एपिसोड 1: किस्मत का ‘विसर्जन’ और वह अनोखा मेहमान
मकान का हाल: बरेली की सबसे तंग गली
बरेली के एक पुराने इलाके में, जहाँ गलियाँ इतनी तंग हैं कि दो साइकिलें साथ निकल जाएँ तो जगह कम पड़ जाए, वहीं एक छोटा सा मकान है।
इस मकान की दीवारों का रंग कब का उड़ चुका है, और बारिश के दिनों में यहाँ से प्लास्टर ऐसे झड़ता है जैसे किसी बूढ़े आदमी की खाल।
घर के एक कोने में एक टॉयलेट है, जिस पर दरवाज़ा लगाने के पैसे नहीं थे, इसलिए एक पुरानी बोरी का पर्दा टांगा गया है।
यही टॉयलेट घर का सबसे बड़ा “दुश्मन” है, क्योंकि इसकी बदबू पूरे मोहल्ले में बित्तो के परिवार का पता बता देती है।
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चरित्र परिचय: बित्तो (आलसी क्वीन)
सुबह के 11:25 बज रहे हैं।
सूरज सीधे बित्तो के आँगन में आकर उसकी नाक पर चमक रहा है, लेकिन बित्तो (20 साल) अभी भी अपनी फटी हुई चादर में लिपटी हुई है।
बित्तो की सबसे बड़ी खूबी यह है कि वह सोते-सोते थक जाती है… और फिर थकान मिटाने के लिए दोबारा सो जाती है।
12वीं पास किए उसे दो साल हो गए, लेकिन उसकी “करियर की गाड़ी” अभी भी “अगली बार पक्का” वाले स्टेशन पर ही खड़ी है।
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“दीदी! ओ दीदी! उठ जाओ, वरना मम्मी आज बेलन से स्वागत करेंगी!”
— यह गोलू है, बित्तो का छोटा भाई।
बित्तो ने एक आँख खोली और बोली,
“गोलू… तू स्कूल क्यों नहीं गया? और ये शोर बंद कर, मैं अभी सपने में समोसा खाने वाली थी।”
गोलू उदास होकर बोला,
“दीदी, आज छुट्टी है… और घर में समोसा तो दूर, सूखी रोटी भी नहीं है। मम्मी काम ढूँढने गई हैं।”
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घर की हालत और वो ‘दो बिस्किट’
बित्तो उठी और किचन के नाम पर बने छोटे से शेल्फ की तरफ गई।
वहाँ एक पुराना लोहे का डिब्बा रखा था।
जब उसने डिब्बा खोला…
तो अंदर सिर्फ दो पारले-जी बिस्किट बचे थे।
यही उनका पूरे दिन का खाना था।
पापा दूसरे शहर में नाइट गार्ड की नौकरी करते हैं… और उनकी तनख्वाह आने में अभी एक हफ्ता बाकी है।
बित्तो ने गहरी साँस ली…
बिस्किट उठाए… और पानी के गिलास के साथ आँगन में बैठ गई।
“काश… किस्मत बदल जाती…” उसने बड़बड़ाया।
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ट्विस्ट: वो ‘पानी वाला कीड़ा’
तभी अचानक… आसमान में एक अजीब सी रोशनी चमकी।
जैसे कोई तारा टूटा हो…
लेकिन वो तारा नहीं था।
एक बिल्कुल पारदर्शी, काँच जैसा चमकता हुआ कीड़ा —
जो बिल्कुल पानी की बूंद जैसा दिख रहा था —
सीधे बित्तो के गिलास में गिर गया।
लेकिन बित्तो इतनी आलसी थी कि उसने देखा ही नहीं।
उसने बिस्किट खाया…
और “गट-गट” करके पानी पी गई…
और उसी के साथ वह जिंदा कीड़ा भी उसके पेट में चला गया।
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ट्रांसफॉर्मेशन: टॉयलेट का ‘जैकपॉट’
10 मिनट बाद…
बित्तो का पेट ऐसे गरजने लगा जैसे बादलों में बिजली कड़क रही हो।
“गोलू! रास्ता साफ कर… इमरजेंसी है!”
वह भागती हुई टॉयलेट की तरफ गई।
अंदर जाकर जो हुआ…
वह किसी चमत्कार से कम नहीं था।
जो बाहर निकला…
वह पिघले हुए सोने जैसा चमक रहा था।
लेकिन बित्तो ने ध्यान नहीं दिया।
पानी डाला… और बाहर आ गई।
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नाली का चमत्कार
कुछ ही मिनटों में…
वह “सुनहरा तरल” नाली से बहकर बाहर गया…
और जमकर असली सोना बन गया!
एक लड़का चिल्लाया —
“अरे! नाली में सोना!”
पूरा मोहल्ला बाहर आ गया।
लोग चम्मच, डंडे, कड़छी लेकर नाली खोदने लगे।
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मम्मी की एंट्री
बित्तो की मम्मी काम से लौटीं और भीड़ देखकर चौंक गईं।
“क्या हुआ?”
शांति आंटी बोलीं —
“अरे, सोना निकला है नाली से! एक आदमी तो करोड़पति बन गया!”
मम्मी का दिल धड़क उठा…
लेकिन वह उदास होकर घर चली गईं।
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घर के अंदर – बदबू का हमला
जैसे ही मम्मी अंदर आईं…
उन्हें ऐसी बदबू आई कि उन्होंने तुरंत पल्लू से नाक ढक ली।
“अरे बित्तो! ये क्या कर दिया तूने!”
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एंड सीन (हुक)
इधर बित्तो फिर सो गई…
उसे नहीं पता —
कि बाहर नाली में जो सोना मिला…
वह उसी की “सुबह की मेहनत” का नतीजा था।
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एपिसोड 1 का क्लाइमैक्स हुक
अचानक…
बित्तो का पेट फिर गरजने लगा।
“मम्मी… फिर से इमरजेंसी!”
वह भागी टॉयलेट की तरफ…
और उसी समय बाहर से गोलू चिल्लाया—
“मम्मी! फिर से सोना निकल रहा है!”
मम्मी ने नाली की तरफ देखा…
फिर टॉयलेट की तरफ…
और उनके दिमाग में बिजली कौंधी—
“क्या बित्तो का पेट… सोने की खान बन गया है?”
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अगला मोड़ (सस्पेंस)
मम्मी घबरा गईं—
“अगर लोगों को पता चल गया…
तो ये लोग बित्तो को ही उठा ले जाएँगे!”
उन्होंने चिल्लाकर कहा—
“गोलू! जल्दी से नाली बंद कर!
ये खजाना अब हमारा है!”
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जारी रहेगा…
लेखिका: पूजा कुमारी ✍️