कहानी "विराम-चिह्न" जयशंकर प्रसाद द्वारा लिखी गई है, जिसमें एक वृद्धा दुकानवाली की दयनीय स्थिति को दर्शाया गया है। वह देवी मंदिर के समीप एक छोटी सी दुकान चलाती है, जहां उसके पास कुछ फल और अंडे हैं। भक्त लोग मंदिर के दर्शन करने के बाद उसकी दुकान की ओर ध्यान नहीं देते, जिससे उसकी वस्तुएं बिक्री नहीं होतीं। वृद्धा भूख से परेशान है और पिछले तीन दिनों से ठीक से भोजन नहीं कर पाई है। उसकी भूख और गरीबी को दर्शाते हुए, एक मद्यप व्यक्ति राधे उसे ताना मारता है और उसकी स्थिति पर मजाक उड़ाता है। वृद्धा ने भगवान को एक केला नैवेद्य के रूप में चढ़ाने का निर्णय लिया, जिससे वह थोड़ी सांत्वना पाती है। अंततः, वह अपने छोटे से आश्रय स्थल में जाकर विश्राम करती है, जहां उसकी सीमित संपत्ति है। कहानी में वृद्धा की भक्ति और भगवान पर विश्वास का महत्वपूर्ण संदेश है, भले ही वह कभी मंदिर के भीतर नहीं जा पाई। यह कहानी मानवता, दया, और विश्वास की गहराई को उजागर करती है। विराम चिन्ह Jayshankar Prasad द्वारा हिंदी लघुकथा 11.3k 11.7k Downloads 45k Views Writen by Jayshankar Prasad Category लघुकथा पढ़ें पूरी कहानी मोबाईल पर डाऊनलोड करें विवरण विराम-चिह्न जयशंकर प्रसाद की कहानियाँ जयशंकर प्रसाद © COPYRIGHTS This book is copyrighted content of the concerned author as well as Matrubharti. Matrubharti has exclusive digital publishing rights of this book. Any illegal copies in physical or digital format are strictly prohibited. Matrubharti can challenge such illegal distribution / copies / usage in court. विराम-चिह्न देव-मन्दिर के सिंहद्वार से कुछ दूर हटकर वह छोटी-सी दुकान थी। सुपारी के घने कुंज के नीचे एक मैले कपडे के टुकडे पर सूखी हुईधार में तीन-चार केले, चार कच्चे पपीते, दो हरे नारियल और छः अण्डेथे। मन्दिर से दर्शन करके लौटते हुए भक्त लोग Novels जयशंकर प्रसाद की कहानियाँ जयशंकर प्रसाद की कहानियाँ जयशंकर प्रसाद © COPYRIGHTS This book is copyrighted content of the concerned author as well as Matrubharti. Matrubharti has... More Likes This प्रेरणास्पंदन - 2-3 द्वारा Bhupendra Kuldeep मंजिले - भाग 46 द्वारा Neeraj Sharma हमको ओढ़ावे चदरिया अब चलती बिरया द्वारा Devendra Kumar डायरी का वो आखरी पन्ना - 4 द्वारा Std Maurya कहानी में छुपी एक सन्देश - 1 द्वारा Std Maurya मेरे समाज में ऐसा क्यों होता हैं - भाग 1 द्वारा Std Maurya ऐसे ही क्यों होता हैं? - 1 द्वारा Std Maurya अन्य रसप्रद विकल्प हिंदी लघुकथा हिंदी आध्यात्मिक कथा हिंदी फिक्शन कहानी हिंदी प्रेरक कथा हिंदी क्लासिक कहानियां हिंदी बाल कथाएँ हिंदी हास्य कथाएं हिंदी पत्रिका हिंदी कविता हिंदी यात्रा विशेष हिंदी महिला विशेष हिंदी नाटक हिंदी प्रेम कथाएँ हिंदी जासूसी कहानी हिंदी सामाजिक कहानियां हिंदी रोमांचक कहानियाँ हिंदी मानवीय विज्ञान हिंदी मनोविज्ञान हिंदी स्वास्थ्य हिंदी जीवनी हिंदी पकाने की विधि हिंदी पत्र हिंदी डरावनी कहानी हिंदी फिल्म समीक्षा हिंदी पौराणिक कथा हिंदी पुस्तक समीक्षाएं हिंदी थ्रिलर हिंदी कल्पित-विज्ञान हिंदी व्यापार हिंदी खेल हिंदी जानवरों हिंदी ज्योतिष शास्त्र हिंदी विज्ञान हिंदी कुछ भी हिंदी क्राइम कहानी