कहानी में narrator अपनी बोरियत के अनुभव को साझा कर रहा है। वह बताता है कि कैसे वह बिना किसी काम के बैठकर बोर हो गया। जब उसने बोरियत का आनंद लेना चाहा, तो उसके दोस्तों ने उसे परेशान कर दिया। उन्होंने सवाल किए कि वह बोर होते हुए भी क्यों हंस रहा है और बोरियत से बचने के लिए विभिन्न सलाहें दीं। narrator को यह महसूस होता है कि लोग उसकी बोरियत को समाप्त करना चाहते हैं, जबकि वह इसे अपने जीवन का एक हिस्सा मानता है। वह अपने प्रियजनों के फोन का जवाब देते हुए उनकी समस्याओं का समाधान देने की कोशिश करता है, लेकिन अंत में उसके दोस्त भी बोरियत महसूस करने लगते हैं। कहानी का अंत शहर की ट्रैफिक स्थिति के चित्रण के साथ होता है, जहां narrator बोरियत और व्यस्तता के बीच के संबंध को दर्शाता है। वह बोरियत को एक अनिवार्य अनुभव मानता है और इसे स्वीकार करने की सलाह देता है। बोर होने भी दीजिए... Dimple Sirohi द्वारा हिंदी पत्रिका 1.4k 2.4k Downloads 9.4k Views Writen by Dimple Sirohi Category पत्रिका पढ़ें पूरी कहानी मोबाईल पर डाऊनलोड करें विवरण its all about what i feel around More Likes This Rajkumar - 2 द्वारा Ram Make Hero - 8 द्वारा Ram Make Star Sentinals - 1 द्वारा Ravi Bhanushali Vulture - 1 द्वारा Ravi Bhanushali नेहरू फाइल्स - भूल-85 द्वारा Rachel Abraham इतना तो चलता है - 3 द्वारा Komal Mehta जब पहाड़ रो पड़े - 1 द्वारा DHIRENDRA SINGH BISHT DHiR अन्य रसप्रद विकल्प हिंदी लघुकथा हिंदी आध्यात्मिक कथा हिंदी फिक्शन कहानी हिंदी प्रेरक कथा हिंदी क्लासिक कहानियां हिंदी बाल कथाएँ हिंदी हास्य कथाएं हिंदी पत्रिका हिंदी कविता हिंदी यात्रा विशेष हिंदी महिला विशेष हिंदी नाटक हिंदी प्रेम कथाएँ हिंदी जासूसी कहानी हिंदी सामाजिक कहानियां हिंदी रोमांचक कहानियाँ हिंदी मानवीय विज्ञान हिंदी मनोविज्ञान हिंदी स्वास्थ्य हिंदी जीवनी हिंदी पकाने की विधि हिंदी पत्र हिंदी डरावनी कहानी हिंदी फिल्म समीक्षा हिंदी पौराणिक कथा हिंदी पुस्तक समीक्षाएं हिंदी थ्रिलर हिंदी कल्पित-विज्ञान हिंदी व्यापार हिंदी खेल हिंदी जानवरों हिंदी ज्योतिष शास्त्र हिंदी विज्ञान हिंदी कुछ भी हिंदी क्राइम कहानी