फाइंडिंग मी, फाइंडिंग अस - पार्ट 4 Kanchan Singla द्वारा प्रेम कथाएँ में हिंदी पीडीएफ

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फाइंडिंग मी, फाइंडिंग अस - पार्ट 4

अगले दिन सुबह होते ही कंगना अपनी दोस्त के साथ स्कूटी पर देहरादून से शिमला के लिए निकल गई थी। जाते जाते भी उसे हिदायतों की लंबी चौड़ी लिस्ट समझा दी गई थी कि उसे रास्ते में क्या करना है और क्या नहीं। जिन्हें वह बचपन से ही सब सुनती आ रही थी। 

रास्ते में उनकी स्कूटी एक कार से टकरा गई जिसकी वजह से कंगना और श्रेया स्कूटी से गिर गई थी। हालांकि उन्हें चोट नहीं लगी थी लेकिन वह दोनों गुस्से में आग बबूला हो गई थी।

समय और उसका ग्रुप जो कॉलेज के आखिरी साल की  आखिरी यादें बनाने शिमला निकला हुआ था वह दोनों इन्हीं की कार से टकराई थी। जैसे ही समय की कार उनकी स्कूटी से टकराती है। समय जो उस वक्त ड्राइव कर रहा था वह अपनी कार को रोकते हुए कार से बाहर निकलता है। 

उसे देख कंगना उससे लड़ने लग लग गई। वह गुस्से में उससे कहती है.... तुम्हे ड्राइविंग नहीं आती तो क्यों ड्राइव कर रहे हो बेवकूफ लड़की।

समय जो व्यवहार में उसी की तरह था वह अपनी गलती नहीं मानते हुए कहता है....तुम्हे स्कूटी चलानी नहीं आती तो क्यों चलाती हो मिस बेवकूफ।

कंगना गुस्से में कहती है....कितने बदतमीज हो तुम एक तो हमें टक्कर मारी ऊपर से हमसे झगड़ भी रहे हो। 

समय कहता है.... ओहो रियली! मैं बदतमीज हूं, तुम टकराई थी हमसे समझी, हमनें तुम्हें टक्कर नहीं मारी।

कंगना गुस्से में कहती है.... लगता है तुम्हारी आखें खराब हो गई हैं या शायद बचपन से ही खराब आंखो के साथ ही पैदा हुए होंगे। व्हाट एवर मिस्टर अंधे !! या शायद शायद तुम्हारी आंखे नहीं बटन है जिनसे तुम्हें दिखाई नहीं देता।

समय कहता है....मुझे लगता है कि तुम अंधी हो और वैसे भी आधी से अधिक दुनियां मानती है कि तुम लड़कियों को स्कूटी या गाड़ी चलानी आती नहीं है फिर भी निकल पड़ती हो दूसरों का एक्सीडेंट करने के लिए।

कंगना कहती है....बस आधी दुनियां कहती है ना, मैं बाकी बची आधी दुनियां से आती हूं जो मानती है कि लड़कियां सब कुछ करने में सक्षम हैं। लड़कों से कहीं अधिक। अगर दुनियां की बात कर ही रहे हो तो सुनो पिछले कई सालों के आंकड़ों के अनुसार दुनियां में सवेंटी थ्री प्रतिशत रोड एक्सीडेंट के मामलों के लिए पुरुष जिम्मेदार हैं और अपने ही देश में इन मामलों में पुरूषों का प्रतिशत एटी प्रतिशत है। बड़े आए आंख के अंधे लड़कियों पर ज्ञान बांटने वाले।

समय कहता है...वो इसलिए अधिक है क्योंकि सड़क पर गाड़ी चलाने वालों में पुरुषों की संख्या महिलाओं से कहीं ज़्यादा है।

वह दोनों ही चुप नहीं हो रहे थे। उनकी बहस लड़ाई का रूप लेने लगी थी। उनके दोस्त झगड़ा बढ़ता देख उन दोनों को खींच कर ले जाने लगे थे।

श्रेया, कंगना को जबरदस्ती खींच कर लेकर जा रही थी। वहीं समय के दोस्त समय को खींच कर ले जा रहे थे।

समय कार में बैठ कर बोलता है....अजीब पागल लड़की है। पहले खुद टकराई हमसे, फिर खुद ही लड़ाई कर रही है।

कंगना जिसका पारा इस वक्त हाई हो रखा था वह गुस्से में बोलती है....अगर यह दोबारा मेरे सामने आया तो इसे छोडूंगी नहीं मैं। दोनों एक दूसरे को एंग्री लुक देते हुए अपने अपने रास्ते मुड़ गए थे।

कहानी जारी है.....!!!!
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