यह कहानी एक गीदड़ की है जो जंगल के जानवरों द्वारा डरपोक कहे जाने से दुखी होता है। गीदड़, जंगल से भागकर एक पेड़ के नीचे रोने लगता है, तभी एक साधू महाराज उसकी मदद के लिए आते हैं। साधू उसे बताते हैं कि अगर वह वनराज (जंगल का राजा) की तपस्या करेगा, तो उसे एक वरदान मिलेगा। गीदड़ ठान लेता है कि वह अपनी किस्मत खुद बनाएगा और 'डरपोक' के नाम का कलंक मिटाएगा। वह तपस्या करने के लिए उस स्थान पर बैठ जाता है और कई दिनों तक ध्यान करता है। उसकी भक्ति देखकर वनराज बहुत प्रसन्न होते हैं और गीदड़ को वरदान मांगने के लिए कहते हैं। गीदड़ खुशी से उछल पड़ता है और सोचने लगता है कि वह क्या मांगे। कहानी गीदड़ के साहस और परिवर्तन की ओर इशारा करती है। गीदड़ Pawnesh Dixit द्वारा हिंदी लघुकथा 7.3k 5.9k Downloads 17.2k Views Writen by Pawnesh Dixit Category लघुकथा पढ़ें पूरी कहानी मोबाईल पर डाऊनलोड करें विवरण प्रस्तुत कहानी गीदड़ है - गीदड़ गीदड़ ही रहता है चाहे उसके गले में रक्षा कवच डाल दो या जादुई छड़ी पकड़ा दो कैसे एक गीदड़ दस्तक देती हुयी अपनी किस्मत से भी हार जाता है More Likes This हमको ओढ़ावे चदरिया अब चलती बिरया द्वारा Devendra Kumar डायरी का वो आखरी पन्ना - 4 द्वारा Std Maurya कहानी में छुपी एक सन्देश - 1 द्वारा Std Maurya मेरे समाज में ऐसा क्यों होता हैं - भाग 1 द्वारा Std Maurya ऐसे ही क्यों होता हैं? - 1 द्वारा Std Maurya एक डिवोर्स ऐसा भी - 1 द्वारा Alka Aggarwal पहली मुलाक़ात - 1 द्वारा puja अन्य रसप्रद विकल्प हिंदी लघुकथा हिंदी आध्यात्मिक कथा हिंदी फिक्शन कहानी हिंदी प्रेरक कथा हिंदी क्लासिक कहानियां हिंदी बाल कथाएँ हिंदी हास्य कथाएं हिंदी पत्रिका हिंदी कविता हिंदी यात्रा विशेष हिंदी महिला विशेष हिंदी नाटक हिंदी प्रेम कथाएँ हिंदी जासूसी कहानी हिंदी सामाजिक कहानियां हिंदी रोमांचक कहानियाँ हिंदी मानवीय विज्ञान हिंदी मनोविज्ञान हिंदी स्वास्थ्य हिंदी जीवनी हिंदी पकाने की विधि हिंदी पत्र हिंदी डरावनी कहानी हिंदी फिल्म समीक्षा हिंदी पौराणिक कथा हिंदी पुस्तक समीक्षाएं हिंदी थ्रिलर हिंदी कल्पित-विज्ञान हिंदी व्यापार हिंदी खेल हिंदी जानवरों हिंदी ज्योतिष शास्त्र हिंदी विज्ञान हिंदी कुछ भी हिंदी क्राइम कहानी