"तुम सच कहती हो गौरैया" कहानी दिल्ली की एक बरसाती शाम की पृष्ठभूमि में सेट है। कहानी में एक कवि की दृष्टि से दिल्ली की शाम का वर्णन किया गया है, जो निराला की संध्या सुंदरी की तरह नहीं है। दिल्ली की शाम नीरस और शोर से भरी है, जो शहर के कंक्रीट के जंगलों में उतरती है। कवि प्रगति मैदान में एक अंतर्राष्ट्रीय मेले में भाग लेने आया है और मथुरा रोड पर खड़ा होकर अपने गाँव की यादों में खो जाता है। वह अपने गाँव में शाम के समय सूरज को पश्चिम दिशा में अपनी प्रियतमा की तरह देखता है, जो उसके गालों पर अनुराग की लालिमा बिखेरता है। कवि सूरज और पश्चिम के बीच के प्रेम को देखता है और उनकी जुदाई और मिलन की भावना को महसूस करता है। कविता में प्राकृतिक प्रेम और मानव भावनाओं का गहरा संबंध प्रस्तुत किया गया है, जो कवि के मन में अनेक भावनाएँ जागृत करता है। यह कहानी प्रेम, जुदाई, और शहर की नीरसता के बीच के संघर्ष को दर्शाती है। तुम सच कहती हो गौरैया MB (Official) द्वारा हिंदी लघुकथा 24.9k 2.1k Downloads 7.9k Views Writen by MB (Official) Category लघुकथा पढ़ें पूरी कहानी मोबाईल पर डाऊनलोड करें विवरण Tum Sach Kahti Ho Gauraiya - Abhiranjan Kumar More Likes This मंजिले - भाग 46 द्वारा Neeraj Sharma हमको ओढ़ावे चदरिया अब चलती बिरया द्वारा Devendra Kumar डायरी का वो आखरी पन्ना - 4 द्वारा Std Maurya कहानी में छुपी एक सन्देश - 1 द्वारा Std Maurya मेरे समाज में ऐसा क्यों होता हैं - भाग 1 द्वारा Std Maurya ऐसे ही क्यों होता हैं? - 1 द्वारा Std Maurya एक डिवोर्स ऐसा भी - 1 द्वारा Alka Aggarwal अन्य रसप्रद विकल्प हिंदी लघुकथा हिंदी आध्यात्मिक कथा हिंदी फिक्शन कहानी हिंदी प्रेरक कथा हिंदी क्लासिक कहानियां हिंदी बाल कथाएँ हिंदी हास्य कथाएं हिंदी पत्रिका हिंदी कविता हिंदी यात्रा विशेष हिंदी महिला विशेष हिंदी नाटक हिंदी प्रेम कथाएँ हिंदी जासूसी कहानी हिंदी सामाजिक कहानियां हिंदी रोमांचक कहानियाँ हिंदी मानवीय विज्ञान हिंदी मनोविज्ञान हिंदी स्वास्थ्य हिंदी जीवनी हिंदी पकाने की विधि हिंदी पत्र हिंदी डरावनी कहानी हिंदी फिल्म समीक्षा हिंदी पौराणिक कथा हिंदी पुस्तक समीक्षाएं हिंदी थ्रिलर हिंदी कल्पित-विज्ञान हिंदी व्यापार हिंदी खेल हिंदी जानवरों हिंदी ज्योतिष शास्त्र हिंदी विज्ञान हिंदी कुछ भी हिंदी क्राइम कहानी