमी था। और अब वही आदमी भी रहस्यमय तरीके से मारा जा चुका था। सवाल यह था कि उसकी मौत वास्तव में हुई थी, या फिर उसे जानबूझकर रास्ते से हटाया गया था?डॉक्टर काफी देर तक इन सभी बातों के बारे में सोचता रहा। आखिरकार उसने उस आदमी से कहा,“ठीक है, अब तुम जाओ। अगर तुम्हें आगे कोई और जानकारी मिले, तो मुझे ज़रूर बताना।”डॉक्टर से विदा लेकर वह आदमी अंधेरे का फायदा उठाते हुए, धीरे-धीरे गाँव वालों की नज़रों से बचता हुआ अपने घर की ओर चला गया। डॉक्टर भी कुछ देर बाद वहाँ से अपने घर की तरफ निकल पड़ा।अगली सुबह डॉक्टर की नींद खुली, तो वह सीधे मुखिया के घर पहुँच गया। उसने बाहर से ही आवाज़ लगाई,“अंकल! क्या आप घर पर हैं?”अंदर से कोई जवाब नहीं आया। तभी मुखिया की पत्नी की आवाज़ सुनाई दी,“वह घर पर नहीं हैं। तुम अंदर आ जाओ।”डॉक्टर ने तुरंत जवाब दिया,“नहीं, ठीक है। मुझे थोड़ा काम है, मैं बाद में आता हूँ।”मुखिया की पत्नी ने कहा,“एक काम करो, वह शायद गाँव में ही होंगे। तुम वहीं जाकर उनसे मिल लो।”डॉक्टर वहाँ से निकलकर मुखिया को ढूँढने के लिए गाँव की तरफ चल पड़ा। कुछ ही देर बाद उसे मुखिया गाँव में ही दिखाई दे गया। वह किसी काम में व्यस्त था। डॉक्टर ने जब उसे देखा, तो वह सीधे उसके पास पहुँचा और उसे बाकी लोगों से थोड़ा दूर एक तरफ ले गया।कुछ पल तक डॉक्टर सोचता रहा कि बात की शुरुआत कैसे करे। फिर उसने हिम्मत जुटाकर कहा,“अंकल, आपसे एक बात पूछनी थी।”मुखिया ने उसकी तरफ देखा और बोला,“बोलो बेटा, क्या बात है?”डॉक्टर ने कुछ पल रुककर पूछा,“अंकल, जिस परिवार को मारा गया था... उनके बारे में आपकी क्या राय है?”मुखिया कुछ देर चुप रहा। फिर उसने कहा,“मुझे उस बारे में इतना कुछ पता नहीं है। और मैं ऐसे झगड़ों में ज़्यादातर पड़ता भी नहीं हूँ। गाँव वालों ने जो भी अफवाहें फैलाई थीं, उनके बारे में मुझे ज़्यादा जानकारी नहीं है।”डॉक्टर उसकी बात बड़े ध्यान से सुन रहा था।मुखिया ने अपनी बात आगे बढ़ाते हुए कहा,“अगर मैं उस समय गाँव वालों का साथ नहीं देता, तो शायद पूरा गाँव उसी समय श्मशान बन जाता।”डॉक्टर ने उसकी तरफ देखा। मुखिया ने अपनी बात जारी रखी,“जब गाँव में यह अफवाह फैली कि वही बंगाली परिवार गाँव में होने वाली सारी मौतों का कारण है, तब मैंने भी गाँव वालों का साथ देने का फैसला किया था। मैं उनके साथ गया भी था।”वह कुछ पल रुका और फिर बोला,“लेकिन मैंने न तो उनका घर जलाया था और न ही उनके साथ कुछ गलत किया था। मैं सिर्फ भीड़ के साथ था। उस समय मैं मुखिया भी नहीं था, तब रामचंद्र के पिता मुखिया हुआ करते थे। इसलिए मैंने उस समय कुछ नहीं कहा था।”मुखिया की आवाज़ में अब थोड़ी गंभीरता आ गई थी।“जब गाँव वाले उनका घर जलाकर वापस आए, तभी मैंने अपने तरीके से वहाँ कुछ चीज़ें शुरू की थीं।”डॉक्टर चुपचाप उसकी सारी बातें सुन रहा था। लेकिन उसके मन में कई सवाल और गहरे होते जा रहे थे—क्या सच में मुखिया सच बोल रहा है? या फिर जो आदमी डॉक्टर से मिला था, उसने झूठ कहा था? क्या मुखिया का उस परिवार से कोई पुराना झगड़ा था? या फिर उस मारे गए आदमी का उस परिवार से कोई विवाद था? ऐसे तमाम तरह के विचार और अलग-अलग शक डॉक्टर के मन में उठने लगे थे। क्या डॉक्टर का मानना सच था