कॉल - 1 sky द्वारा लघुकथा में हिंदी पीडीएफ

Featured Books
  • कागज़ की आत्मा

    कागज़ की आत्मायादों, सपनों और एक अनसुनी आवाज़ की कहानीअध्याय...

  • Money Vs Me - Part 35

      उन्होंने मुझ पर अपने फैसले नहीं थोपे थे। उन्होंने मुझे अपन...

  • Mafia saiya chapter 10

    अध्याय 10 : हवेली का भूत और पहली किसपूरा कमरा अंधेरे में डूब...

  • CRAVE - Part - 14

    दृश्य वहीं से शुरू होता है...फ्लाइट के अंदर... ️जुशेंग अपनी...

  • तुम मिले, जब मैं खुद से बिछड़ गई - 21

    सुबह Aashi कॉलेज की लाइब्रेरी में बैठी अपनी नई कहानी के लिए...

श्रेणी
शेयर करे

कॉल - 1

हर दिन एक ही कॉल, ठीक 12 बजे, और फिर सन्नाटा। और जब भी कोई कॉल उठाए, सिर्फ एक आवाज़ 
 "मुझे क्यों मारा?" ये सिलसिला कुछ सालों तक यूँ ही चला, लेकिन एक दिन कुछ ऐसा हुआ जिसने सब बदल दिया, और फिर वो आवाज़ कभी नहीं आई।

ये बात है एक लड़के की, जो अपनी ज़िंदगी से हार चुका था। उसके पास ना तो जीने की कोई वजह थी और ना ही चाहत। वो जो भी करना चाहता, सब में असफल हो जाता। पर एक दिन उसने अपनी हताश ज़िंदगी को खत्म करने का सोचा। वो अपने घर पहुँचा और खुद को कमरे में बंद कर लिया। उसने अपना ड्रॉअर खोला और उसमें से एक तेज़ धार वाला चाकू निकाला।

उसने चाकू इतना कसकर पकड़ा मानो वो अपनी ज़िंदगी को पकड़े हुए हो कि काश उसे जीने की कोई वजह मिल जाए। वो धीरे-धीरे चाकू अपने गले की ओर ला रहा था, तभी उसके बेड के साइड में रखा उसका फोन बजता है। पहले तो वो ध्यान नहीं देता, ये सोचकर कि शायद कोई कर्ज़दार होगा। वो चाकू को गले के पास रखता है, लेकिन इससे पहले कि वो चाकू को फेरता, फोन फिर बजता है।

इस बार वो खुद को रोक नहीं पाता। वो फोन उठाता है। देखता है, कॉल अनजान नंबर से आ रही थी। उसे समझ नहीं आया कि ये किसका नंबर है। तब भी वो फोन उठाता है और अपने कान के पास रखता है।

"हेलो? कौन?"

दूसरी तरफ से कोई आवाज़ नहीं आती।

वो फिर पूछता है, "हेलो? कौन?"
लेकिन कोई आवाज़ नहीं। वो सोचता है कोई उसके साथ मज़ाक कर रहा है। वो कॉल रखने ही जाता है, तभी दूसरी तरफ से आवाज़ आती है। आवाज़ एक लड़की की थी, जो बहुत तड़पती हुई आवाज़ में सवाल कर रही थी 

"मुझे... मुझे क्यों मारा?"

उस लड़के को कुछ समझ नहीं आता। वो अपने कान से फोन हटाकर देखता है। कॉल पर कहीं नहीं लिखा था कि कॉल कहाँ से आ रही है।

वो लड़का फिर पूछता है, "कौन है?"

लड़का थोड़ा डरते हुए बोलता है, "क्या कोई मेरे साथ मज़ाक कर रहा है?"

उधर से कोई कुछ नहीं बोलता। फिर बस एक आवाज़ आती है|

"मुझे क्यों मारा?"

लड़का थोड़ा डरते हुए बोलता है, "कौन बोल रहा है?"

लेकिन उधर से कोई जवाब नहीं आता। फोन एक बीप के साथ कट हो जाता है।

लड़का फोन को देखता रहता है कि ये अभी हुआ क्या। वो दोबारा उस नंबर पर ट्राय करता है, लेकिन नंबर अनअवेलेबल बताता है।

लड़के को कुछ समझ नहीं आता। तभी उसकी नज़र उसके हाथ में पकड़े हुए चाकू पर जाती है, जिससे थोड़ी देर पहले वो अपना गला काटने वाला था। पर अब उसका मन मरने का नहीं था। उसके दिल में एक अजीब सी बेचैनी थी कि कौन उसके साथ इतनी रात को मज़ाक कर रहा है, या कोई सच में था जिसे मदद की ज़रूरत थी।

वो काँपते हाथों से चाकू टेबल पर रखता है और इसी सोच में अपने बेड पर बैठ जाता है। उसे पता ही नहीं चलता कब उसे नींद लग जाती है। जब उसकी आँख खुलती है, तब तक सुबह हो चुकी थी।