ये हम आ गए कहां!!! - भाग 2 दुःखी आत्मा जलीभूनी द्वारा फिक्शन कहानी में हिंदी पीडीएफ

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ये हम आ गए कहां!!! - भाग 2

रुद्र और विहान भागते हुए रेडियो स्टेशन पहुँचे। वहाँ पहुँचते ही विहान ने रिसेप्शनिस्ट से पूछा, "वो हमें आपकी आरजे शायराना से........ !" रिसेप्शनिस्ट ने विहान को रोकते हुए कहा, "हां हां पता है! आप दोनों को आरजे शायराना से मिलना है लेकिन उससे मिलने की इजाजत किसी को नहीं है, क्योंकि वह खुद भी किसी से मिलना नहीं चाहती इसीलिए तो अपना नाम बदल कर यह शो होस्ट करती है। और वैसे भी अगर वह यहां होती तो आप लोग उससे मिल पाते ना! वह है ही नहीं तो किस से मिलवा हूं आपको?"
रूद्र छूटते ही बोला, "वैसे मिलना तो मुझे आपसे भी था लेकिन सोचा पहले आपकी आरजे से मिल लू। लेकिन अब जब वह यहां नहीं है तो क्या आप फ्री हैं? मुझे पूरा यकीन है कि यह जो आपकी आरजे शायराना है वह आपसे ज्यादा खूबसूरत तो नहीं होगी, शर्त लगा लो!" वह रिसेप्शनिस्ट शर्मा कर रह गई। रूद्र का असर ही कुछ ऐसा था कि कोई लड़की उसे ना नहीं कह पाती थी। इस दुनिया में सिर्फ एक ही लड़की ऐसी थी जो उसे बिल्कुल भी भाव नहीं देती थी और वह थी शरणया। रूद्र अनजाने में ही शरण्या की ओर खींचा जा रहा था, बिना यह जाने कि जिस आवाज के पीछे वह दीवाना हुआ है असल में उससे उसका छत्तीस का आंकड़ा है।
बाहर निकलते ही रूद्र विहान पर भड़क उठा, "मैंने बोला था तुझे तेरी वह बहन पनौती है मेरे लिए! देखा, मैंने कहा था ना कोई फायदा नहीं होगा यहां आने का। नहीं मिली ना! वह काली बिल्ली रास्ता काट जाए तो फिर काम कैसे पूरा होगा!"
विहान भी गुस्से मे बोला, "तेरा काम नहीं हुआ? किसने कहा तेरा काम नहीं हुआ! अभी अभी उस रिसेप्शनिस्ट से तु उसका नंबर लेकर आया है। रात में उसके साथ डिनर पर जाने वाला है और तू कहता है कि तेरा काम नहीं हुआ? तुझ जैसा कमीना इंसान मैंने आज तक नहीं देखा और तू मेरी बहन पर इल्जाम लगा रहा है! सोच समझकर बोलना रूद्र, बिल्कुल सही कहती है वह। तू रजिया है रजिया! तेरे नखरे बिल्कुल वैसे ही है। एक आवाज के पीछे तू इतना दीवाना हो गया कि सुबह सुबह मुझे परेशान कर यहां ले आता है। कहता है सच्चा वाला प्यार हो गया है तुझे और यहां आकर क्या करता है तू? किसी और लड़की के चक्कर में फंस जाता है! तेरे जैसा इंसान अगर किसी एक लड़की के लिए अपनी पूरी जिंदगी कुर्बान कर दे, उस दिन यह दुनिया ही नहीं बचेगी।" विहान इस वक्त बहुत गुस्से में था।
"अरे यार मैं किसी लड़की के चक्कर में नहीं पड़ता हूं! लड़कियां ही मेरे पीछे आती है तो मैं क्या करूं? और फिर माँ भी तो कहती है ना कि हमें हमारी लाइफ पार्टनर सोच समझ कर चुनना चाहिए, तो बस मैं वही करता हूं। मैं किसी के साथ अफेयर नहीं करता बल्कि मैं हर लड़की के साथ इसलिए डेट करता हूं ताकि मुझे पता चल सके कि वह मेरे साथ कंपैटिबल है या नहीं!" रुद्र उस समझाते हुए बोला लेकिन विहान कहाँ सुनने वाला था।
"ऐसा है ना बेटा! तो दुनिया में सारी लड़कियां खत्म हो जाएगी और सिर्फ एक ही लड़की ऐसी बचेगी तेरे लिए जो तेरे साथ कंपैटिबल हो या ना हो लेकिन तुझे ठोक बजाकर सीधा जरूर कर दे और इस दुनिया में सिर्फ एक ही लड़की ऐसी है जो तेरी खटिया खड़ी कर सकती है!" विहान भड़कते हुए बोला तो रुद्र ने अपने हाथ से उसका गला दबाते हुए बोला, "अबे तेरी शक्ल अच्छी नहीं है, कम से कम बातें तो अच्छी कर लिया कर! तुझे कोई और नहीं मिली मेरे लिए? उस शाकाल को देखा है अच्छे से? तु मेरे लिए उसे चुन रहा है! इस दुनिया में सारी लड़कियां मर भी जाए ना और वह आखरी बची हो तो भी मैं और वह एक साथ नहीं हो सकते। अबे वह लड़की है ही नहीं तो फिर काहे का रिश्ता काहे कि कंपैटिबिलिटी! अब ज्यादा बकवास मत कर और मुझे घर छोड़ दें वरना हिटलर मेरी बैंड बजा देगा।"
विहान ने उसे गुस्से में घूरा और उसे लेकर निकल गया। घर पहुंचते ही रूद्र चुपके से घर के अंदर दाखिल हुआ लेकिन उसके पापा धनराज सिंघानिया हॉल में ही बैठे मिल गए। रूद्र को देखते ही उन्होंने गुस्से में बोला, "सुबह हो गई तुम्हारी! घर आने का वक्त मिल गया तुम्हें! तुमने तो जैसे कसम खा रखी है हमारे नाक में दम करने का! हमारी इज्जत को सरे बाजार नीलाम करने का! तुम्हें तो अपना बेटा कहते हुए भी शर्म आती है। देखो अपने भाई को, सिर्फ अपने काम से काम रखता है। एक साल पहले ऑफिस ज्वाइन कर ली उसने लेकिन तुम्हारा तो कोई ठिकाना नहीं। इस जन्म में तुम कोई ढंग का काम करोगे भी या नहीं? भगवान ने भी ना जाने किस जन्म का बदला लिया है हमसे जो तुझ जैसी औलाद मिली। अरे हमारा सर गर्व से उठा नहीं सकते तो कम से कम ऐसा कोई काम तो मत करो जिससे हमारा सर झुके। अगर ऑफिस नहीं ज्वाइन करना तो बाहर ऐसे अयाशियां तो मत किया करो। कल की तुम्हारी सारी हरकतें मीडिया में जाने वाली थी, वह तो रेहान ने रोका वरना इस वक्त हमारे खानदान की इज्जत मिट्टी में मिल चुकी होती।"
रूद्र समझ गया कि उसके पापा बहुत ही ज्यादा गुस्से में है। जितना सोचा था उससे भी कहीं ज्यादा लेकिन यह तो उनका रोज का काम था। ना वह बदलने वाला था और ना ही उसके पापा। एक दिन अगर डाँट ना खाए तो उसका भी खाना नहीं पचता था। पूरी रात घर से बाहर रहना और पूरा दिन घर में सोना, यह रूद्र की रोज की आदत थी। कुछ देर चुपचाप सर झुका कर अपने पापा की डांट सुनने के बाद वह धीरे से अपने कमरे में चला गया और सो गया, जैसा कि हमेशा होता था। उसे तो इन सब की आदत पड़ चुकी थी।
इधर शरण्या ने अपनी बाइक पिछले दरवाजे से अंदर गेराज में डाली और पेड़ पर चढ़कर अपने कमरे की बालकनी तक गई। इससे पहले कि वो बालकनी का दरवाजे पर नाॅक करती, उसकी बहन लावण्या ने बालकनी का दरवाजा खोल दिया। शरण्या ने मुस्कुराते हुए अपनी बहन को गले से लगा लिया और बोली, "घर में कोई उठा तो नहीं है? किसी ने मुझे ढूंढा तो नहीं?" लावण्या बोली, "बिल्कुल भी नहीं! रोज की तरह आज भी किसी ने तुझे नहीं ढूंढा और किसी को नहीं पता कि तू घर से बाहर है लेकिन ऐसा कब तक चलेगा शरु? एक ना एक दिन तो सबको पता चल ही जाएगा! फिर पता है न! मॉम घर में हंगामा कर देंगी।"
शरण्या कमरे के अंदर दाखिल होते हुए बोली, "मैं चाहे जो भी करूं, अच्छा या बुरा उन्हें तो वैसे ही नहीं पसंद। मैं ऐसा क्या करूं जो उन्हें पसंद हो! मेरी तो एक भी चीज उन्हें अच्छी नहीं लगती! ना मेरी कोई आदत ना मेरी कोई हरकत! पता नहीं वह क्या चाहती है और पता नहीं मेरी पूरी लाइफ में ऐसा एक दिन आएगा भी या नही जब वह मुझसे खुश होंगी, जब मैं उन्हें खुश कर पाऊंगी। यह तो एक सपना सा हो गया है मेरे लिए। समझ में नहीं आता दी, हम दोनों ही उनकी बेटियां हैं फिर जितना प्यार वो आप से करती हैं उनका एक हिस्सा भी मुझे क्यों नहीं मिलता? क्यों कभी मेरे सर पर प्यार से हाथ नहीं फेरा उन्होंने? क्या मैं उनकी बेटी नहीं हूं? क्या मैं आपकी बहन नहीं हूं? आखिर क्यों?"

यह शरण्या के लाइफ का सबसे बड़ा दर्द था और सबसे गहरा भी। जहां एक ओर हर कोई उसे प्यार करता था, यहां तक कि उसके पापा और उसकी बहन उस पर जान छिड़कने थे लेकिन उसकी मां ने एक बार भी उसे गले लगाना तो दूर सर पर हाथ भी नहीं फेरा था। दो मीठे शब्द कहना तो दूर की बात है। यही बात लावण्या को भी खटकती थी आखिर ऐसी कौन सी वजह थी जो उसकी मां ने कभी उसकी बहन को मां का प्यार नहीं दिया। इस बारे में कई बार उसने अपने पिता ललित रॉय से भी बात करनी चाही लेकिन उन्होंने कभी या तो बात टाल दी या फिर बात ही बदल दी। सीधे तौर पर कहे तो वह इस बारे में कोई बात ही नहीं करना चाहते थे। वैसे भी घर में लावण्या की मां अनन्या की ही चलती थी।
शरण्या ने कपड़े बदलकर रात वाले कपड़े पहने और लावण्या के साथ नीचे आ गयी। लेकिन एक झटका उसे यहाँ लगना था। नीचे ललित और अनन्या के साथ विहान भी बैठा हुआ था और वो खुद भी शरण्या को देख कर हैरान था। घरवालों के सामने अपनी पोल खुलते देख शरण्या ने उसके मुह मे एक सैंडविच का टुकडा ठूस दिया और बोली, "मॉम!!! मेरे लिए कॉफ़ी बना दीजियेगा प्लीज!" शरण्या अच्छे से जानती थी कि इससे अनन्या बुरी तरह भड़क जायेगी और जो हुआ भी। अनन्या गुस्से मे बोली, "हाँ! हाँ!! क्यों नही? महारानी इतनी देर से सो कर उठेंगी और मैं उनके आवभगत के लिए हमेशा तैयार खड़ी रहूँगी। मैं तो इसकी नौकरानी हु ना जो इसके लिए ही यहाँ आई हु
ललित को यह बात बिल्कुल भी अच्छी नहीं लगी लेकिन शरण्या को इस सब की आदत पड़ चुकी थी इसलिए उसे कोई फर्क नहीं पड़ा। अनन्या का ऐसा बर्ताव शुरू से ही था जिसकी वजह ना शरण्या जानती थी और ना ही लावण्या। शरण्या ने जानबूझकर अनन्या को उकसाया ताकि विहान किसी के सामने उसकी पोल ना खोल सके। विहान को ज्यादा कुछ तो पता नहीं था लेकिन उसे सिर्फ इतना पता था कि शरण्या सुबह-सुबह कहीं जाती है लेकिन कहां? इस बारे में सिर्फ लावण्या जानती थी।
ललित रॉय और धनराज सिंघानिया शहर के सबसे बड़े उद्योगपतियों में से एक थे। उन दोनों की दोस्ती कॉलेज टाइम से ही थी जो बाद में बिजनेस में भी साझेदार के रूप में कायम रही। अपना कॉलेज खत्म करने के बाद शरण्या खुद के दम पर कोई काम करना चाहती थी लेकिन ललित की चाहत थी कि उनकी दोनों बेटियां उसके बिजनेस में हाथ बटाएं। लावण्या तो ललित के ऑफिस में डिजाइनिंग डिपार्टमेंट में थी लेकिन अनन्या शरण्या के ऑफिस ज्वाइन करने के सख्त खिलाफ थी और साथ ही बाहर कहीं और काम करने के भी खिलाफ थी।
शरण्या को लेकर अनन्या का व्यवहार ललित को बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं होता था लेकिन वह चाह कर भी उसे कुछ कह नहीं पाता था क्योंकि उसे पता था इस सब का खुन्नस वह शरण्या पर ही निकालेगी। अनन्या गुस्से में पैर पटकते हुए किचन में चली गई और शरण्या के लिए कॉफी बनाने लगी। इधर शरण्या विहान को खिच कर अपने साथ कमरे मे ले गयी। घर मे नौकरों की फ़ौज होने के बाद भी किचन का काम करना अनन्या नही छोड़ती थी। सुबह का नाश्ता या रात का खाना उसके जिम्मे ही होता था। अनन्या ने कॉफी बनाई और एक नौकर के हाथों शरण्या के कमरे मे भिजवा दिया।
"तु इतनी सुबह यहाँ क्या कर रहा है? फुर्सत मिल गयी तुझे उस निठल्ले से? शरण्या चढ़ते हुए बोली तो बिहान बोला, "मैं तो बस यहां घूमते फिरते आ गया था लेकिन तेरा मुझे समझ नहीं आ रहा! तु मुझे सुबह रेडियो स्टेशन के बाहर मिली थी और यहां आ कर देखता हूं तो पता चलता है कि तू अभी अभी सोकर उठी है! सच-सच बता, क्या चक्कर चल रहा है यह सब तेरा? कहीं तु कुछ ऐसा वैसा तो नहीं कर रही ना? वैसे ही आजकल ड्रग्स के चक्कर में कई सारी लड़कियां पकड़ी गई है, कहीं तू भी उसी सब मैं शामिल तो नहीं है??? ना ना ना! मेरी बहना मैं तुझे इन सब चक्कर में पड़ने नहीं दूंगा। मैं अभी जाकर अंकल को बताता हूं, वह तेरा काउंसलिंग करवाएंगे तुझे इस सबसे बाहर लेकर आएंगे। मैं अपनी बहन को इस तरह मुसीबत में नहीं देख सकता। मैं अभी जा रहा हूं अंकल के पास।"
विहान कमरे से जाने को उठा तभी शरण्या उसका कॉलर पकड़ते हुए खींचकर उसे कमरे के अंदर धकेल दिया और बोली, "अपना दिमाग ज्यादा चलाने की जरूरत नहीं है! तेरे दोस्त की तरह नहीं हूं मैं, जो कल रेव पार्टी में था। वह तो रेहान की वजह से उसकी खबर मीडिया में लिक नहीं हुई वरना उसके तो वारे न्यारे हो चुके होते अब तक। पता नहीं अंकल आंटी कैसे झेलते हैं उसे और बेचारा रेहान!!!!! लगता है जैसे अपने उस निठल्ले भाई के फैलाए हुए रायते को समेटने के लिए पैदा हुआ है। तभी तो दोनों जुड़वा है! किसी को तो बैलेंस करना पड़ेगा ना!"
शरण्या के बैलेंस करने वाली बात सुनकर विहान बोल पड़ा, "यह तो तू बिल्कुल रूद्र की जबान बोल रही है! वह भी ऐसा ही कुछ बोलता है, किसी को तो बैलेंस करना पड़ेगा एंड ऑल! कहीं तुझ पर उसका असर तो नहीं हो रहा और तूने अभी तक नहीं बताया कि तू आ कहां से रहि थी? और गई कहां थी तू इतनी सुबह?"
एक तो ना तुम मेरे सामने उस कमिने का नाम मत लिया कर मैं बता दे रही हूं, और मुझ पर उसका असर हो उससे पहले मैं खुदकुशी कर लूं! और रही बात मेरे आने जाने की तो मेरी मर्जी, मैं तुझे बताऊं क्या ना बताऊं क्या उखाड़ लेगा तू?" शरण्या अकड़ कर बोली। विहान बोला, "मत बता! मैं जाकर सीधे आंटी को बता दूंगा कि तू सुबह-सुबह रेडियो स्टेशन के आसपास मंडराती है! फिर तो आंटी ही देखेंगी तुझे!" कहकर विहान नीचे चला गया और शरण्या चाह कर भी उसे रोक नहीं पाई। अब क्या करेगी शरण्या? और क्या करेगा विहान? क्या वह सच में शरण्या के बारे में अनन्या को बता देगा?