"पगडंडियों की आहटें" कहानी कुबेर प्रसाद के अनुभवों के माध्यम से जातीय भेदभाव और समाज में असमानता की समस्याओं को उजागर करती है। कुबेर, जो एक कमजोर और असहाय छात्र है, एक सवर्णबहुल स्कूल में शिक्षा प्राप्त कर रहा है। उसे लगातार भेदभाव का सामना करना पड़ता है, लेकिन एक शिक्षक, रितुवरन बाबू, उसकी मदद करते हैं और उसे प्रोत्साहित करते हैं। हालांकि, रितुवरन बाबू की सहायता की वजह से कुबेर को समाज में और भी अधिक तिरस्कार का सामना करना पड़ता है, जिससे उसके परिवार में तनाव उत्पन्न होता है। कुबेर के पिता, बाउजी, इस बदनामी से बचने के लिए अपने बेटे को मास्टर जी से दूर रहने की सलाह देते हैं। इस स्थिति में कुबेर खुद को अकेला और बहिष्कृत महसूस करता है, और कहानी अंत में उसे विद्रोही सोच अपनाने के लिए प्रेरित करती है। कहानी जातीय पूर्वाग्रह, शिक्षा, और समर्थन के महत्व को दर्शाती है, साथ ही सामाजिक मानदंडों के खिलाफ खड़े होने की आवश्यकता को भी इंगित करती है। पगडंडियों की आहटें Jaynandan द्वारा हिंदी लघुकथा 1.5k 2.8k Downloads 8.2k Views Writen by Jaynandan Category लघुकथा पढ़ें पूरी कहानी मोबाईल पर डाऊनलोड करें विवरण Pagdandiyo Ki Aahate - Jay Nandan More Likes This नेहरू फाइल्स - भूल-113 द्वारा Rachel Abraham प्रतिघात: दिल्ली की वो शाम - 2 द्वारा Abantika हिकमत और कमाई द्वारा Devendra Kumar उड़ान (1) द्वारा Asfal Ashok नौकरी द्वारा S Sinha रागिनी से राघवी (भाग 1) द्वारा Asfal Ashok अभिनेता मुन्नन द्वारा Devendra Kumar अन्य रसप्रद विकल्प हिंदी लघुकथा हिंदी आध्यात्मिक कथा हिंदी फिक्शन कहानी हिंदी प्रेरक कथा हिंदी क्लासिक कहानियां हिंदी बाल कथाएँ हिंदी हास्य कथाएं हिंदी पत्रिका हिंदी कविता हिंदी यात्रा विशेष हिंदी महिला विशेष हिंदी नाटक हिंदी प्रेम कथाएँ हिंदी जासूसी कहानी हिंदी सामाजिक कहानियां हिंदी रोमांचक कहानियाँ हिंदी मानवीय विज्ञान हिंदी मनोविज्ञान हिंदी स्वास्थ्य हिंदी जीवनी हिंदी पकाने की विधि हिंदी पत्र हिंदी डरावनी कहानी हिंदी फिल्म समीक्षा हिंदी पौराणिक कथा हिंदी पुस्तक समीक्षाएं हिंदी थ्रिलर हिंदी कल्पित-विज्ञान हिंदी व्यापार हिंदी खेल हिंदी जानवरों हिंदी ज्योतिष शास्त्र हिंदी विज्ञान हिंदी कुछ भी हिंदी क्राइम कहानी