मेरा Hero (भाग-13) श्रुति का शौर्य को इग्नोर करना Priya Maurya द्वारा फिक्शन कहानी में हिंदी पीडीएफ

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मेरा Hero (भाग-13) श्रुति का शौर्य को इग्नोर करना

बाहर फ़ील्ड मे सभी लोग थे। तभी शौर्य भी आ पहुचता वो श्रुति के बगल मे आकर खड़ा हो जाता है। लेकिन श्रुति उसकी तरफ देख भी नही रही थी। तभी तेजस जी भी आते है और सबको लाईन मे खड़े होने को बोलते है। सभी लाईन मे खड़े हो जाते है।

तेजस-" सो एवरीवन पहले सभी वार्मअप के लिये रनिंग करेंगे फिर हम ट्रेनिंग का फ़र्स्ट क्लास स्टार्ट करेंगे। सभी पूरे फ़ील्ड का चक्कर लगा रहे थे। एक के बाद कम से कम 15 से 20 राउंड तक श्रुति और अंजलि की हालत खराब हो जाती है।

लेकिन अविका तो अलग ही फुर्ती के साथ रनिंग कर रही थी और शौर्य रोहित का क्या ही पूछना। वार्मअप के बाद सभी तेजस जी के सामने आकर हाँफते हुये खड़े हो जाते है। तेजस जी फिर उन्हे हाई जंप , सॉर्ट जंप , रोपिन्ग और भी छोटी-छोटी चीजों से शुरुआत करते है।

लगभग 6 घण्टे के बाद सबकी पहले दिन की ट्रेनिंग खत्म होती है। आज श्रुति और अंजलि इतनी थकी थी मानो दिन भर खेत मे काम किया हो। सभी वापस कैम्प बिल्डिंग के अंदर आते है। तेजस सबको वहा काम करने वालो से कह कर सबको पानी देते है।

शौर्य अपना पसीना पोछते हुये पानी पी रहा था तभी उसका ध्यान श्रुति की तरफ जाता है जो उसे ही घूर रही थी। लेकिन जैसे ही शौर्य उसके तरफ देखता है वो अपना चेहरा नीचे कर पानी पीने लगती है।

रोहित तेजस जी से-" मामा जी हम कहा रुकेंगे मतलब हमे कमरा तो मिलेगा ना यहा।" तेजस जी हसते हुये-" क्यू नही लेकिन तुम सबको ऐडजस्ट करना पड़ेगा तीन कमरे में।" अंजली-" कोई बात नही हम कर लेंगे।" तेजस-" तो आप लोग अपना समान रख लिजिये।"

रोहित और शौर्य एक कमरे मे चले जाते हैं। " तभी अविका अंजलि के कान मे धीरे से कुछ बोलती है। अन्जली श्रुति से-" श्रुति मुझे ना अविका के साथ रहना है वैसे भी तुम तो रोज ही रह्ती हो मेरे साथ।" श्रुति-" लेकिन तुम्हे तो पता है मुझे अकेले मे अन्धेरा से डर लगता है।" अंजलि-" प्लीज ना ।" श्रुति सोचती है की आज अंजलि सोना चाहती है अविका के साथ तो ठीक ही है फिर बोलती है-" ठीक है।"

इतना कह वो अपना समान ले दुसरे रुम मे चली जाती है ।इधर अंजलि और अविका हसते हुये हाय फाय देती है और तीसरे रुम मे चली जाती है। फिर सब खाना खाने आते है।

आज चेजिंग रुम के बाद से श्रुति शौर्य को इग्नोर कर रही थी। शौर्य इससे परेशान हो रहा था की श्रुति उसको एक बार देख भी नही रही है। खाने के बाद सभी आपने रुम मे आते है। शौर्य अपने रुम के अंदर आ बेड पर सोते हुये दोनो हाथो को सिर के पीछे कर ऊपर छत को देखने लगता है।

रोहित उसे ऐसे देख पूछता है-" क्या हुआ शौर्य।'" शौर्य-" कुछ नही।" रोहित-" अब बता भी।" शौर्य-" यार श्रुति मुझे सुबह से इग्नोर मार रही है।" रोहित हसते हुये -" तो यह बात है हमारी होने वाली भाभी जी शौर्य जी को इग्नोर मार रही है।' शौर्य -" चुप कर बता ना क्या करू।"
रोहित की टीचर की तरह -" तू उससे बात कर ।"
शौर्य-" लेकिन अब तक वो सो ग्यी होगी बहुत थकी थी और अगर सोयी नही होगी तो अन्जली भी साथ मे होगी उसके।"
रोहित हसते हुये-" वैसे तुम्हारे दोस्त है हम सब तो इतना कर ही सकते है ना।"
शौर्य-" क्या।"
रोहित -" हमने मिल कर पहले ही श्रुति को अकेले ही कमरे मे कर दिया है।"

शौर्य यह सुन मुस्कुरा देता है ।और कमरे के बाहर निकल जाता है।

इधर श्रुति अपने कमरे के बाथरूम से सवार ले कर निकलती है। सफेद टॉप नीचे काला प्लजो ऊपर से गीले बाल जो की कमर तक थे।
वो सीसे के सामने खड़ी होती है तो खुद के ही गोरे चेहरे और काली आँखो मे खो जाती है फिर ना जाने उसके दिमाग मे क्या आता है वो अपने बाग से काजल निकाल लगा लेती है फिर उसका ध्यान होठो पर जाता है।

वो दुबारा बैग से एक लाईट रेड लिपस्टिक निकाल के लगा लेती है। खुद की खुबसूरती को देख मन मे सोचती है-" काश शौर्य मुझे ऐसे देख ले ।"
फिर मुसकुराते हुये गोल गोल घुमने लगती है। उसे खुद नही पता की वो क्या कर रही थी।
तभी वो वापस से बैग से एक रोमांटिक नॉवेल निकाल बैड पर सो कर पढ़ने लगती है। उसे पढते हुये ना जाने क्यू मेल लीड मे शौर्य की और फीमेल लीड मे खुद की झलक दिख रही थी।

वो बेड से उतर कर नॉवेल को उठा के ऊपर उछाल रही थी फिर पकड ले कर रही थी और उसका ध्यान तो शौर्य की तरफ था तभी नॉवेल जा के दरवाजे के ऊपर लगे पर्दे और कुछ लोहे के बने चीजो मे जा फसती है वो जब देखती है की नॉवेल तो ऊपर फस गयी तब उसे ध्यान आता है की वो क्या कर रही थी। वो एक कुर्सी उठा कर बन्द दरवाजे के पीछे रखती है फिर उसपर चड कर नॉवेल उतरने की कोशिश करने लगती है लेकिन उसकी हाइट के हिसाब से नॉवेल थोडा ऊपर थी और वो उसे ले नही पा रही थी।

तभी दुसरी तरफ से शौर्य दरवाजा जैसे ही खोलता है श्रुति का बैलेंस बिगड़ जाता है वो सिधे कुर्सी से नीचे गिरने वाली थी की शौर्य उसे अपने बांहो मे पकड लेता है। श्रुति डर से आंख बन्द कर लेती है।

शौर्य उसे पहली बार काजल और लिप्स्टिक लगाए देख रहा था। उसकी नजरे तो उसके चेहरे से हट ही नही रही थी। उसके चेहरे मे अलग ही आकर्षण था और उसकी गीली जुल्फे जो उसके चेहरे पर आ रही थी वो उसके कशिश मे चार चांद लगा रही थी।

शौर्य उसके बालों को हटा कर उसके कान के पीछे करने लगता है। जैसे ही उसकी उंगलियों को श्रुति अपने कानो के पीछे महसूस करती है वो जल्दी से उससे अलग हो कर खड़ी हो जाती है।
फिर दुसरे तरफ चेहरा कर खड़ी हो जाती है। शौर्य भी खुद को सम्हालते हुये सोचता है-" अगर यह ऐसे तैयार होने लगी तो मै बिना बॉर्डर पर गये ही कभी शहीद ना हो जाऊ।"
फिर मुस्कुराकर दरवाजे को बन्द कर लॉक लगा देता है। श्रुति जब दरवाजा बन्द होने की अवाज सुनती है तो शौर्य की तरफ मुड़ के पूछती है -"तुमने दरवाजा क्यू बन्द कीया।" शौर्य-" पहले तुम बताओ की तुम यहा दरवाजे के पास क्या कर रही थी।"

श्रुति ऊपर नॉवेल की तरफ देखते हुये-" वो नॉवेल उतार रही थी।"
शौर्य-" तो मै उतार देता हूं वैसे कौन सी नॉवेल है।"
लेकिन अब श्रुति को अपनी गलती का अह्सास होता है वो उसके सामने खड़ी हो जाती और बोलती है-" नही कोई जरुरत नही है मै उतार दूंगी ना।'
वो बार बार उसे ना उतारने को बोलने लगती है। शौर्य को अब सक हो रहा था। वो जबरदस्ती ऊपर से नॉवेल उतार कर खोल के देखने वाला था की श्रुति नॉवेल छोड भागने लगती है। शौर्य को भी मन कर रहा था देखने का की आखिर उस नॉवेल मे है क्या जो उसे श्रुति इतना छिपा रही है।

शौर्य एकदम से उसके सामने आ जाता है और नॉवेल छोड़ने लगता है लेकिन श्रुति भी देने को तैयार नही थी तभी दोनो का पैर एक दुसरे मे फस जाता है और श्रुति जाकर बैड पर गिरती है और साथ ही शौर्य उसके ऊपर ।

श्रुति उसकी आँखो मे गुम हो रही थी की शौर्य उस नॉवेल को ले कर जल्दी से खड़ा हो जाता है। और जैसे खोल कर पहली लाईन पढता है वो जल्दी से नॉवेल बन्द कर देता है उसके एक प्रेमी का उसके प्रेमिका को किस करने का वर्णन था।

वो श्रुति की ओर देखता है तो श्रुति इधर उधर आँखे करके उससे अपनी नजरे छिपा रही थी। शौर्य-" यह लो अपनी बुक।" श्रुति भी ले लेती है फिर-" तुम्हे कोई काम था क्या जो इस समय आये यहा पर।"
शौर्य-" नही लेकिन तुम बताओ मुझे इग्नोर क्यू कर रही हो।"
श्रुति मन मे -" अब क्या बताये अगर इग्नोर नही करते तो आज खुद को कंट्रोल नही कर पाते ।"
फिर बोलती है-" नही तो ऐसा नही है।" शौर्य-" अच्छा।" श्रुति-" अब जाओ ।"

शौर्य भी अब कुछ नही कर सकता था इसलिये जाने लगता है। लेकिन जैसे ही वो दरवाजे के पास पहुचता है तभी रुम की लाईट चली जाती है। श्रुति जल्दी से उठ अपना फ़ोन की फ्लैसलाईट खोलना चाहती थी की उसका हाथ दीवाल पर पड जाता है और उसके हाथ से एक छिपकली की पूँछ छू जाती है।

इतना था की वो जोर से चिल्ला कर बैड पर बैठ जाती है। तभी शौर्य दौड़ कर आता है-" श्रुति क्या हुआ।" श्रुति सुबकते हुये -" किसी छिपकली के ऊपर मेरा हाथ पड़ गया।" शौर्य को बहुत हसी आ रही थी लेकिन वो उसे बैड पर बैठता है फिर बगल मे उसके बैठ जाता है। श्रुति अपना सिर उसके गोद मे रख कर लेट जाती है।
श्रुति-" शौर्य जब तक रुम की लाईट ना आ जाये प्लीज तुम मत जाना। मुझे अंधेरे से बहुत डर लगता है।" शौर्य प्यार से -" ठीक है।"

शौर्य फिर उसके बालो मे उंगलिया फिराने लगता है और धीरे धीरे श्रुति भी नींद के अगोश मे चली जाती है। शौर्य जब देखता है की श्रुति सो चुकी है वो धीरे से उसके कान मे बोलता है-"आई लव यू माय डीयर होने वाली वाईफी ." इतना कह वो मुस्कुराकर उसके सिर पर किस करके खड़ा होता है।

और अंजलि को मैसेज करता है लाईट को ऑन कर दो बाहर बोर्ड से। अंजलि-" हंसने वाली एमोजी सेंड कर के ओके बोलती हैं। लाईट आने के बाद शौर्य अपने कमरे मे चला जाता है।




क्रमश: