"गुदड़ी में लाल" जयशंकर प्रसाद की कहानी एक बुढ़िया के संघर्ष और आत्माभिमान की कथा है। वह एक भले घर की बहू-बेटी थी, लेकिन जीवन की कठिनाइयों ने उसे गरीब बना दिया। बुढ़िया हमेशा अपने आत्मसम्मान के साथ जीने की कोशिश करती थी और अपने लिए काम मांगती थी, लेकिन उसकी शारीरिक स्थिति उसे काम करने में असमर्थ बनाती थी। बाबू रामनाथ, जो उसकी मदद करते थे, उसे अपनी दुकान में रख लेते हैं और उसे मासिक वेतन देते हैं। बुढ़िया की बेटी थोड़ी-बहुत कमाई करती थी, लेकिन बुढ़िया अपने आत्माभिमान के चलते अपनी बेटी की कमाई पर निर्भर नहीं होना चाहती थी। कहानी में बुढ़िया अपने दैनिक कामों में व्यस्त रहती है और कभी किसी से सहायता नहीं मांगती। वह कष्ट सहते हुए भी अपने आत्म-सम्मान को बनाए रखती है। एक दिन उसे काम करते-करते मूर्छा आ जाती है, और रामनाथ उसकी स्थिति को देखकर उसे 'पेंशन' देने का निर्णय लेते हैं, जिससे उसकी मदद हो सके। यह कहानी न केवल समाज की दयनीय स्थिति को दर्शाती है, बल्कि एक बुढ़िया के अदम्य साहस और आत्मसम्मान की भी गाथा है। Gudadi Me Lal Jayshankar Prasad द्वारा हिंदी लघुकथा 13.3k 4.2k Downloads 21.5k Views Writen by Jayshankar Prasad Category लघुकथा पढ़ें पूरी कहानी मोबाईल पर डाऊनलोड करें विवरण गुदड़ी में लाल जयशंकर प्रसाद की कहानियाँ जयशंकर प्रसाद © COPYRIGHTS This book is copyrighted content of the concerned author as well as Matrubharti. Matrubharti has exclusive digital publishing rights of this book. Any illegal copies in physical or digital format are strictly prohibited. Matrubharti can challenge such illegal distribution / copies / usage in court. गुदड़ी में लाल दीर्घ निश्वासों का क्रीड़ा-स्थल, गर्म-गर्म आँसुओं का फूटा हुआपात्र! कराल काल की सारंगी, एक बुढ़िया का जीर्ण कंकाल, जिसमेंअभिमान की लय में करुणा ही रागिनी बजा करती है। अभागिनी बुढ़िया, एक भले घर की बहू-बेटी थी। उसे देखकरदयालु वयोवृद्ध, हे भगवान्! Novels जयशंकर प्रसाद की कहानियाँ जयशंकर प्रसाद की कहानियाँ जयशंकर प्रसाद © COPYRIGHTS This book is copyrighted content of the concerned author as well as Matrubharti. Matrubharti has... More Likes This प्रतिघात: दिल्ली की वो शाम - 2 द्वारा Abantika हिकमत और कमाई द्वारा Devendra Kumar उड़ान (1) द्वारा Asfal Ashok नौकरी द्वारा S Sinha रागिनी से राघवी (भाग 1) द्वारा Asfal Ashok अभिनेता मुन्नन द्वारा Devendra Kumar यादो की सहेलगाह - रंजन कुमार देसाई (1) द्वारा Ramesh Desai अन्य रसप्रद विकल्प हिंदी लघुकथा हिंदी आध्यात्मिक कथा हिंदी फिक्शन कहानी हिंदी प्रेरक कथा हिंदी क्लासिक कहानियां हिंदी बाल कथाएँ हिंदी हास्य कथाएं हिंदी पत्रिका हिंदी कविता हिंदी यात्रा विशेष हिंदी महिला विशेष हिंदी नाटक हिंदी प्रेम कथाएँ हिंदी जासूसी कहानी हिंदी सामाजिक कहानियां हिंदी रोमांचक कहानियाँ हिंदी मानवीय विज्ञान हिंदी मनोविज्ञान हिंदी स्वास्थ्य हिंदी जीवनी हिंदी पकाने की विधि हिंदी पत्र हिंदी डरावनी कहानी हिंदी फिल्म समीक्षा हिंदी पौराणिक कथा हिंदी पुस्तक समीक्षाएं हिंदी थ्रिलर हिंदी कल्पित-विज्ञान हिंदी व्यापार हिंदी खेल हिंदी जानवरों हिंदी ज्योतिष शास्त्र हिंदी विज्ञान हिंदी कुछ भी हिंदी क्राइम कहानी