**शीर्षक:** रंग बिरंगे दोहे **लेखक:** योगेश समदर्शी इस कविता संग्रह में 29 दोहे शामिल हैं, जो समाज में व्याप्त विभिन्न समस्याओं और मानवीय संबंधों पर प्रकाश डालते हैं। 1. दूसरों की गलतियों पर ध्यान देने की आदत को बुरा बताया गया है। 2. मेहनत के बिना फल की इच्छा रखना बेमानी है। 3. सच को अपमानित करते हुए झूठ को प्रतिष्ठा देना। 4. पैसे की लालसा और उससे जुड़ी बुराइयाँ। 5. रिश्ते अब व्यापार की तरह हो गए हैं। 6. महंगाई के कारण ईमान की कीमत घट गई है। 7. दूसरों को उपदेश देने वाले खुद में कितने दोष रखते हैं। 8. देश के हालात में सुधार नहीं हो रहा है, गरीब भूख से मर रहे हैं। 9. नेता कुर्सी पाकर मौज कर रहे हैं, गरीब की हालत चिंताजनक है। 10. गरीबों को रोटी नहीं मिल रही, नेताओं से सवाल। 11. गरीबी से बढ़कर कोई पीड़ा नहीं है। 12. बारिश की कमी से धरती और पौधे परेशान हैं। 13. मौसम की बर्बादी से किसान चिंतित हैं। 14. समय पर बारिश न होने से नुकसान होता है। 15. मेहनत करने वाले की खुशियाँ दूसरों के घरों में बिखरी हैं। 16. बारिश से गर्मी में राहत मिलती है। 17. सभी को धन चाहिए, लेकिन कुछ और भी चाहिए। 18. लक्ष्मी जी से गरीबों का सहारा देने की प्रार्थना। 19. धन की कामना, विशेष दिन की शुभकामनाएँ। 20. मेहनत का धन चाहिए, मुफ्त का नहीं। 21. लोगों की सोच में बदलाव आया है। 22. प्रेम के रिश्तों को मीठे शब्दों से संजोना। 23. सास-बहू के रिश्ते में प्रेम की कमी। 24. रिश्तों में प्रेम की आवश्यकता है। 25. दूसरों में गुण देखने की आदत डालें। 26. प्यार से पाले गए बच्चे अब परदेशी हो गए हैं। 27. बुजुर्गों की एकाकी जिंदगी। 28. कम आय पर भी परिवार का साथ। 29. सबको सुविधाएँ मिलें, यही कामना। ये दोहे समाज की जटिलताओं, मानवीय संबंधों और Rang Birange Dohe Yogesh Samdarshi द्वारा हिंदी कविता 11k 2.4k Downloads 8.7k Views Writen by Yogesh Samdarshi Category कविता पढ़ें पूरी कहानी मोबाईल पर डाऊनलोड करें विवरण 1.) दोष गैर के देखना, गुण अपने की बात। बुरा रोग है मित्र ये, कैसे मिले निजात।। 2.) फल तो सबको चाहिए, बिना किये कुछ काज। शेरों जैसे हो रहे, गीदड़ ने अंदाज।। 3.) सच अपमानित हो रहा, मिले झूठ को मान। मिले पराजय ज्ञान को, जीते अब अभिमान।। 4.) पैसा सबको चाहिए, वो भी छप्पर फाड़। करे फलों की कामना, भले वृक्ष हो ताड़।। 5.) मतलब के सब दोस्त हैं, मतलब का व्यवहार। रिश्ते अब ऐसे हुए, जैसे हो व्यापार ।। More Likes This कविताओं का संग्रह- भाग 1 द्वारा prachi Gurjar चारपाई की व्यथा द्वारा Vandna Sharma शब्द और सत्य - भाग 1 द्वारा Shivraj Bhokare मन के अल्फाज - ख्वाहिश की कविताएं। - 1 द्वारा khwahishh श्रीरामचरितमानस - भाग 1 द्वारा Shivam Kumar Pandey सादगी के स्वर : लेखिका गीता कुमारी - 1 द्वारा Geeta Kumari जिंदगी संघर्ष से सुकून तक कविताएं - 1 द्वारा Kuldeep Singh अन्य रसप्रद विकल्प हिंदी लघुकथा हिंदी आध्यात्मिक कथा हिंदी फिक्शन कहानी हिंदी प्रेरक कथा हिंदी क्लासिक कहानियां हिंदी बाल कथाएँ हिंदी हास्य कथाएं हिंदी पत्रिका हिंदी कविता हिंदी यात्रा विशेष हिंदी महिला विशेष हिंदी नाटक हिंदी प्रेम कथाएँ हिंदी जासूसी कहानी हिंदी सामाजिक कहानियां हिंदी रोमांचक कहानियाँ हिंदी मानवीय विज्ञान हिंदी मनोविज्ञान हिंदी स्वास्थ्य हिंदी जीवनी हिंदी पकाने की विधि हिंदी पत्र हिंदी डरावनी कहानी हिंदी फिल्म समीक्षा हिंदी पौराणिक कथा हिंदी पुस्तक समीक्षाएं हिंदी थ्रिलर हिंदी कल्पित-विज्ञान हिंदी व्यापार हिंदी खेल हिंदी जानवरों हिंदी ज्योतिष शास्त्र हिंदी विज्ञान हिंदी कुछ भी हिंदी क्राइम कहानी