यह कहानी रेणु और रिपोर्ताज के विकास के बारे में है। उपन्यास की तरह, रिपोर्ताज भी यूरोपीय साहित्य की एक विशेषता है, जिसका उद्भव द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान हुआ। रेणु ने एक टिप्पणी में कहा कि युद्ध ने चिकित्सा के लिए पेनसिलिन और साहित्य के लिए रिपोर्ताज दिया। पेनसिलिन ने मानव शरीर को स्वस्थ किया, जबकि रिपोर्ताज ने मानव मन को नई संवेदनाएं दीं। द्वितीय विश्वयुद्ध के समय, लोग युद्ध की घटनाओं को जीवंत रूप से अनुभव करना चाहते थे, जिससे तटस्थ पत्रकारिता की कमी महसूस हुई। लेखकों ने युद्ध की घटनाओं का कलात्मक चित्रण करना शुरू किया, जिसे रिपोर्ताज कहा गया। यह विधा लेखक के लिए चुनौतीपूर्ण थी, क्योंकि इसे वास्तविकता पर आधारित होना चाहिए। रिपोर्ताज को विश्व ने द्वितीय विश्वयुद्ध का वरदान माना है, पेनसिलिन की तरह जो शरीर को स्वस्थ करता है, वहीं रिपोर्ताज मानव की संवेदनाओं को जागृत करता है। रेणु के रिपोर्ताजों की विशेषता यह है कि वे शब्दों के माध्यम से घटनाओं का जीवंत चित्रण करते हैं, जिससे पाठक को विजुअल मीडिया का अनुभव होता है। रेणु और रिपोर्ताज Anant द्वारा हिंदी लघुकथा 5.1k 13.1k Downloads 21.3k Views Writen by Anant Category लघुकथा पढ़ें पूरी कहानी मोबाईल पर डाऊनलोड करें विवरण उपन्यास की तरह ही रिपोर्ताज भी यूरोपीय साहित्य की दें है उपन्यास का उदभव रेनेशा काल में हुआ है. More Likes This पता बताते दिन द्वारा महेश रौतेला तुम हो तो सब कुछ है - भाग 1 द्वारा Ankit Khatri मेरी जिंदगी का सफर 1 द्वारा Ankit Khatri अहमदाबाद के चर्चे द्वारा Devendra Kumar एक पुरुष—सबके बीच अकेला - 1 द्वारा Aloka Patel Anime - 2 द्वारा shifa आखिरी कोशिश - 1 द्वारा Subhan Khan अन्य रसप्रद विकल्प हिंदी लघुकथा हिंदी आध्यात्मिक कथा हिंदी फिक्शन कहानी हिंदी प्रेरक कथा हिंदी क्लासिक कहानियां हिंदी बाल कथाएँ हिंदी हास्य कथाएं हिंदी पत्रिका हिंदी कविता हिंदी यात्रा विशेष हिंदी महिला विशेष हिंदी नाटक हिंदी प्रेम कथाएँ हिंदी जासूसी कहानी हिंदी सामाजिक कहानियां हिंदी रोमांचक कहानियाँ हिंदी मानवीय विज्ञान हिंदी मनोविज्ञान हिंदी स्वास्थ्य हिंदी जीवनी हिंदी पकाने की विधि हिंदी पत्र हिंदी डरावनी कहानी हिंदी फिल्म समीक्षा हिंदी पौराणिक कथा हिंदी पुस्तक समीक्षाएं हिंदी थ्रिलर हिंदी कल्पित-विज्ञान हिंदी व्यापार हिंदी खेल हिंदी जानवरों हिंदी ज्योतिष शास्त्र हिंदी विज्ञान हिंदी कुछ भी हिंदी क्राइम कहानी