इस कहानी में पूर्णा अपनी भावनाओं और पति कमलाप्रसाद के प्रति अपनी चिंताओं को लेकर संघर्ष कर रही है। वह सोचती है कि अगर कमलाप्रसाद ने आत्म-हत्या कर ली तो उसके जीवन का क्या होगा। पूर्णा अपने पति की भक्ति और संयम के खिलाफ विभिन्न तर्क करने लगती है, यह सोचते हुए कि क्या उसके पति दूसरी शादी नहीं करेंगे। वह अपने पहले प्रेमी पंडित वसंत कुमार को भी याद करती है और महसूस करती है कि उनका साथ भी सुखद नहीं था। सुमित्रा, जो पूर्णा की मित्र है, उसे चेतावनी देती है कि वह कमलाप्रसाद के प्रभाव से दूर रहे। सुमित्रा ने पहले ही पूर्णा के यौवन और स्वभाव को लेकर आशंका जताई थी और अब वह पूर्णा को यह सलाह देती है कि कमलाप्रसाद से साफ-साफ कह दे कि वह उससे शादी कर ले। सुमित्रा का मानना है कि शादी से कुछ समय के लिए समाज में सम्मान मिलेगा, जबकि लुक-छिप कर प्रेम करना आत्मा को नष्ट कर सकता है। कहानी में पूर्णा के अंतर्द्वंद्व और सुमित्रा की सलाह के माध्यम से विवाह, प्रेम और समाज की अपेक्षाओं पर विचार किया गया है। प्रतिज्ञा अध्याय 12 Munshi Premchand द्वारा हिंदी फिक्शन कहानी 4.4k 3.7k Downloads 7.9k Views Writen by Munshi Premchand Category फिक्शन कहानी पढ़ें पूरी कहानी मोबाईल पर डाऊनलोड करें विवरण प्रतिज्ञा उपन्यास विषम परिस्थितियों में घुट घुट कर जी रही भारतीय नारी की विवशताओं और नियति का सजीव चित्रण है। प्रतिज्ञा का नायक विधुर अमृतराय किसी विधवा से शादी करना चाहता है ताकि किसी नवयौवना का जीवन नष्ट न हो। ..। नायिका पूर्णा आश्रयहीन विधवा है। समाज के भूखे भेड़िये उसके संचय को तोड़ना चाहते हैं। उपन्यास में प्रेमचंद ने विधवा समस्या को नए रूप में प्रस्तुत किया है एवं विकल्प भी सुझाया है। दाननाद भी अपने किए पर पछतात है कि कमलाप्रसाद जैसे दुषट की बातों में आकर वे अमृतराय का विरोध करते आये। वे अमृतराय से क्षमा मांगते हैं और अमृतराय तो सह्र्दय हैं, वे भी मित्रता का हाथ आगे बढ़ाते हैं। Novels प्रतिज्ञा प्रतिज्ञा उपन्यास विषम परिस्थितियों में घुट घुट कर जी रही भारतीय नारी की विवशताओं और नियति का सजीव चित्रण है। प्रतिज्ञा का नायक विधुर अमृतराय किसी वि... More Likes This पहला प्यार ? - 2 द्वारा Alone Soul सुनहरा फलक - 1 द्वारा Digvijay Singh Rathore खलनायिका के रूप में पुनर्जन्म - 1 द्वारा Fictional world THE UNTOLD CHAPTER - 1 द्वारा Neha Banchhor कुरिवाज की केद से सपनों की उड़ान तक - 1 द्वारा miss k त्रिवेणी: एक आदर्श बहू से बेकार बहू बनने तक का सफर - 1 द्वारा Triveni chakrdhari अनाथ - अध्याय 1 द्वारा Dev Kumar Rawat अन्य रसप्रद विकल्प हिंदी लघुकथा हिंदी आध्यात्मिक कथा हिंदी फिक्शन कहानी हिंदी प्रेरक कथा हिंदी क्लासिक कहानियां हिंदी बाल कथाएँ हिंदी हास्य कथाएं हिंदी पत्रिका हिंदी कविता हिंदी यात्रा विशेष हिंदी महिला विशेष हिंदी नाटक हिंदी प्रेम कथाएँ हिंदी जासूसी कहानी हिंदी सामाजिक कहानियां हिंदी रोमांचक कहानियाँ हिंदी मानवीय विज्ञान हिंदी मनोविज्ञान हिंदी स्वास्थ्य हिंदी जीवनी हिंदी पकाने की विधि हिंदी पत्र हिंदी डरावनी कहानी हिंदी फिल्म समीक्षा हिंदी पौराणिक कथा हिंदी पुस्तक समीक्षाएं हिंदी थ्रिलर हिंदी कल्पित-विज्ञान हिंदी व्यापार हिंदी खेल हिंदी जानवरों हिंदी ज्योतिष शास्त्र हिंदी विज्ञान हिंदी कुछ भी हिंदी क्राइम कहानी