"प्रतिज्ञा" के इस अध्याय में दाननाथ की मानसिक स्थिति को दर्शाया गया है। वह कमलाप्रसाद के कारण खुद को कलंकित महसूस कर रहे हैं और सोचते हैं कि क्या वे इस कलंक से मुक्त हो सकते हैं। घर पहुँचकर उनकी बहन प्रेमा उनसे पूछती है कि क्या उन्होंने कमलाप्रसाद और पूर्णा के बारे में सुना है। प्रेमा को विश्वास नहीं होता कि भैया ने ऐसा कुछ किया होगा। प्रेमा और दाननाथ के बीच बातचीत होती है, जिसमें दाननाथ की चिंताओं और प्रेमा के संदेहों का आदान-प्रदान होता है। प्रेमा को यह लगता है कि दाननाथ निर्दयी हैं जो किसी की विपत्ति पर दया नहीं करते। दाननाथ अपने दिल की बात प्रेमा को बताने का अवसर खो देते हैं। इसके बाद, दाननाथ की माता उनके ससुराल जाने के बारे में पूछती हैं और बताती हैं कि शहर में कमलाप्रसाद के बारे में नकारात्मक बातें हो रही हैं। दाननाथ की माता भी कमलाप्रसाद के चरित्र पर संदेह करती हैं, और यह चिंता व्यक्त करती हैं कि कहीं दाननाथ को भी इस विवाद में घसीटा न जाए। इस प्रकार, कहानी में सामाजिक दृष्टिकोण, पारिवारिक संबंध और व्यक्तिगत कलंक का एक जटिल ताना-बाना प्रस्तुत किया गया है। प्रतिज्ञा अध्याय 15 Munshi Premchand द्वारा हिंदी फिक्शन कहानी 4.4k 4.3k Downloads 14.4k Views Writen by Munshi Premchand Category फिक्शन कहानी पढ़ें पूरी कहानी मोबाईल पर डाऊनलोड करें विवरण प्रतिज्ञा उपन्यास विषम परिस्थितियों में घुट घुट कर जी रही भारतीय नारी की विवशताओं और नियति का सजीव चित्रण है। प्रतिज्ञा का नायक विधुर अमृतराय किसी विधवा से शादी करना चाहता है ताकि किसी नवयौवना का जीवन नष्ट न हो। ..। नायिका पूर्णा आश्रयहीन विधवा है। समाज के भूखे भेड़िये उसके संचय को तोड़ना चाहते हैं। उपन्यास में प्रेमचंद ने विधवा समस्या को नए रूप में प्रस्तुत किया है एवं विकल्प भी सुझाया है। भवन विधवाओं का आश्रम ही नहीं, उनका प्रशिक्षणाय भी है, वहं विधवाओं की बनी चीजों की बिक्री होती है और इससे उन्हें स्वावलम्बन का अनुभव भी होता है। Novels प्रतिज्ञा प्रतिज्ञा उपन्यास विषम परिस्थितियों में घुट घुट कर जी रही भारतीय नारी की विवशताओं और नियति का सजीव चित्रण है। प्रतिज्ञा का नायक विधुर अमृतराय किसी वि... More Likes This पहला प्यार ? - 2 द्वारा Alone Soul सुनहरा फलक - 1 द्वारा Digvijay Singh Rathore खलनायिका के रूप में पुनर्जन्म - 1 द्वारा Fictional world THE UNTOLD CHAPTER - 1 द्वारा Neha Banchhor कुरिवाज की केद से सपनों की उड़ान तक - 1 द्वारा miss k त्रिवेणी: एक आदर्श बहू से बेकार बहू बनने तक का सफर - 1 द्वारा Triveni chakrdhari अनाथ - अध्याय 1 द्वारा Dev Kumar Rawat अन्य रसप्रद विकल्प हिंदी लघुकथा हिंदी आध्यात्मिक कथा हिंदी फिक्शन कहानी हिंदी प्रेरक कथा हिंदी क्लासिक कहानियां हिंदी बाल कथाएँ हिंदी हास्य कथाएं हिंदी पत्रिका हिंदी कविता हिंदी यात्रा विशेष हिंदी महिला विशेष हिंदी नाटक हिंदी प्रेम कथाएँ हिंदी जासूसी कहानी हिंदी सामाजिक कहानियां हिंदी रोमांचक कहानियाँ हिंदी मानवीय विज्ञान हिंदी मनोविज्ञान हिंदी स्वास्थ्य हिंदी जीवनी हिंदी पकाने की विधि हिंदी पत्र हिंदी डरावनी कहानी हिंदी फिल्म समीक्षा हिंदी पौराणिक कथा हिंदी पुस्तक समीक्षाएं हिंदी थ्रिलर हिंदी कल्पित-विज्ञान हिंदी व्यापार हिंदी खेल हिंदी जानवरों हिंदी ज्योतिष शास्त्र हिंदी विज्ञान हिंदी कुछ भी हिंदी क्राइम कहानी