डिंपल मुड़कर देखती है तो उसे पता चलता है कि वो उसके बॉस हैं। वे हमेशा बहुत शांत और अकेले रहने वाले इंसान थे। स्वभाव से बेहद अच्छे थे, लेकिन किसी से ज़्यादा घुलते-मिलते नहीं थे। जब वे कैफेटेरिया में आए थे, तब उनकी नज़रें बार-बार सिर्फ डिंपल पर ही जा रही थीं। फिर उन्होंने इधर-उधर देखा, कॉफी ली और चुपचाप वहाँ से चले गए।
थोड़ी देर बाद सब नीचे बैठकर सामान्य बातें करने लगे। तभी अचानक डिंपल का फोन बजता है। स्क्रीन पर नेहा का कॉल आ रहा था। डिंपल कॉल उठा लेती है।
नेहा उत्साह से बोलती है,
“कैसा गया तुम्हारा इंटरव्यू? मुझे पता है बहुत अच्छा गया होगा!”
डिंपल हल्की मुस्कान के साथ “हाँ” कहती है।
तभी नेहा फिर कहती है,
“चलो, आज तो तुम्हें मुझे पार्टी देनी पड़ेगी। मैं शाम को तुम्हारे घर आ रही हूँ, समझी? ट्रीट तैयार रखना। और हाँ, तुम मेरी दी हुई ड्रेस पहनकर गई थीं ना? तभी तुम्हें जॉब मिली होगी, वरना नहीं मिलती!”
यह कहकर नेहा हँसने लगती है। फिर वह कहती है,
“अच्छा, अपनी फोटो भेजो।”
डिंपल अपनी ब्लैक कोट वाली ड्रेस में फोटो भेज देती है। फोटो देखते ही नेहा चौंक जाती है और कहती है,
“क्या? तुमने मेरी दी हुई ड्रेस नहीं पहनी? वो तो ब्रांडेड थी ना!”
डिंपल शांत आवाज़ में जवाब देती है,
“मेरे पास जो ये कोट है, वो उसी ब्रांड का असली है। तुम्हारा वाला सिर्फ थर्ड कॉपी था। मैं अपना इम्प्रेशन खराब नहीं करना चाहती थी, इसलिए नहीं पहना। तुम ही पहन लेना उसे, मुझे नहीं चाहिए।”
यह सुनकर नेहा अंदर से बुरी तरह चौंक जाती है। उसके मन में सवाल उठने लगते हैं—
“डिंपल को ये सब कैसे पता चला? और जो लड़की कभी मेरी बात नहीं टालती थी, वो आज ऐसे जवाब कैसे दे रही है?”
लेकिन अगले ही पल वह खुद को सँभालते हुए कहती है,
“सॉरी यार… मेरे पास पैसे और नौकरी नहीं है ना, इसलिए ऐसा किया। लेकिन शाम को मिलते हैं, मैं तुम्हारे लिए कुछ अच्छा लेकर आऊँगी।”
डिंपल तुरंत कहती है,
“नहीं, मुझे कुछ नहीं चाहिए… और शाम को हम नहीं मिलेंगे।”
इतना कहकर वह फोन काट देती है और वापस जाकर बैठ जाती है।
तभी योगिता कहती है,
“मैं चलती हूँ, मेरा बहुत सारा पेंडिंग काम है।”
रिद्धि भी मुस्कुराते हुए कहती है,
“आओ डिंपल, तुम्हारी डेस्क मेरी डेस्क के पास है। चलो उसे अरेंज करते हैं।”
फिर दोनों वहाँ से चली जाती हैं।
ऑफिस का समय खत्म होने के बाद जब डिंपल घर जाने के लिए निकलती है, तभी रास्ते में उसे उसके बॉस मिलते हैं, जिनका नाम कुशाग्र था।
कुशाग्र उसे एक अजीब-सी नज़र से देख रहे थे— जैसे वो उससे कुछ पूछना चाहते हों, लेकिन पूछ नहीं पा रहे हों। उनकी आँखों में आश्चर्य, डर और खुशी… तीनों भाव एक साथ दिखाई दे रहे थे। मगर शायद वे अपने दिल के किसी भी एहसास को किसी के सामने जाहिर नहीं करना चाहते थे।
थोड़ी देर चुप रहने के बाद उन्होंने पूछा,
“अगर आपको बुरा न लगे तो… क्या मैं आपको घर छोड़ दूँ? मैं भी उसी तरफ जा रहा हूँ।”
डिंपल विनम्रता से उन्हें ग्रीट करते हुए बोली,
“नहीं सर, मैं चली जाऊँगी।”
फिर अचानक उसे ध्यान आया और उसने हैरानी से पूछा,
“लेकिन सर… आपको कैसे पता कि मेरा घर उस तरफ है?”
यह सुनकर कुशाग्र थोड़ा हिचकिचा गए। फिर धीरे से बोले,
“उम्म… वो… आपके रिज़्यूमे में जो एड्रेस लिखा था, वो मुझे देखना होता है ना। जिन लोगों को हायर किया जाता है, उनकी फाइल्स मैंने देखी थीं… उनमें आपकी फाइल भी थी। और… मेरा घर भी उसी रास्ते में थोड़ा आगे है, इसलिए पता चल गया।”
डिंपल मन ही मन सोचने लगी—
“हाँ… मुझे याद है, आगे चलकर ये कंपनी के सीईओ भी बने थे। इन्होंने कंपनी को बहुत आगे तक पहुँचाया था… लेकिन इन्होंने कभी शादी नहीं की…”
यही सोचते हुए वह बोली,
“नहीं सर, मैं ठीक हूँ। आप जाइए।”
कुशाग्र हल्का-सा सिर हिलाकर आगे बढ़ जाते हैं और अपने घर की ओर निकल जाते हैं।
तभी अचानक पीछे से कोई डिंपल के कंधे पर हाथ रखता है।
डिंपल घबराकर पीछे मुड़ती है… और उसे देखते ही चीख पड़ती है—
“तु…म्म्म…!”