"उपनिषदों की कथाएँ" पुस्तक में नचिकेता की कथा का वर्णन किया गया है। नचिकेता, जो महर्षि उद्दालक के पुत्र हैं, एक संवेदनशील और विचारशील बालक हैं। उनकी कहानी की शुरुआत उनके पिता, बाजश्रवा, के द्वारा किए गए 'विश्वजित' यज्ञ से होती है, जिसमें उन्हें अपना सर्वस्व दान करना होता है। जब यज्ञ के दौरान गायों को दक्षिणा में देने के लिए लाया जाता है, तो नचिकेता उन गायों की दयनीय स्थिति देखकर चिंतित हो जाते हैं। वह सोचते हैं कि इन दुर्बल और बीमार गायों का दान देना उचित नहीं है, क्योंकि इससे न तो दानकर्ता को सुख मिलेगा और न ही दान प्राप्त करने वालों को। नचिकेता का यह विचार है कि दान केवल उसी वस्तु का करना चाहिए जो उपयोगी और सुखदायक हो। इस प्रकार, नचिकेता अपने पिता के दान की पद्धति पर सवाल उठाते हैं और समझते हैं कि असली दान वही है जो दूसरों को लाभ और सुख पहुँचाए। उनकी यह विचारधारा इस कथा का केंद्रीय विषय है, जो दान और नैतिकता के महत्व पर प्रकाश डालती है। भाग-२ उपनिषद की कथाएँ MB (Official) द्वारा हिंदी लघुकथा 7.2k 2.3k Downloads 4.6k Views Writen by MB (Official) Category लघुकथा पढ़ें पूरी कहानी मोबाईल पर डाऊनलोड करें विवरण Part-2 Upnishad Ki Kathaein More Likes This प्रतिघात: दिल्ली की वो शाम - 2 द्वारा Abantika हिकमत और कमाई द्वारा Devendra Kumar उड़ान (1) द्वारा Asfal Ashok नौकरी द्वारा S Sinha रागिनी से राघवी (भाग 1) द्वारा Asfal Ashok अभिनेता मुन्नन द्वारा Devendra Kumar यादो की सहेलगाह - रंजन कुमार देसाई (1) द्वारा Ramesh Desai अन्य रसप्रद विकल्प हिंदी लघुकथा हिंदी आध्यात्मिक कथा हिंदी फिक्शन कहानी हिंदी प्रेरक कथा हिंदी क्लासिक कहानियां हिंदी बाल कथाएँ हिंदी हास्य कथाएं हिंदी पत्रिका हिंदी कविता हिंदी यात्रा विशेष हिंदी महिला विशेष हिंदी नाटक हिंदी प्रेम कथाएँ हिंदी जासूसी कहानी हिंदी सामाजिक कहानियां हिंदी रोमांचक कहानियाँ हिंदी मानवीय विज्ञान हिंदी मनोविज्ञान हिंदी स्वास्थ्य हिंदी जीवनी हिंदी पकाने की विधि हिंदी पत्र हिंदी डरावनी कहानी हिंदी फिल्म समीक्षा हिंदी पौराणिक कथा हिंदी पुस्तक समीक्षाएं हिंदी थ्रिलर हिंदी कल्पित-विज्ञान हिंदी व्यापार हिंदी खेल हिंदी जानवरों हिंदी ज्योतिष शास्त्र हिंदी विज्ञान हिंदी कुछ भी हिंदी क्राइम कहानी