इस कहानी में नंदिनी और दीपक के बीच की जटिल भावनाओं और रिश्तों की गहराई को दर्शाया गया है। नंदिनी, एक नई माँ, अपने पति दीपक के साथ अपनी खुशियों का जश्न मनाने की कोशिश कर रही है, जबकि दीपक की उलझनें और मानसिक दूरी उसे परेशानी में डाल रही हैं। कहानी का आरंभ नंदिनी के घर में उत्सव की तैयारियों से होता है, जहाँ रिश्तेदार और दोस्त मिलकर खुशी का माहौल बना रहे हैं। नंदिनी का दिल अपने पति दीपक की अनुपस्थिति और उसके नाम की पुकार सुनकर दुखी होता है। दीपक के आगमन पर, नंदिनी को खुशी की उम्मीद होती है, लेकिन वह महसूस करती है कि दीपक उससे दूर है और उनकी भावनाओं के बीच एक दीवार खड़ी है। नंदिनी को अपने विवाह का दिन याद आता है, लेकिन वह देखती है कि दीपक का व्यवहार अजीब और उलझन में है। सभी परिवार वाले नामकरण की तैयारी में लगे होते हैं, और नंदिनी को उम्मीद होती है कि दीपक उसके पास आएगा, लेकिन वह उम्मीद भी टूट जाती है। कहानी इस बात को उजागर करती है कि भले ही बाहरी उत्सव की रौनक हो, नंदिनी और दीपक के रिश्ते में एक गहरी दूरी बनी हुई है, जिससे नंदिनी को निराशा और अकेलेपन का अनुभव होता है। अंत में, नंदिनी अपने बच्चे के साथ दीपक के पास बैठने का प्रयास करती है, लेकिन उनके बीच की भावनात्मक दूरी बरकरार रहती है। आइना सच नही बोलता - 18 Neelima Sharma द्वारा हिंदी फिक्शन कहानी 58.2k 3.9k Downloads 15k Views Writen by Neelima Sharma Category फिक्शन कहानी पढ़ें पूरी कहानी मोबाईल पर डाऊनलोड करें विवरण नंदिनी के मायके वाले भी उसके सुख के दृश्य संजो रात को ही अपने घर लौट गये थे! शाम होते-होते घर में अब घरवाले और नंदिनी की दोनों ननदें ही बचीं थी! अचानक पापा के कमरे से जोर जोर से आवाजें आने लगीं! नंदिनी ने अनुमान लगाया कि दीपक अपने पिता से जाने की इजाज़त मांग रहा था और उसके रवैये को लेकर दोनों में बहस हो रही थी! नंदिनी से रहा न गया और उसके कदम स्वतः ही आवाज़ की दिशा में बढ़ते चले गए! “ये तो हद ही हो गई दीपक! आखिर कब तक झूठ बोल-बोलकर बहू को दिलासा दें हम! तुमने शादी को ही नहीं हमें भी मज़ाक बनाकर रख दिया है बहू और उसके घरवालों की नजरों में! तुम.....” “पापा, आप लोग सिर्फ अपने बारे में सोचते हो! किसी ने मेरे बारे में नहीं सोचा! मेरी ख़ुशी, मेरे सपने, मेरी पसंद-नापसंद, मेरे कमिटमेंट की आपकी नजरों में कोई कीमत नहीं! मैंने हमेशा कहा पर आपने माना ही कब है! क्या आप और माँ नहीं जानते थे मेरी मज़बूरी पर नहीं आपको तो केवल अपनी सोच, अपना फैसला थोपने की आदत है! आप......” Novels आइना सच नहीं बोलता “रिश्ते सीमेंट और ईंटों की मज़बूत दीवारों में क़ैद हो कर नहीं पनपते... उन्हें जीने के लिये खुली बाहों का आकाश चाहिये। क्या विवाह हो जाना ही एक स्त्री... More Likes This त्रिवेणी: एक आदर्श बहू से बेकार बहू बनने तक का सफर - 1 द्वारा Triveni chakrdhari अनाथ - अध्याय 1 द्वारा Dev Kumar Rawat गायब - एक रात की कहानी - 1 द्वारा Patel Lay Starseeds - Part 1 द्वारा vyomatara Oyy Mr. Vampire - 1 द्वारा kusum kumari बारह बरश का इंतज़ार - 2 द्वारा kusum kumari Second Chance - 1 द्वारा wang pang अन्य रसप्रद विकल्प हिंदी लघुकथा हिंदी आध्यात्मिक कथा हिंदी फिक्शन कहानी हिंदी प्रेरक कथा हिंदी क्लासिक कहानियां हिंदी बाल कथाएँ हिंदी हास्य कथाएं हिंदी पत्रिका हिंदी कविता हिंदी यात्रा विशेष हिंदी महिला विशेष हिंदी नाटक हिंदी प्रेम कथाएँ हिंदी जासूसी कहानी हिंदी सामाजिक कहानियां हिंदी रोमांचक कहानियाँ हिंदी मानवीय विज्ञान हिंदी मनोविज्ञान हिंदी स्वास्थ्य हिंदी जीवनी हिंदी पकाने की विधि हिंदी पत्र हिंदी डरावनी कहानी हिंदी फिल्म समीक्षा हिंदी पौराणिक कथा हिंदी पुस्तक समीक्षाएं हिंदी थ्रिलर हिंदी कल्पित-विज्ञान हिंदी व्यापार हिंदी खेल हिंदी जानवरों हिंदी ज्योतिष शास्त्र हिंदी विज्ञान हिंदी कुछ भी हिंदी क्राइम कहानी