शेनेल लौट आएगी - 2 Pradeep Shrivastava द्वारा फिक्शन कहानी में हिंदी पीडीएफ

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शेनेल लौट आएगी - 2

शेनेल लौट आएगी

प्रदीप श्रीवास्तव

भाग 2

ऐसे ही एक बार नार्थ इंडिया के एक शहर में ड्यूटी खत्म करके रुका। हालात ऐसे बने कि दो दिन रुकना पड़ा। वहीं एक कर्मचारी के साथ शाम को घूमने निकल गया। मस्त-मौला, खाने-पीने वाला वह आदमी बड़ा दिलचस्प इंसान था। बातचीत में इतनी जल्दी घुल-मिल गया कि मेरी जुबान पर निसंकोच यह बात भी आ गई कि फिलहाल मैं सिंगिल हूं। इसके पहले कई महिलाएं जीवन में आईं लेकिन सेटिल होकर रहना पसंद नहीं इस लिए ऐसे ही चल रहा है जीवन।

ऐसा पहली बार हुआ है कि दो-तीन साल से जीवन में कोई महिला नहीं है। और शिरीन के साथ बात कुछ अलग तरह से आगे बढ़ चुकी थी इसलिए उससे अलग होना खला था। अब यह खलना मुझे अकेलेपन का कुछ ज़्यादा ही अहसास करा रहे हैं। इस पर उसने कहा ‘आज आप का अकेलापन दूर कर दूंगा।’ फिर करीब एक घंटे के बाद वह बेहद चंचल सी लड़की रात भर के लिए मेरे रूम में लेकर आया। उसका परिचय कराते हुए बोला ‘सर ये आज आपको कंपनी देंगी। इनकी फ्रेंड मेरे साथ है। सर ये जितनी खूबसूरत हैं, इनका साथ भी उतना ही ज़्यादा खूबसूरत होता है। मैं इतना जरूर कहूंगा कि इनकी कंपनी आप बार-बार पाना चाहेंगे।’

ऐमिलियो वाकई उसकी कंपनी इतनी शानदार थी कि मेरा सालों का अकेलापन छूमंतर हो गया। अगले दिन उस आदमी ने जो कहा उससे मैं सन्न रह गया। उसने बताया कि कई ऐसे गॉर्ड हैं जो अपने डिब्बे में ऐसी लड़कियों की कंपनी अपनी ड्यूटी यानी आठ-दस घंटे के दौरान भी लेते हैं। बस गाड़ी रुकने पर या स्टेशन पर इन्हें ज़्यादा बाहर नहीं करें। यदि होम स्टेशन पर रुक रहे हैं तो चाहें तो घर पर या फिर किसी सुरक्षित जगह ठहरा दें। अगली ड्यूटी जब शुरू करें तो फिर पूरे टाइम कंपनी लें।

इस काम की जानकारी तो मुझे थी। लेकिन ऐसे आसानी से होता है यह नहीं जानता था। मैं थोड़ा हिचकिचाया। कहीं चेक हो गया तो लेने के देने पड़ जाएंगे। उसने मेरी बात को हवा में उड़ाते हुए कहा कि ‘कैसी बात करते हैं। स्टाफ के चलते कुछ खास होता-वोता नहीं। जहां रोका जाए बोल दीजिए बस पिछले स्टेशन पर ट्रेन के चलते ही अचानक ही चढ़ आयी थी, टेªन स्पीड ले चुकी थी और इसकी खराब हालत के कारण हमने मदद कर दी।

अगले स्टेशन पर उतरने को कह रही है। लेकिन अब मैं इसे यहीं उतार दे रहा हूं। इनको क्या कहना है इसे यह अच्छी तरह जानती हैं। यह इस मामले में परफेक्ट हैं। यह पिछले हफ्ते ही एक गॉर्ड को कंपनी दे चुकी हैं।’ उसके बगल में ही खड़ी उस लड़की पर मैंने एक नज़र डाली, वह हल्की मुस्कान लिए खड़ी थी। उतना मासूम चेहरा कभी-कभी ही देखने को मिलता है।

मैं आश्चर्य में था कि यह वही मासूम है जो रात भर मंझी खिलाड़ी की तरह मेरे साथ ऐसे खेली कि जैसे मैं ना जाने कितने बरसों से उसका साथी खिलाड़ी हूं। रात याद आते ही मेरा डर,संकोच वगैरह रफू-चक्कर हो गए। उस आदमी ने उस लड़की को मेरे डिब्बे में ट्रेन चलने से पहले पहुंचा दिया। उसके साथ एक छोटा स्ट्रॉली बैग भी था। ऐमिलियो यहां गर्मी के दिनों में सुपर फास्ट एक्सप्रेस ट्रेंस भी घंटों लेट हो जाती हैं।

गुड्स ट्रेंस का तो कोई पुरुषाहाल ही नहीं होता। उस दिन मेरी ट्रेन के साथ यही हो गया। मुझे जिस स्टेशन पर ड्यूटी दूसरे गॉर्ड को हैंड ओवर करनी थी वहां पहुंचते -पहुंचते बारह घंटे से ऊपर हो गए। वहां सबसे नजर बचा कर पार्टनर को उतार तो लिया। लेकिन मन में यह घबराहट होने लगी कि इसे कहां ठहराऊं? ऐमिलियो मैं एक बात स्पष्ट रूप से बता दूं कि महिलाओं की सुरक्षा को लेकर मैं कभी निश्चिंत नहीं रहा।

मैंने उससे पूछा तुम इस शहर में पहले कभी आई हो तो उसने बड़ी संजीदगी से कहा मैं पहले कभी यहां नहीं आई। दरअसल मैं भी उस शहर रांची से ज़्यादा परिचित नहीं था। सोचा यहां के किसी होटल वगैरह में रुका तो एक तो पैसा बहुत खर्च होगा। दूसरे होटल वाले संदेह की दृष्टि से देखेंगे कि अपने से आधी उम्र की लड़की लेकर आया है। स्टाफ के एक आदमी से मदद मांगी। उसने जो समाधान निकाला वह मेरे लिए शानदार था। होटल का सारा खर्चा बच गया। असुरक्षा नाम की कोई चीज नहीं रही। उसने अपने ही एक दोस्त के घर इंतजाम करा दिया। एक दिन एक रात हम वहां रुके। लेकिन अगली ड्यूटी मुझे एक दूसरे ही रूट की मिल गई।

मैं परेशान हो गया कि अब मैं इसे कहां लिए-लिए घूमूं। इसके पैसे भी बढ़ते जा रहे हैं। मैंने उससे दबे मन से कहा कि दूसरी टेªन से बर्थ रिजर्व करा दूं वह चली जाए। लेकिन उसने ना-नूकुर की। हार कर साथ लिया। लेकिन एक के बाद एक मेरी ड्यूटी ऐसी लगती गई कि उसके शहर का नंबर ही नहीं आया। अंततः एक परिचित टीटी के साथ उसे उसके शहर भेज दिया। उसका जितना पैसा बना वह मैंने उसके एकाउंट में ट्रांसफर कर दिया। वह सारा कैश साथ लेकर नहीं जाना चाह रही थी। कुल मिलाकर चार-पांच दिन का उसका साथ बहुत अच्छा रहा।

कुछ इतना अच्छा ऐमिलियो कि मैं जब भी उसके शहर पहुंचता तो उसे जरूर बुलाता। उसका साथ मुझे इसलिए ज़्यादा अच्छा लग रहा था क्यों कि वह जितने समय तक रहती उतने समय तक एक पल को भी उसके किसी भी काम में कोई प्रोफेशनलिज्म नहीं दिखता था। यह उसके जबरदस्त प्रोफेशनल होने का ही परिणाम था। बेहद अंतरंग क्षणों के समय भी वह ऐसे मिक्सअप होती कि मानों वह लाइफ पार्टनर हो। उसके काम में सेक्स वर्कर होने की छाया भी नहीं होती थी। उसका साथ, उसकी सेवाएं मैं काफी समय तक लेता रहा। एक बार ऐसा हुआ कि ना चाहते हुए भी उसे छोड़ना पड़ा।

असल में हुआ यह कि एक बार ऐसे ड्राइवरों से पाला पड़ गया जो ब्लैकमेल करने लगे। एक जगह वह दोनों भी हाथ साफ करने पर उतारू हो गए। मैंने विरोध किया तो बात बिगड़़ गई। मेरे विरोध के चलते वे मेरी पार्टनर को छू तो नहीं पाए लेकिन अगले स्टेशन पर पहुंचने से पहले उन्होंने खुराफात कर दी। परिणामस्वरूप मैं पकड़ लिया गया। मगर पार्टनर की चाल ने ड्राइवरों की हवा निकाल दी। उसने हमारे सीनियर से पूरे जोर से चिल्ला कर कहा ‘‘ठीक है आपको लगता है कि गलत है तो आप को जो ठीक लगे वह करें। लेकिन इन दोनों ने मेरे साथ रेप करने की कोशिश की। मैं गॉर्ड साहब के कारण ही बच पाई। मुझे थाने में रिपोर्ट लिखाने का मौका दिया जाए।’’

इस बात पर वह इतना ज़्यादा ज़ोर देने लगी, इस तरह अड़ गई, चिल्लाने लगी कि दोनों ड्राइवरों की हालत खराब हो गई। रिपोर्ट लिखाने का मतलब था कि दोनों ड्राइवर अरेस्ट होते। पार्टनर की इस चाल ने उसे और मुझे दोनों को बचा लिया। मगर इसके बाद हमने पार्टनर की सेवा लेना बंद कर दिया। क्योंकि मुझे हर हाल में नौकरी करनी ही है।

इसके बाद अब मुझे ऐसा कुछ करना होता है तो अपने घर पर ही छु्ट्टियों में ही पार्टनर अरेंज करता हूं। ऐमिलियो मुझे लगता है कि मुझे जितनी बातें तुम्हें बतानी चाहिए वह मैंने बता दीं। बल्कि मैं यह कहूंगा कि जो नहीं बतानी चाहिए वह भी बता दीं। अब बात आती है कि तुम्हारे आने के लिए मैं टिकट अरेंज करूं। रास्ते के लिए जो पैसे चाहिए वह तुम अरेंज कर लोगी। तो ठीक है इतना करने के लिये मैं तैयार हूं। तुम वहां के किसी अथॉराइज ट्रैवेल एजेंसी की डिटेल भेजो।

ऐमिलियो पर विश्वास बढ़ने के बाद मैंने पहली बार किसी को इतनी लंबी मेल भेजी। असल में स्टूडेंट लाइफ खत्म होने के बाद यह पहला अवसर था जब मैंने एक बार में इतना कुछ लिखा। इसके बाद ऐसी लंबी मेल का सिलसिला शुरू हो गया। इस तरह महीनों मेल के जरिए मैंने ऐमिलियो से बातचीत की। हम दोनों ने एक दूसरे का विश्वास जीता। फिर मैंने उसके लिए यहीं से टिकट अरेंज किया। इस दौरान भी मेरे पास बहुत सी फ्रॉड लड़कियों की मेल आती रहीं और मैं सबको रिस्पॉंन्स देता रहा। और घर को ऐमिलियो के आने के उपलक्ष्य में ठीक-ठाक कराया। सब कुछ जितना हो सकता था उतना बेहतर किया।

मगर मन के एक कोने में यह डर बराबर बना रहता कि कहीं यह सब बेकार ना हो जाए। आखिर ऐमिलियो भी तो उन्हीं फ्रॉड लड़कियों की गैंग की है। और देखा जाए तो मैं वास्तव में उसकी ठगी का शिकार ही हो रहा हूं। जानते हुए भी वो बराबर जो कह रही है वह कर रहा हूं। वह मुझसे पैसे न ऐंठ पाई तो क्या। मेरे ही पैसे पर दो महीना इंडिया घूमेगी। मेरे ही घर में रहेगी। मुफ्त में मेरे जैसा गाइड होगा जो इस सारे समय उसके साथ लिवइन पार्टनर की तरह रहेगा। कुल मिलाकर चित भी उसकी,पट भी उसकी, अंटा उसके बाप का होगा। इंडिया में वह मेरी होकर रहेगी, लाइफ पार्टनर बनेगी ,यह सब भी दूर की कौड़ी ही लग रहा है।

इन सारी बातों पर मैं खुद को यह समझा कर तसल्ली देता कि जिंदगी में बहुत से अनुभव लिए। अब विदेश गए बगैर एक विदेशी युवती का अनुभव घर पर ही लूंगा। विदेश यदि दो महिनों के लिए जाऊं तो भी खर्च कम नहीं होगा। पराए देश में किसी युवती का इस तरह पार्टनर के रूप में मिलने का तो प्रश्न ही नहीं है। वहां की सेक्स वर्कर को कितना साथ ले पाऊंगा? पकड़े जाने का डर अलग रहेगा। दूसरे देश में कौन मेरी हेल्प करेगा?

देश में तो मेरा कोई मददगार है नहीं, वहां कौन होगा? यह उधेड़बुन उस वक्त और ज़्यादा थी जब मैं दिल्ली इंदिरा गांधी एयरपोर्ट पर ऐमिलियो को लेने गया। मन में बराबर यह डर बना रहा कि पता नहीं आएगी कि नहीं। कहीं धोखा ना दे दे। मेरे टिकट पर आकर कहीं किसी और के साथ न घूमें। यहां कहीं मुझे पहचाने ही ना। कहीं कोई गफ़लत न हो इसलिए मैंने उसकी मेल की गई फोटो में से एक का ब्रोमाइड प्रिंट साथ ले लिया था। वह अमेरिकी एयरवेज की बोइंग 741 की फ्लाइट से आ रही थी। कुछ समय के इंतजार के बाद ही बोइंग रनवे पर लैंड करता है, मेरी धड़कनें बढत़ी जा रही थीं। जहाज के रुकने पर दरवाजा खुलता है, पैसेंजर उतरना शुरू करते हैं।

मैं उनमें ऐमिलियो को पहचानने की कोशिश करता हूं। करीब दर्जन भर पैसेंजर्स के उतरने के बाद एक लड़की ऐमिलियो से मिलती-जुलती कद काठी की उतरती नजर आती है। मेरी धड़कनें सातवें आसमान पर पहुंच रही थीं। मेरी नजरें उस पर गड़ गईं थीं। जैसे-जैसे करीब आती गई उसका चेहरा साफ होता गया। वह फेडेड हल्के नीले रंग की जींस और स्लीवलेस टी शर्ट में थी। क्लीयरेंस के बाद वह जब आई तो मैं उसके नाम की तख्ती लिए उसके पास पहुंचा।

पहचान पूरी तरह पुख्ता कर लेने के लिए मैं जिस नाम से उसे मेल में संबोधित करता था उसी नाम से उसे पुकारा ‘मिस ऐमिलियो फ्रॉम सेनेगल’ वह ‘तुरंत ही बोलती है ‘यस एंड यू..।’ वह मेरे नाम का प्रोनेंसेसन सही नहीं कर पाई थी। हम दोनों को एक दूसरे को पहचानने में देर नहीं लगी। गर्मजोशी से हम दोनों ने हाथ मिलाया। फिर हाल-चाल पूछते-पूछते उसने अचानक ही बांहों में भर लिया तो मैंने भी उसे कस लिया। कुछ पल के बाद वह अलग होती हुई बोली ‘मैं आ गई’।

मैंने उससे कहा ‘ऐमिलियो तुम मेरी खुशी का अंदाजा नहीं लगा सकती।’ मैंने देखा कि वह हंस तो रही है लेकिन उसकी आंखें भरी हैं। उसके साथ दो सूटकेस थे। एक का हैंडिल उसने और एक का मैंने पकड़ा और उसे खींचते हुए बाहर आए। मैं एक टैक्सी लेकर गया था। बाहर आने तक उसने मेरा हाथ पकड़े रखा। मैंने भी। बेहद नर्म थे उसके हाथ।

मैं भीतर-भीतर रोमांचित हुआ जा रहा था। टैक्सी में भी वह मुझ से सट कर बैठी। बार-बार मेरे हाथों को अपने हाथों में ले-ले रही थी। रास्ते भर वह इधर-उधर देखती रही और पूछती रही कई चीजों के बारे में। लंबी जर्नी की थकान उसके चेहरे पर नजर आ रही थी। रास्ते में उसने यह भी बताया कि बीच-बीच में तो कई बार ऐसा लगा कि जर्नी कैंसिल करनी पड़ेगी। लेकिन मेरी बातों से इतना इंप्रेस थी कि हार नहीं मानी और आ गई मेरे पास।

मेल में उसकी बातों से मेरा अनुमान था कि वह बेहद बातूनी होगी लेकिन इसके विपरीत रास्ते भर उसने इतनी बात नहीं की कि उसे बातूनी कहता। मैंने रास्ते में कहीं गाड़ी नहीं रुकवाई। उसके स्वागत के लिए मैंने पहले ही सारी तैयारी कर रखी थी। घर पहुंच कर टैक्सी वाले को मैंने बिदा किया। गेट का ताला खोल रहा था कि तभी उसने एक नजर घर पर डालते हुए कहा ‘नाइस हाऊस रोहिट।’ मैंने उसे धन्यवाद कहा और पूरे आदर के साथ अंदर ले आया। कहा ‘आओ-आओ ऐमिलियो स्वागत है तुम्हारा मेरे इस घर में। इस घर में आने वाली तुम पहली नॉन इंडियन मेहमान हो।’

उसने थैंक्यू बोलते हुए फिर मुझे गले से लगा लिया। काफी देर तक मुझे बाहों में समेटे रही। फिर अलग हुई और कहा ‘रोहिट(वह मेरे रोहित नाम का उच्चारण रोहिट ही करती थी।) मेरे लिए यह अविश्वसनीय क्षण हैं।’ मैंने कहा ‘मेरे लिए भी, हम दोनों के लिए।’ उसे सोफे पर बैठा कर मैं किचेन में गया। मिठाई और ठंडा पानी लेकर आया। उसके लिए मैंने स्पेशल मिठाईयां लाकर रखी थीं। उसे मिठाई बहुत पसंद आई। हम दोनों दस मिनट तक आमने-सामने बैठे बातें करते रहे।

वह अपने रास्ते भर का अनुभव बताती रही। उसने बताया यह उसकी दूसरी हवाई जहाज यात्रा थी। रास्ते में एक पैसेंजर ने एयर होस्टेज से बदतमीजी की। मना करने पर मार-पीट पर उतारू हो गया। तो उसे एक जगह लैंड करने पर उतार कर पुलिस के हवाले कर दिया गया।

ऐमिलियो की बातचीत से लगा कि मैंने मेल के जरिए इसे जितना जाना-समझा था यह उससे कहीं ज़्यादा पढ़ी-लिखी, समझदार सुलझी हुई है। और उम्मीदों से कहीं ज़्यादा फ्रैंक, बेबाक और बोल्ड तो गजब की है। हज़ारों किलोमीटर दूर वह एक तरह से बिल्कुल अनजान आदमी के घर मेरे पास आई थी। लेकिन भीतर-भीतर सहम मैं रहा था। और वह ऐसे विहैव कर रही थी कि मानो वह अपने घर में मेरा स्वागत कर रही है।

उसने ड्रॉइंगरूम की तारीफ की तो मैंने उसे पूरा घर दिखाया। वापस बैठा तो उसने घर और मेरी पसंद दोनों की तारीफ की। और साथ ही शॉवर लेने की बात कही जिससे थकान दूर हो। इसके पहले बाथरूम की तारीफ करना भी वह न भूली थी। अति उत्साह में मैंने उसे बाथरूम भी दिखा दिया था। बाथिंग टब और बड़ा होना चाहिए उसने यह भी बेहिचक कह दिया था। मैंने एक अच्छे मेजबान की तरह उसके लिए बाथरूम में तौलिया रख दिया। बाकी चीजें वहां थी हीं। जाते वक्त उसने जींस टी-शर्ट उतार कर वहीं रखे सूटकेस पर ही रखे और बाथरूम में चली गई।

नहा कर तौलिया लपेटे आई और सोफे पर बैठ गई। वह तौलिया उतना बड़ा नहीं था कि एक सवा पांच फीट लंबी भरे-पूरे जिस्म की लड़की को ठीक से ढंक पाती। लेकिन फिर भी बहुत कुछ ढके हुए थी। फिर बातचीत का दौर शुरू हुआ तो उसकी इच्छानुसार मैं एक वर्ल्ड वाइड फेमस कंपनी के चिकेन लाली पॉप और दो केन चिल्ड बीयर फ्रिज से ले आया। बीयर के साथ चिकेन का मजा लेते हुए ही एक चक्कर शहर का लगा लेने का प्लान फाइनल हो गया। घूमने की बात शुरू होने पर मेरे दिमाग में यह बात आई कि कुछ देर पहले तक तो यह थकान की बात कर रही थी। मगर इससे से ज़्यादा मैं यह सोच रहा था कि यह तौलिए से निकल कर कपड़े पहन लेती तो अच्छा था। मैं बड़ा ऑड फील कर रहा था।

इस बीच मैं जान-बूझकर ऐसे एंगिल पर बैठा कि बार-बार पहलू बदलते उसके शरीर पर मेरी नजर उलझे नहीं। और वह मुझे बदतमीज ना समझ ले। उसकी हंसी मुझे बड़ी मोहक लग रही थी। वह खुल कर खिलखिलाकर हंसती थी। जब काफी टाइम होने पर भी उसने चलने की बात ना उठाई तो मैंने उसे याद दिलाया कि ‘घूमने को लेकर क्या इरादा है?’ तो उसने कहा कि ‘अभी बड़ी थकान महसूस हो रही है। सोच रही हूं थोड़ा आराम कर लूं तब चलूं।’

मैंने कहा ठीक है ऐसा ही करते हैं। मन ही मन सोचा चलो इसी बहाने कपड़े तो पहन लेगी। लेकिन नहीं वह वैसे ही बेडरूम में जाकर लेट गई। मैंने एसी ऑन कर दिया था। मैं ड्रॉइंगरूम में बैठा टीवी देखता रहा। और डरता रहा कि कोई बखेड़ा ना खड़ा कर देे। दुनिया भर में यौन उत्पीड़न के तमाम केस और वसूली के लिए तमाम फर्जी मामलों को सुन-सुन कर मैं पहले ही बहुत सतर्क था।

घर का कोना-कोना मैंने सी-सी टीवी कैमरे की रेंज में कर रखा था। डर यह था कि यदि कल को इसने कुछ ऐसा-वैसा किया तो इसके जरिए मेरे पास अकाट्य प्रमाण तो होंगे। टीवी देखते-देखते मेरे दिमाग में आया कि आखिर मुझे क्या हो गया है कि मैं इस ऐमिलियो के पीछे इतना पगलाया हुआ हूं। इसके लिए इतनी दिवानगी क्यों है?

सच तो यही है कि यह दिवानगी कोई भावनात्मक लगाव के चलते नहीं है। यहां तो भावनात्मक लगाव का कोई नाम ही नहीं है। यह दिवानगी तो सिर्फ़ इसके शरीर को लेकर है कि यह एक विदेशी है। बड़े आश्चर्यजनक ढंग से देखते-देखते घर आ पहुंची है। और वह भी तो मुफ्त में भारत घूमने के उद्देश्य से आई है।

साथ में घूमने के लिए कोई चाहिए तो मैं मिल गया। रहने के लिए मेरा घर । और उद्देश्य तो अभी भी पता नहीं है। पता नहीं घूमने आई है या लूटने के दूसरे किसी अजीबोगरीब प्लान के साथ आई है। अभी कुछ दिन पहले ही तो मीडिया में आया था कि दो नाइजीरियन ने यहां एक लड़की से लाखों रुपए ठग लिए। और पैसा मांगा तो लड़की ने पुलिस की मदद ली और दोनों पकड़े गए।

ऐमिलियो कहीं उनसे आगे की चीज ना हो, कि सीधे घर में रहकर ही लूटे। मेरी बेचैनी बढ़ी तो मैंने थोड़ी देर में एक कैन बियर और पी ली। मैंने एक घंटा ऐसे ही बिता दिया। ऐमिलियो के बेडरूम में जाते ही मैंने वहां का कैमरा ऑफ कर दिया था। मुझे कैमरा ऑन रखना उसके प्राइवेट टाइम में छिपकर तांक-झांक करने जैसा निहायत गंदा काम लगा था। करीब दो घंटा बीता तो मुझे लगा देखना चाहिए कि सो रही कि जाग रही है। घूमने चलना है कि नहीं चलना है। जैसा हो वैसा बताए तो उसके हिसाब से खाने-पीने का इंतजाम करूं।

मैं उठा कि दरवाजा नॉक करूं लेकिन फिर आकर बैठ गया। सोचा कि ये पता नहीं क्या सोच ले? अंदर से दरवाजा तो बंद नहीं किया है। फिर मैंने कैमरे की मदद ली। ऑन कर देखा तो मैं बड़े आश्चर्य में पड़ गया। वह बेड पर एकदम निश्चिंत बेधड़क सो रही थी। ऐसे जैसे अपने घर में हो। निश्चिंत इतनी कि तौलिया कहीं था और वह कहीं और। कुछ क्षण उसे ऐसी हालत में देखने से मैं अपने को रोक न सका। लेकिन अपनी गलती का एहसास होते ही कैमरा ऑफ कर दिया। फिर सोफे पर बैठ गया। उसके बारे में सोचते-सोचते मुझे भी नींद आ गई। मैं सोफे पर ही सो गया। अजीब तमाशा हो रहा था।

मेज़बान, मेहमान दोनों सो रहे थे। कहां तो घूमने-फिरने का प्रोग्राम जोर-शोर से बन रहा था। सही ही कहा गया है कि बगल में कोई सो रहा हो तो नींद जागने वाले को भी आ ही जाती है। और मैं जगा तब जब ‘रोहिट’ आवाज़़ कानों में पड़ी। और साथ ही एक नर्म सा स्पर्श कंधों पर पड़ा। आंखें खोली तो सामने ऐमिलियो खड़ी थी। उसे देखते ही मैं सीधा बैठ गया। और पूछा ‘अरे तुम कब उठीं?’ वह बोली ‘अभी। बाहर आकर देखा तो यहां तुम भी सो रहे थे। मैं कितनी देर तक सोती रही क्या मुझे बताओगे?’

मैंने घड़ी की तरफ देखा। रात के दस बजने वाले थे। मैंने उससे कहा ‘तुम करीब चार घंटे सोती रहीं। और मैं भी दो घंटे सो चुका हूं। इंडियन टाइम के हिसाब से इस समय रात के दस बजे चुके हैं।’ वह बोली ‘ओह! तो अब क्या करना चाहिए?’ मैंने कहा ‘डिनर का टाइम हो रहा है। चलते हैं बाहर किसी रेस्त्रां में डिनर करते हैं। और थोड़ा घूमते भी हैं।’ उसने कहा ठीक है। चलने से पहले उसने मेरा लैपटॉप यूज किया। अपनी मदर, फादर और एक फ्रेंड को मेल किया कि वह इंडिया अपने फ्रेंड रोहिट के पास पहुंच गई है। यहां रात के दस बज चुके हैं। मेरे साथ एक सेल्फी लेकर वह भी मेल कर दी।

उसे यह सब करते देखकर मैंने मन में कहा यह बंदी वाकई बड़ी स्मार्ट है। और हिम्मती तो इतनी है कि कुछ कहा ही नहीं जा सकता। कितनी खूबसूरती से मेरे ही घर में बैठकर, मेरे ही लैपटॉप से अपने लोगों को डिटेल्स भेज कर मुझ पर एक दबाव बना दिया है। घर का पूरा एड्रेस तक मुझ से पूछ कर लिखा कि यहां रुकी हूं। मैं उसके साथ से रोमांचित भी हो रहा था और अंदर ही अंदर तमाम सारी आशंकाओं से भयभीत भी हो रहा था। लेकिन वह एकदम निश्चिंत मस्त दिख रही थी। कम से कम ऊपर से तो ऐसा ही दिख रहा था। अंदर-अंदर वह भी मेरी तरह संशयग्रस्त थी या नहीं यह मैं समझ नहीं पाया।

जब उसके साथ डिनर और थोड़ा बहुत घूम-फिर कर लौटा तो रात बारह बज गए थे। मगर क्योंकि हम दोनों पहले ही सो चुके थे इसलिए आंखों में नींद नहीं थी। आते वक्त सिगरेट और वोदका की एक बोतल मैं उसी के कहने पर ले आया था। मेरे लिए यह कोई नई बात नहीं थी। पहले भी कई पार्टनर मेरे साथ पी चुकी थीं। लेकिन ये पार्टनर सबसे अलग थी। इसलिए मेरी मनःस्थिति भी एकदम अलग थी। मैं यह सोचकर भी परेशान हो रहा था कि यह कहीं ज़्यादा पी कर हंगामा ना करे। वैसे बाहर बेहद शालीनता से पेश आई थी। रेस्त्रां हो या फिर अन्य कोई जगह जहां-जहां गई वहां पूरे शलीके से रही।

आने के बाद ड्रॉइंग रूम में ही बैठा। वहीं उसके कहने पर एक-एक पैग वोदका ली। और सिगरेट भी पी। मेरे डर के विपरीत उसने एक पैग से ज़्यादा लेने से मना कर दिया। तभी एक अंग्रेजी चैनल पर एक पुरानी अंग्रेजी मूवी ‘वाइल्ड ऑर्किड’ शुरू हुई। उसे देखते ही उसने कहा ‘ओह माई फेवरेट मूवी। रोहिट इसे मेरे साथ देखना चाहोगे? बहुत खूबसूरत फ़िल्म है।’ मैंने कहा ‘बिल्कुल देखुंगा। मुझे खुशी होगी।’ इसके अलावा मैं कुछ कह भी तो नहीं सकता था।

इसके पहले कि मैं कुछ कहूं उसने आगे के लिए एक भारतीय बीवी की तरह हुकुम जारी कर दिया कि कपड़े चेंज करते हैं, बेडरूम में टीवी है ही, वहीं आराम से देखते हैं। मैं सोच रहा था कि अलग-अलग कमरे में सोएंगे। लेकिन उसने साफ कहा ‘रोहिट हम यहां तुम्हारे पास आए हैं। तुम्हारे साथ रहने। अलग रहने नहीं।’ फिर उसने इमोशनल कर देने वाली कई बातें कह दीं। मैं निरुत्तर था। उसकी बातचीत, अंदाज से मुझे लगा कि मैं इसे जितना समझता हूं यह उससे हर बार कहीं आगे निकलती है।

मूवी शुरू हो चुकी थी। वह बेड पर मुझसे सटी बैठी देख रही थी। कभी सिर कंधे पर रख देती, कभी हाथ। उसकी स्लीपिंग ड्रेस भी मेरे हिसाब से कुछ अजीब थी। एक छोटी सी स्लीवलेस बनियान, और बेहद छोटी नेकर। और मेरा बरमुडा उसके सामने पूरा पजामा नजर आ रहा था। और टी-शर्ट कुर्ता। उसकी खुली भरी हुई टांगें, ब्रेस्ट मेरी अजीब सी स्थिति किए हुए थीं।

जो फ़िल्म चल रही थी वह लेट नाइट की टू एक्स मूवी थी। एक से एक हॉट सीन मन का कमांकला किए जा रहे थे। और वह ध्यान से देख रही थी। बीच-बीच में कुछ बोलती जाती। कभी इधर पहलू बदलती कभी उधर। दो बजे मूवी खत्म होते-होते मुझे नींद आने लगी थी। उसकी आंखें भी मुझे बोझिल लग रही थीं। मूवी खत्म होने के बाद वह वॉशरूम होकर आई। फिर मैं भी हो आया।

आया तो देखा वह फ्रिज से बोतल निकाल कर मुंह ऊपर किए गटागट पानी पिए जा रही थी। मैंने भी पानी पिया। तभी उसने ओढ़ने के लिए चादर मांगी तो मैंने यूं ही कह दिया कि ‘कुलिंग ज़्यादा हो तो कम कर दूं।’ उसने कहा नहीं ‘कूलिंग ठीक है। एक्चुअली मेरी आदत है चादर ओढ़ कर सोने की। सोते समय मैं कोई कपड़े नहीं पहनती।’ मेरे लिए उसकी यह दूसरी बात किसी धमाके से कम नहीं थी। देखते-देखते उसने दोनों कपड़े उतारे, उन्हें साइड टेबिल पर डाला और बेड के दूसरी तरफ पड़ी चादर गले तक खींच कर तकिए के सहारे अधलेटी हो बोली ‘तुम कपड़े पहन कर सोते हो क्या?’

मैंने कहा ‘हां।’ तो वह बोली ‘चेंज कर दो यह आदत। कम से कम सोते समय तो हमें शरीर को कुछ घंटों के लिए एकदम आज़़ाद कर देना चाहिए। आज की मेडिकल साइंस भी कहती है निर्वस्त्र होकर सोने से ब्लड सर्कुलेशन अच्छा रहता है। सेहत अच्छी रहती है।’ फिर उसने किसी साइंटिस्ट की एक रिसर्च रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा ‘चलो रोहिट आज से शुरू कर दो।’

कहां तो मैं उसके साथ एक बेड पर सोने से ही हिचक रहा था और कहां वह साथ सोने ही नहीं, निर्वस्त्र होकर सोने के लिए प्रेशर डाल रही थी। प्रेशर इतना था कि मैं भी कपड़े उतार कर लेटा। एक ही चादर में। तब जो रोमांच, जो एक्साइटमेंट मैंने महसूस किया वह पहले कभी नहीं किया था। एक अजीब अनुभव। अकल्पनीय, अवर्णनीय स्थिति से गुजर रहा था मैं। मन की गहराई में एक बात और चल रही थी। कि इतनी हॉट मूवी देखी है इसने। अंतरंग क्षणों के कितने सीन देखे हैं। यह एक्साइटमेंट से भरी है।

अभी सोने से पहले यह अपना एक्साइटमेंट भी मेरे साथ ज़़रूर खत्म करेगी। शायद इसीलिए बहाना बनाया कि कपड़े उतार कर सोते हैं। मैं पहल करूं इसके लिए इसकी यह एक चाल भी हो सकती है। मगर ऐमिलियो को लेकर मेरा हर असेसमेंट गलत हो रहा था। चादर में मेरे घुसते ही उसने करवट ली और मुझे बांहों में भर लिया। चिपक गई मुझसे। फिर ‘गुडनाइट रोहिट’ कह कर शांत लेटी रही। मैं भी लेटा रहा। कुछ मिनट भी ना बीते होंगे कि वह गहरी नींद में सो गई। उसकी पकड़ एकदम ढीली पड़ गई।

वह एकदम निश्चिंत सो रही थी। कुछ देर बाद मैंने उसे अपने से अलग किया। बहुत ही धीरे से। जिससे उसकी नींद ना खुले। मैं अपने शरीर में बढ़ते तनाव से परेशान हो रहा था। थोड़ी ही देर में मैं चार बार उस चादर में अंदर लेटा और बाहर आया। मैं ऐमिलियो को छूना नहीं चाह रहा था। मैं कोई पहल नहीं करना चाह रहा था। नींद से आंखें कडु़वा रही थीं। आखिर मैं एक बार फिर वॉशरूम हो आया। एक और चादर भी ले आया। फिर अपना बरमुडा पहन कर ऐमिलियो की बगल में अलग चादर ओढ़ कर सो गया।

जिससे अपने तनाव पर कुछ काबू पा सकूं। ऐमिलियो की चादर भी खींच कर उसे गले तक ढक दिया था। वॉशरूम से जब लौटा था तो उसकी चादर कमर तक हटी हुई थी। मैं बहुत बाद तक भी यह नहीं समझ पाया कि उस वक्त मैं तनाव पर नियंत्रण कैसे कर पाया? शायद कोई डर था जो मुझे रोके रहा। या मेरी प्रौढ़ता ने मुझे उतावलेपन पर कंट्रोल करने की क्षमता दे दी थी। लेटते ही मैं भी जल्दी ही सो गया।

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