कहानी "आरामकुर्सी" में जशवंतराय नामक एक पिता की बेचैनी को दर्शाया गया है। जशवंतराय का जीवन आरामकुर्सी में बैठकर आराम करने का होता था, लेकिन हाल के दिनों में उनकी स्थिति बदल गई है। उनकी बेटी दर्शना की उपस्थिति और एक युवा लड़के की बाइक, जो अक्सर उनकी कॉलोनी में घूमती रहती है, उनकी चिंता का कारण बन गई है। जशवंतराय इस युवक के म्युजिकल होर्न की आवाज सुनकर बेचैन हो जाते हैं। वे सोचते हैं कि यह युवक उनकी बेटी के आसपास क्यों घूमता है और इससे दर्शना पर क्या असर पड़ता है। उनके मन में पिता की भावनाएँ उमड़ती हैं, और वे उस युवक को सबक सिखाने की सोचते हैं, लेकिन उन्हें समझ में नहीं आता कि कैसे करें। कहानी में जशवंतराय की चिंताओं और उनकी बेटी के प्रति उनकी सुरक्षा की भावना को बखूबी प्रस्तुत किया गया है। यह कहानी पिता-पुत्री के रिश्ते, जिम्मेदारियों और समाज में सुरक्षा की भावना पर जोर देती है। आरामखुर्शी Ajay Oza द्वारा हिंदी लघुकथा 5.1k 1.8k Downloads 9.5k Views Writen by Ajay Oza Category लघुकथा पढ़ें पूरी कहानी मोबाईल पर डाऊनलोड करें विवरण आरामकुर्सी एक हास्यलेख बाइक का हॉर्न कैसे पुरे मोहल्ले को परेशान करता है किस तरह सब अपनी आरामकुर्सी से खड़े हो जाते है पढ़िए यह व्यंग व हास्यलेख ! More Likes This नेहरू फाइल्स - भूल-113 द्वारा Rachel Abraham प्रतिघात: दिल्ली की वो शाम - 2 द्वारा Abantika हिकमत और कमाई द्वारा Devendra Kumar उड़ान (1) द्वारा Asfal Ashok नौकरी द्वारा S Sinha रागिनी से राघवी (भाग 1) द्वारा Asfal Ashok अभिनेता मुन्नन द्वारा Devendra Kumar अन्य रसप्रद विकल्प हिंदी लघुकथा हिंदी आध्यात्मिक कथा हिंदी फिक्शन कहानी हिंदी प्रेरक कथा हिंदी क्लासिक कहानियां हिंदी बाल कथाएँ हिंदी हास्य कथाएं हिंदी पत्रिका हिंदी कविता हिंदी यात्रा विशेष हिंदी महिला विशेष हिंदी नाटक हिंदी प्रेम कथाएँ हिंदी जासूसी कहानी हिंदी सामाजिक कहानियां हिंदी रोमांचक कहानियाँ हिंदी मानवीय विज्ञान हिंदी मनोविज्ञान हिंदी स्वास्थ्य हिंदी जीवनी हिंदी पकाने की विधि हिंदी पत्र हिंदी डरावनी कहानी हिंदी फिल्म समीक्षा हिंदी पौराणिक कथा हिंदी पुस्तक समीक्षाएं हिंदी थ्रिलर हिंदी कल्पित-विज्ञान हिंदी व्यापार हिंदी खेल हिंदी जानवरों हिंदी ज्योतिष शास्त्र हिंदी विज्ञान हिंदी कुछ भी हिंदी क्राइम कहानी