यह कहानी स्वतंत्रता की स्थिति पर सवाल उठाती है। लेखक ने 70 वर्षों की आजादी के बाद भी समाज में व्याप्त जातिवाद, भ्रष्टाचार, भेदभाव, और अन्य सामाजिक बुराइयों का उल्लेख किया है। उन्होंने यह बताया कि आजादी केवल एक शब्द है, जबकि असल में समाज कई बंधनों में जकड़ा हुआ है। लेखक का मानना है कि आजादी का असली मतलब समाज का सर्वांगीण विकास होना चाहिए, जो कि भारत में अभी तक नहीं हुआ है। वे यह भी बताते हैं कि आज भी महिलाएं सुरक्षित नहीं हैं, दहेज के लिए अत्याचार होते हैं, और गरीबों का शोषण जारी है। इस सबके लिए जिम्मेदारी हम सभी पर है। लेखक ने यह भी कहा कि भले ही नेताओं की गुणवत्ता पर बहस हो, परंतु पहले हमें खुद से यह सवाल करना चाहिए कि क्या हम अच्छे नागरिक हैं। अंत में, उन्होंने यह सवाल उठाया कि क्या हम वास्तव में आजाद हैं या नहीं, और इस पर विचार करने की आवश्यकता पर बल दिया। एक सवाल - क्या हम आजाद है Niral Somaiya द्वारा हिंदी प्रेरक कथा 8.4k 4.2k Downloads 14.9k Views Writen by Niral Somaiya Category प्रेरक कथा पढ़ें पूरी कहानी मोबाईल पर डाऊनलोड करें विवरण आजादी के पर्व के दिन आजादी को लेकर एक सवाल ऊठा कि क्या हम आजाद है इसका जवाब ये विवरण पढने के बाद हमको खुद से लेना है. More Likes This असंभव को संभव बनाने वाले: गॉगिन्स की कहानी - 1 द्वारा Nimesh Gavit नम आँखे - 2 द्वारा Nandini Agarwal Apne Kalam Sein आजादी - 1 द्वारा Kuldeep singh सादगी के स्वर : लेखिका गीता कुमारी - 2 द्वारा Geeta Kumari ट्रिपलेट्स भाग 2 द्वारा Raj Phulware जहाँ से खुद को पाया - 1 द्वारा vikram kori 8:30 pm शांति एक्सप्रेस - 1 द्वारा Bhumika Gadhvi अन्य रसप्रद विकल्प हिंदी लघुकथा हिंदी आध्यात्मिक कथा हिंदी फिक्शन कहानी हिंदी प्रेरक कथा हिंदी क्लासिक कहानियां हिंदी बाल कथाएँ हिंदी हास्य कथाएं हिंदी पत्रिका हिंदी कविता हिंदी यात्रा विशेष हिंदी महिला विशेष हिंदी नाटक हिंदी प्रेम कथाएँ हिंदी जासूसी कहानी हिंदी सामाजिक कहानियां हिंदी रोमांचक कहानियाँ हिंदी मानवीय विज्ञान हिंदी मनोविज्ञान हिंदी स्वास्थ्य हिंदी जीवनी हिंदी पकाने की विधि हिंदी पत्र हिंदी डरावनी कहानी हिंदी फिल्म समीक्षा हिंदी पौराणिक कथा हिंदी पुस्तक समीक्षाएं हिंदी थ्रिलर हिंदी कल्पित-विज्ञान हिंदी व्यापार हिंदी खेल हिंदी जानवरों हिंदी ज्योतिष शास्त्र हिंदी विज्ञान हिंदी कुछ भी हिंदी क्राइम कहानी