It seems that there is no content provided in the story for me to summarize. Please provide the text or details of the story you would like me to summarize. Bahubali Jaynandan द्वारा हिंदी लघुकथा 51.9k 4k Downloads 13.1k Views Writen by Jaynandan Category लघुकथा पढ़ें पूरी कहानी मोबाईल पर डाऊनलोड करें विवरण प्रोफेसर अतुल ने अपने दोनों बेटे विपुल और विनय के लिए कई-कई सपने देखे थे। वे सारे व्यर्थ हो गए और उन्हें पता भी नहीं चला कि कब विपुल और बाद में उसी के नक्शेकदम पर कब विनय अपराध की दुनिया में दाखिल हो गया। जब उनकी मार्फत घर में ऐश्वर्य, विलास और नफासत की महँगी-महँगी दुर्लभ चीजें आने लगीं तब उनके कान खड़े हुए, मगर तब तक काफी देर हो चुकी थी। More Likes This जग्गू - द डिटैक्टिव - 1 द्वारा Rakesh Kumar Sharma आज्ञा द्वारा Rajeev kumar पता बताते दिन द्वारा महेश रौतेला तुम हो तो सब कुछ है - भाग 1 द्वारा Ankit Khatri मेरी जिंदगी का सफर 1 द्वारा Ankit Khatri अहमदाबाद के चर्चे द्वारा Devendra Kumar एक पुरुष—सबके बीच अकेला - 1 द्वारा Aloka Patel अन्य रसप्रद विकल्प हिंदी लघुकथा हिंदी आध्यात्मिक कथा हिंदी फिक्शन कहानी हिंदी प्रेरक कथा हिंदी क्लासिक कहानियां हिंदी बाल कथाएँ हिंदी हास्य कथाएं हिंदी पत्रिका हिंदी कविता हिंदी यात्रा विशेष हिंदी महिला विशेष हिंदी नाटक हिंदी प्रेम कथाएँ हिंदी जासूसी कहानी हिंदी सामाजिक कहानियां हिंदी रोमांचक कहानियाँ हिंदी मानवीय विज्ञान हिंदी मनोविज्ञान हिंदी स्वास्थ्य हिंदी जीवनी हिंदी पकाने की विधि हिंदी पत्र हिंदी डरावनी कहानी हिंदी फिल्म समीक्षा हिंदी पौराणिक कथा हिंदी पुस्तक समीक्षाएं हिंदी थ्रिलर हिंदी कल्पित-विज्ञान हिंदी व्यापार हिंदी खेल हिंदी जानवरों हिंदी ज्योतिष शास्त्र हिंदी विज्ञान हिंदी कुछ भी हिंदी क्राइम कहानी