कहानी "मेहमां जो हमारा होता है" में गुप्ता जी और उनकी पत्नी की जीवन की परेशानियों का वर्णन किया गया है। पटना में रहने के दौरान, सुख, शांति और सुकून की तलाश में वे बार-बार मकान बदलते रहे, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली। उनके घर में हमेशा मेहमान आते रहते थे, जिससे उनका दाम्पत्य सुख और पारिवारिक शांति भंग हो गई। मेहमानों की उपस्थिति के कारण पति-पत्नी में झगड़े होते रहते थे और वे एक-दूसरे को इसके लिए जिम्मेदार ठहराते थे। गुप्ता जी अपनी पत्नी की परेशानियों को समझते थे, लेकिन वे मेहमानों को रोक नहीं पाते थे। मकान मालिक ने भी उन्हें चेतावनी दी कि अगर मेहमान आते रहे तो किराया बढ़ा दिया जाएगा। अंततः, गुप्ता जी ने मेहमानों से छुटकारा पाने के लिए कई उपाय किए, जैसे घर का पता छिपाना और दरवाजे पर ताले लगाना, लेकिन सब प्रयास विफल रहे। आखिरकार, उन्होंने दिल्ली में तबादला कराने का निर्णय लिया, यह सोचकर कि शायद वहां उन्हें शांति मिलेगी। Mahema jo Hamara Hota Hai Vinod Viplav द्वारा हिंदी लघुकथा 1.5k 2.1k Downloads 8.2k Views Writen by Vinod Viplav Category लघुकथा पढ़ें पूरी कहानी मोबाईल पर डाऊनलोड करें विवरण मेहमां जो हमारा होता है में महानगरों की भागती — दौड़ती और भीड़ भाड़ वाली जिंदगी के अकेलेपन को उजागर करती है। यह कहानी करीब दो दशक पूर्व लिखी गयी लेकिन आज भी प्रासंगिक है। इस कहानी से मिलती जुलती थीम को लेकर कुछ दिन पूर्व एक फिल्म बनी थी — अतिथि तुम कब जायोगे। इस कहानी के लेखक विनोद विप्लव की प्रमुख कहानियों में ‘‘अवरोध’’, ’’विभव दा की दाढ़ी’’, ’’रक्तबीज’’, ‘‘चक्रव्यूह’’ आदि प्रमुख है। विनोद विप्लव ने करीब ढाई दशक से अधिक समय से लेखन एवं पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। स्कूल के दिनों से ही कहानी लेखन में विशेष दिचलस्पी रही। देश की प्रतिष्ठित साहित्यिक पत्रिकाओं में उनकी कई कहानियां प्रकाशित हो चुकी हैं। ‘‘अवरोध’’ नामक उनकी कहानी को दिल्ली सरकार की हिन्दी अकादमी की ओर से प्रथम नवोदित लेखन पुरस्कार मिल चुका है। इसके अलावा हिन्दी अकादमी के वित्तीय सहयोग से उनका पहला कहानी संग्रह ‘‘विभव दा का अंगूठा’’ प्रकाश्तिा हुआ। पिछले कुछ वर्षों के दौरान उन्होंने मीडिया और राजनीति पर कई व्यंग्य भी लिखे जो नवभारत टाइम्स, हिन्दुस्तान और जनसत्ता जैसे अखबारों तथा मीडिया आधारित वेबसाइटों में प्रकाशित हुए हैं। मीडिया को लेकर उनके व्यंग्य काफी पसंद किये गये। इन व्यंग्यों का संग्रह ‘‘ढिबरी चैनल‘‘ तैयार किया गया है जो शीघ्र प्रकाशित होने वाला है। उन्होंने महान गायक मोहम्मद रफी की पहल जीवनी (मेरी आवाज सुनो) के अलावा अभिनय सम्राट दिलीप कुमार तथा हरफनमौला अभिनेता-निर्देशक राजकपूर एवं सदाबहार अभिनेता देव आनंद पर पुस्तकें लिखी है। इसके अलावा सिनेमा जगत की 140 हस्तियों के बारे में ’’हिन्दी सिनेमा के 150 सितारे’’ नामक पुस्तक लिखी है। More Likes This नेहरू फाइल्स - भूल-113 द्वारा Rachel Abraham प्रतिघात: दिल्ली की वो शाम - 2 द्वारा Abantika हिकमत और कमाई द्वारा Devendra Kumar उड़ान (1) द्वारा Asfal Ashok नौकरी द्वारा S Sinha रागिनी से राघवी (भाग 1) द्वारा Asfal Ashok अभिनेता मुन्नन द्वारा Devendra Kumar अन्य रसप्रद विकल्प हिंदी लघुकथा हिंदी आध्यात्मिक कथा हिंदी फिक्शन कहानी हिंदी प्रेरक कथा हिंदी क्लासिक कहानियां हिंदी बाल कथाएँ हिंदी हास्य कथाएं हिंदी पत्रिका हिंदी कविता हिंदी यात्रा विशेष हिंदी महिला विशेष हिंदी नाटक हिंदी प्रेम कथाएँ हिंदी जासूसी कहानी हिंदी सामाजिक कहानियां हिंदी रोमांचक कहानियाँ हिंदी मानवीय विज्ञान हिंदी मनोविज्ञान हिंदी स्वास्थ्य हिंदी जीवनी हिंदी पकाने की विधि हिंदी पत्र हिंदी डरावनी कहानी हिंदी फिल्म समीक्षा हिंदी पौराणिक कथा हिंदी पुस्तक समीक्षाएं हिंदी थ्रिलर हिंदी कल्पित-विज्ञान हिंदी व्यापार हिंदी खेल हिंदी जानवरों हिंदी ज्योतिष शास्त्र हिंदी विज्ञान हिंदी कुछ भी हिंदी क्राइम कहानी