अदाकारा - 52 Amir Ali Daredia द्वारा क्राइम कहानी में हिंदी पीडीएफ

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अदाकारा - 52

*अदाकारा 52*

 
मैं तो दीवानी हो गई 
प्यारमे तेरे खो गई 
निर्मल झा का फ़ोन था। 
शर्मिलाने फ़ोन कलेक्ट करके कान पर लगाया।
"हाँ ज़ा जी बोलिए।"
"मैडम।सुमधुर डेयरी के मैनेजर का फ़ोन आया था।उनके प्रोडक्ट के जो एड अभी बाकी है उनमें से अभी एक की एड वो करवाना चाहते है।”
"ठीक है। मेरा थोड़ा मूड ठीक होने दो मे आपको एड की तारीख बताती हु।"
"ठीक है मैडम।"
यह कहकर निर्मल ने फ़ोन रख दिया।
निर्मल से बात करने के बाद शर्मिलाने उर्मिला को फ़ोन किया।
"हेलो उर्मि।कैसी हो?"
"मजे मे हूँ और तु?"
"में मज़े मे नहीं हूँ।"
"क्या हुआ?सब ठीक तो है?"
उर्मिला ने चिंतित स्वर में पूछा।
तो शर्मिलाने उसे *हो गए बर्बाद* के सेट पर रंजन के साथ हुए झगड़े के बारे में विस्तार से सब कुछ बताया।
"तो अब?"
"कुछ दिन आराम करूँगी।बाद में देखेंगे। लेकिन मैंने इसीलिए फोन किया है उर्मि। सुमधुर डेयरी वाले का फ़ोन था।उन्हें अपने अगले प्रॉडक्ट के एड की शूटिंग के लिए डेट चाहिए।"
"मुझे थोड़ा वक़्त दो।सुनील का आउटडोर टिकट बुक होने के बाद मैं तुझे बताती हूं।"
"कोई बात नहीं।"
यह कहकर शर्मिला ने फ़ोन रख दिया।
रंजन घर पहुँचा उस वक्त जयदेव गुस्से में मुट्ठियाँ भींचे घर में यहां से वहां ओर वहां से यहां घूम रहा था।रंजन को देखते ही वह उस पर बरस पड़ा।
"नालायक।निकम्मे।तु करना क्या चाहता है? क्या तु मुझे फिल्म *हो गए बर्बाद* के टाइटल की तरह बर्बाद करना चाहता है?"
जयदेव का गुस्सा देखकर रंजनने अपना बचाव करते हुए कहा।
"मेरी कोई गलती नहीं है डैडी।नाचते हुए मेरी उंगली जरासी उसके ब्रेस्ट को क्या छू गई। उसने मुझे थप्पड़ मार दिया।"
"तूने जानबूझ कर उसके स्तन छुए होंगे।मैं तेरी रग रग से अच्छी तरह वाकिफ हूं।"
"देखो डैडी।जो होना था सो हो गया और अब उसे बदला नहीं जा सकता।"
 
"और डेढ़ करोड़ रुपये डूबेंगे उसका क्या?"
"एक भी रुपया नहीं डूबेगा पापा।तुम चिंता मत करो।"
रंजन ने जयदेव को दिलासा देते हुए कहा।
"तुझे क्या लगता हे?वो लड़की अब आगे शूटिंग करेगी?"
"वो क्या उसका बाप भी करेगा?मैं उसे मजबूर करूँगा ये फिल्म पूरी करने के लिए।"
रंजनने अकड़ दिखाते हुए कहा। 
तो जयदेवने चौंक कर पूछा।
"अब ओर क्या करने का इरादा है?"
"बस मुझे थोड़ा वक़्त दो।और थोड़ा इंतज़ार करो।देखो मैं उसे कैसे लाइन पर लाता हूं?"
"ऐसा कुछ मत करना गधे की औलाद।जिससे मेरी परेशानीया ओर बढ़े।"
जयदेव के मुख से अप शब्द के साथ साथ चेतावनी के सुर निकले।
सुनील की 16 दिसंबर की बैंगलोर से रिटर्न टिकट बुक हुई थी।ओर इसलिए सुमधुर डेयरी प्रोडक्ट्स की शूटिंग की तारीख 15 दिसंबर को तय हुई। 
   15 तारीख को शाम 5 बजे उर्मिला बुर्का पहनकर अपनी स्कूटी पर शर्मिला के घर आईं।शर्मिलाने उसे पहले अपने कपड़े पहनाए फिर मेकअप करवाके उसे रेडी किया।और उसे कार की चाबी के साथ अपने फ्लैट की चाबी भी दी।
ओर कहा।
"यह चाबी अपने पास रखो।और अपनी स्कूटी की चाबी मुझे दे दो।मुझे शॉपिंग के लिए मलाड जाना है।अगर तु मुझसे पहले आ गई तो घर खोल कर मेरा इंतज़ार करना हम साथ में खाना खायेंगे ठीक है।ऑल ध बेस्ट।"
शर्मिला ने उसे शुभकामनाएँ देते हुए कहा।
"ठीक है।"
कहकर उर्मि शर्मिला की कार लेकर मीडिया प्रोडक्शन हाउस के लिए निकल पड़ी।
ठीक उसी वक्त रंजन के मोबाइल पर कॉल आई।
"रंजन साहब।मैडम की कार निकल चुकी है।"
"अच्छा?तो अब उसका पीछा करो।ओर जैसे ही सुनसान जगह दिखे हमला करदो।लेकिन याद रहे सावधानी से तुम ये काम करोगे अपने हमले का मकसद सिर्फ़ उस हरामजादी को डराना है।सिर्फ ओर सिर्फ उसकी गाड़ी को नुकसान पहुँचाना है उसे बिलकुल खरोंच भी नहीं आनी चाहिए समझे?"
"ठीक है साहब।जैसा तुमने कहा है वैसा ही होगा।"
और वे दोनों आदमी बाइक से उर्मिला की कार का पीछा करने लगे।
उर्मिला आठ बजे मीडिया प्रोडक्शन हाउस पहुँच गई।आज उसने सुमधुर डेयरी का दही और लस्सी का एड करते करते उन दोनो चीज़ों का स्वाद भी बखूबी चखा।
  और साढ़े दस बजे शूटिंग पूरी करके वो पिकनिक पॉइंट शर्मिला के घर के लिए निकल पड़ी।मीडिया प्रोडक्शन से आते हुए मॉडल टाउन वाली सड़क पर वो मुड़ गई।मॉडल टाउन से सात बंगले तक इस सड़क पर बहुत कम ट्रैफ़िक रहता है।और इसी का फ़ायदा उठाया उन दो गुंडों ने।अचानक उन्होंने अपनी बाइक उर्मिला की कार के सामने लाकर रोक दी।उर्मिला को इमरजेंसी ब्रेक लगानी पडी। बाइक की पिछली सीट पर बैठे आदमी के हाथ में एक लोहे का पाइप था।उसने ज़ाइलो के आगे के शीशे पर उस पाइप के दो ज़ोरदार वार किए। 
और उर्मिला डर के मारे काँप उठी।
 
(वह गुंडों का इरादा क्या था?ओर वो गुंडे उर्मिला को कितना नुकसान पहुँचाएँगे? पढ़िए नेक्स्ट एपिसोड मे)