कहानी "आइना सच नहीं बोलता" के भाग 16 में नंदिनी अपनी माँ की बातों से निराश होती है और अपने कमरे में सोचने लगती है। उसे लगता है कि उसकी माँ, जो हमेशा पिता के नियंत्रण में रही, अब अपने स्वतंत्र अस्तित्व की तलाश नहीं कर रही है और न ही अपनी बेटी और बहू की परेशानियों को समझने के लिए तैयार है। नंदिनी चिंतित है कि क्या उसकी माँ के दुख और दमन ने उसे तटस्थ बना दिया है। इस बीच, नंदिनी अपने गर्भ में पल रहे बच्चे के प्रति एक मीठा एहसास महसूस करती है, लेकिन साथ ही दीपक की यादों में भी खो जाती है। उसकी भाभी चाय लेकर आती हैं और दोनों अपने दर्द को छुपाते हुए चाय पीते हैं। भाभी नंदिनी को उसकी सहेली सुनीता के फोन के बारे में बताती हैं, लेकिन नंदिनी उसे मिलने से मना करती है। भाभी सलाह देती हैं कि ऐसे समय में सुनीता की परछाई भी नंदिनी पर नहीं पड़नी चाहिए। अंत में, नंदिनी अपने बच्चे की हलचल को याद करते हुए चुपचाप फोन पर बात करने का निर्णय लेती है। आइना सच नही बोलता - 16 Neelima Sharma द्वारा हिंदी फिक्शन कहानी 20.4k 3k Downloads 10.4k Views Writen by Neelima Sharma Category फिक्शन कहानी पढ़ें पूरी कहानी मोबाईल पर डाऊनलोड करें विवरण माँ की बात ने नंदिनी के हौसलों को बुझा दिया। वह अपने कमरे में आकर लेट गई और सोचने लगी पापा भाई और दीपक तो रेखा के उस ओर खड़े हैं जिनकी सोच से उसे लड़ना है उसे बदलना है लेकिन अभी तो उसे उन लोगों की सोच भी बदलना है जो उसके साथ उसके पाले में खड़े हैं। वह हैरान थी कि माँ जिसे बचपन से पिता के शासन तले घुटते देखा है वह अपने स्वतंत्र अस्तित्व का एक कोना तलाशने को भी तैयार नहीं थी। ना ही खुद की जिंदगी की परछाई तले अपनी बेटी और बहू की जिंदगी के स्याह उदास पहलू को देखना चाहती पर है ना महसूस करना। माँ ऐसा कैसे कर सकती है क्या इतने सालों के दुःख और दमन ने उसके भीतर की स्त्री और माँ को भी मार दिया है जिससे अब वह अपनी बेटी और बहू के लिए तटस्थ हो गई है यथास्थिति से समझौता कर लिया है और अब किसी तरह के मानसिक संघर्ष में ना खुद शामिल होना चाहती है और ना ही उसे और भाभी को शामिल होते देखना चाहती हैं।क्या जीवन में शांति का मतलब अपनी इच्छाओं और आकाँक्षाओं को मार देना ही है Novels आइना सच नहीं बोलता “रिश्ते सीमेंट और ईंटों की मज़बूत दीवारों में क़ैद हो कर नहीं पनपते... उन्हें जीने के लिये खुली बाहों का आकाश चाहिये। क्या विवाह हो जाना ही एक स्त्री... More Likes This उजाले की राह द्वारा Mayank Bhatnagar Operation Mirror - 3 द्वारा bhagwat singh naruka DARK RVENGE OF BODYGARD - 1 द्वारा Anipayadav वाह साहब ! - 1 द्वारा Yogesh patil मेनका - भाग 1 द्वारा Raj Phulware बेवफाई की सजा - 1 द्वारा S Sinha RAJA KI AATMA - 1 द्वारा NOMAN अन्य रसप्रद विकल्प हिंदी लघुकथा हिंदी आध्यात्मिक कथा हिंदी फिक्शन कहानी हिंदी प्रेरक कथा हिंदी क्लासिक कहानियां हिंदी बाल कथाएँ हिंदी हास्य कथाएं हिंदी पत्रिका हिंदी कविता हिंदी यात्रा विशेष हिंदी महिला विशेष हिंदी नाटक हिंदी प्रेम कथाएँ हिंदी जासूसी कहानी हिंदी सामाजिक कहानियां हिंदी रोमांचक कहानियाँ हिंदी मानवीय विज्ञान हिंदी मनोविज्ञान हिंदी स्वास्थ्य हिंदी जीवनी हिंदी पकाने की विधि हिंदी पत्र हिंदी डरावनी कहानी हिंदी फिल्म समीक्षा हिंदी पौराणिक कथा हिंदी पुस्तक समीक्षाएं हिंदी थ्रिलर हिंदी कल्पित-विज्ञान हिंदी व्यापार हिंदी खेल हिंदी जानवरों हिंदी ज्योतिष शास्त्र हिंदी विज्ञान हिंदी कुछ भी हिंदी क्राइम कहानी