कहानी "मंगल सूत्र" के इस भाग में मि. सिन्हा का परिचय दिया गया है, जो एक प्रभावशाली वकील हैं। लोग उनका सम्मान करते हैं, लेकिन उनके पीछे आलोचना करते हैं। सिन्हा की विशेषता यह है कि वे मुकदमों में अपनी कल्पनाशीलता का प्रयोग करते हैं और जटिल मामलों को सरलता से सुलझाते हैं। उनकी दोस्ती सन्तकुमार से है, और वे मिलकर एक मुकदमा दायर करने की योजना बना रहे हैं। सिन्हा आश्वस्त करते हैं कि उन्हें डरने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि उनके पास कई उदाहरण हैं जो उनके पक्ष में हैं। सन्तकुमार की चिंता है कि उन्हें गादर को मनाना होगा, जिसके लिए सिन्हा सुझाव देते हैं कि यदि जरूरत पड़े तो गादर को नुकसान पहुंचाया जा सकता है। सिन्हा का मानना है कि लेखक अक्सर पागल होते हैं और वे केवल प्रशंसा के लिए लेखन करते हैं। वे सन्तकुमार को सलाह देते हैं कि वे एक विशेष व्यक्ति पर ध्यान केंद्रित करें, जिससे उनकी स्थिति मजबूत हो सकती है। इस प्रकार, कहानी में सिन्हा की चालाकी और उनके वकील के पेशे की गहराई को दर्शाया गया है। मंगल सूत्र - 2 Munshi Premchand द्वारा हिंदी फिक्शन कहानी 13.4k 8.8k Downloads 22k Views Writen by Munshi Premchand Category फिक्शन कहानी पढ़ें पूरी कहानी मोबाईल पर डाऊनलोड करें विवरण प्रेमचंद द्वारा लिखित मंगलसूत्र उपन्यास उनका अपूर्ण उपन्यास है। 1936 ई. में अपने अंतिम दिनों में प्रेमचंद मंगलसूत्र उपन्यास लिख रहे थे किंतु वे उसे पूर्ण न सके। इस उपन्यास का अंतिम रूप क्या होता, यह तो कहना कठिन है तो भी ऐसी प्रतीत होता है कि वे इसकी रचना आत्मकथात्मक रूप में करना चाहते थे। मंगलसूत्र में एक साहित्यिक के जीवन की समस्या गयी है। इसी दृष्टि से यह उपन्यास प्रेमचंद्र के अन्य उपन्यासों से भिन्न है। इसके चार अध्यायों में देव साहित्य-साधना में अपना जीवन व्यतीत करते हैं। उन्हें कुछ व्यसन भी लगे हुए हैं। इन दोनों कारणों से उनका भौतिक जीवन तो सुखी नहीं होता। हाँ, उन्हें ख्याति अवश्य प्राप्त होती है। उनके दो पुत्र, वकील संतकुमार और मधुकुमार हैं। ज्येष्ठ पुत्र संतकुमार जीवन में सुख और ऐश्रर्य चाहता है और पिता की जीवनदर्शन का समर्थन नहीं करता। छोटा पुत्र उनके विचारों और आर्दशों से सहमत है। वह भी पिता की भाँति आदर्शवादी है। प्रेमचंद्र ने देवकुमार को जीवन के संघर्षों के फलस्वरूप स्वनिर्धारित आदर्श से विचलित होता हुआ सा चित्रित किया है। भविष्य में क्या होता, इसका अनुमान मात्र प्रेमचंद्र की पिछली कृतियों के आधार पर किया जा सकता है। देवकुमार की एक पुत्री पंकजा भी है, जिसका विवाह हो जाता है। Novels मंगलसूत्र प्रेमचंद द्वारा लिखित मंगलसूत्र उपन्यास उनका अपूर्ण उपन्यास है। 1936 ई. में अपने अंतिम दिनों में प्रेमचंद मंगलसूत्र उपन्यास लिख रहे थे किंतु वे उस... More Likes This The Dark Safehouse - 1 द्वारा Sipra Mohanty The Mind Reader's Secret - 1 द्वारा Neha Banchhor BLAST - EPISODE 2 द्वारा Muhib Khan Just A Power System - 1 द्वारा Sam khan BLACK MONKEY - THE UNYIELDING - 1 द्वारा MK Tiger SHADOW KING - 1 द्वारा chetan chaware पिंकू की परी - 2 द्वारा Deepak Kumar Tiwari अन्य रसप्रद विकल्प हिंदी लघुकथा हिंदी आध्यात्मिक कथा हिंदी फिक्शन कहानी हिंदी प्रेरक कथा हिंदी क्लासिक कहानियां हिंदी बाल कथाएँ हिंदी हास्य कथाएं हिंदी पत्रिका हिंदी कविता हिंदी यात्रा विशेष हिंदी महिला विशेष हिंदी नाटक हिंदी प्रेम कथाएँ हिंदी जासूसी कहानी हिंदी सामाजिक कहानियां हिंदी रोमांचक कहानियाँ हिंदी मानवीय विज्ञान हिंदी मनोविज्ञान हिंदी स्वास्थ्य हिंदी जीवनी हिंदी पकाने की विधि हिंदी पत्र हिंदी डरावनी कहानी हिंदी फिल्म समीक्षा हिंदी पौराणिक कथा हिंदी पुस्तक समीक्षाएं हिंदी थ्रिलर हिंदी कल्पित-विज्ञान हिंदी व्यापार हिंदी खेल हिंदी जानवरों हिंदी ज्योतिष शास्त्र हिंदी विज्ञान हिंदी कुछ भी हिंदी क्राइम कहानी