इस अध्याय में सोफ़िया की भावनाओं और उसके मनोदशा का वर्णन किया गया है। सोफ़िया एक ऐसी स्थिति में है जहाँ छोटी-छोटी चीजें उसे बहुत प्रभावित करती हैं। इंदु का बिना कुछ कहे चले जाना उसे बहुत दुखी करता है, और वह सोचती है कि उसने ऐसा क्या किया है कि उसे इस तरह का तिरस्कार सहना पड़ा। वह अपनी हीनता और उसकी वजह से इंदु के व्यवहार को लेकर चिंतित है। जाह्नवी, जो सोफ़िया की माँ हैं, लौटकर आती हैं और सोफ़िया से क्षमा मांगती हैं कि उन्होंने इंदु को रोक लिया। जाह्नवी का मानना है कि सोफ़िया की सरलता अनमोल है और वह इंदु के कठिन जीवन की चर्चा करती हैं, जिसमें इंदु को राजा साहब के कठोर नियमों का सामना करना पड़ता है। जाह्नवी यह भी बताती हैं कि इंदु पर परिवार का भारी बोझ है, लेकिन वह अपनी दयालुता से सभी का दिल जीत लेती है। इस प्रकार, यह अध्याय सोफ़िया के मन की जटिलताओं और परिवार के दबावों को उजागर करता है। रंगभूमि अध्याय 9 Munshi Premchand द्वारा हिंदी फिक्शन कहानी 4.3k 4.1k Downloads 12.4k Views Writen by Munshi Premchand Category फिक्शन कहानी पढ़ें पूरी कहानी मोबाईल पर डाऊनलोड करें विवरण ‘रंगभूमि’ उपन्यास का केन्द्र बिन्दु है - दैन्य और दारिद्र्य में ग्राम समाज का जीवन ‘रंगभूमि’ का नायक सूरदास जनहित के लिए होम होने की विचित्र क्षमता रखता है। रंगभूमि के कथानक में अनेक रंग-बिरंगे धागे लिपटे हुए हैं। उपन्यास का केन्द्र बिन्दु है - दैन्य और दारिद्र्य में ग्राम समाज का जीवन और साथ ही, एक ग्राम सेवक का ईसाई परिवार है, जो गांव के चारगाह पर सिगरेट का कारखाना लगाने के लिए अधीर है। अनेक धनी व्यक्ति हैं, जिनके बीच अगणित अन्तर्विरोध हैं - लोभ, ख्याति की लालसा और महत्त्वाकांक्षाएं। महाराजा हैं, उनके अत्पीड़न के लिए रजवाड़े हैं। उपन्यास का घटनाचक्र प्रबल वेग में घूमता है। कथा में वेग और नाटकीयता दोनों ही हैं। Novels रंगभूमि ‘रंगभूमि’ उपन्यास का केन्द्र बिन्दु है - दैन्य और दारिद्र्य में ग्राम समाज का जीवन ‘रंगभूमि’ का नायक सूरदास जनहित के लिए होम होने की विचित्र क्षम... More Likes This नागमणी की श्रापित नागरानी - 1 द्वारा Piyu soul अनात्मज - बांग्ला एकांकी नाटक - भाग 1 द्वारा Mallika Mukherjee चलो दूर कहीं..! - 1 द्वारा Arun Gupta ज़ेरॉक्स: विनाश की घड़ी - 2 द्वारा Md Siddiqui शून्यप्रस्थ: एक अंतहीन महागाथा - 1 द्वारा Nitu अलिफ लैला - 13 द्वारा Rajveer Kotadiya । रावण । शहद की गुड़िया - रंजन कुमार देसाई ( 1) द्वारा Ramesh Desai अन्य रसप्रद विकल्प हिंदी लघुकथा हिंदी आध्यात्मिक कथा हिंदी फिक्शन कहानी हिंदी प्रेरक कथा हिंदी क्लासिक कहानियां हिंदी बाल कथाएँ हिंदी हास्य कथाएं हिंदी पत्रिका हिंदी कविता हिंदी यात्रा विशेष हिंदी महिला विशेष हिंदी नाटक हिंदी प्रेम कथाएँ हिंदी जासूसी कहानी हिंदी सामाजिक कहानियां हिंदी रोमांचक कहानियाँ हिंदी मानवीय विज्ञान हिंदी मनोविज्ञान हिंदी स्वास्थ्य हिंदी जीवनी हिंदी पकाने की विधि हिंदी पत्र हिंदी डरावनी कहानी हिंदी फिल्म समीक्षा हिंदी पौराणिक कथा हिंदी पुस्तक समीक्षाएं हिंदी थ्रिलर हिंदी कल्पित-विज्ञान हिंदी व्यापार हिंदी खेल हिंदी जानवरों हिंदी ज्योतिष शास्त्र हिंदी विज्ञान हिंदी कुछ भी हिंदी क्राइम कहानी