सेठ गंगाप्रसाद की हवेली के पीछे एक बगीचा था, जिसे वह गुप्त वार्तालाप के लिए इस्तेमाल करता था। सेठ का मानना था कि यह जगह सुरक्षित है, लेकिन कभी-कभी कबूतर भी यहाँ आ जाते थे। सेठ का नौकर रामुडा, जो सेठ के हर आदेश को समझता था, हमेशा उनके साथ रहता था। सेठ धार्मिक था और मानता था कि भगवान ने उसे इस कस्बे को लूटने का अधिकार दिया है। एक दिन सेठ ने अपने बगीचे में रामुडा को बताया कि सरकार ने शराब पर पाबंदी लगा दी है। सेठ ने कहा कि उन्हें यह कानून तोड़कर जनता को शराब उपलब्ध करानी चाहिए। उन्होंने अवैध शराब बनाने की योजना बनाई और प्रेम लाडखानी के साथ मिलकर काम शुरू किया। रामुडा चुपचाप उनकी बातें सुन रहा था। शराब निर्माण शुरू हुआ और बिक्री भी हुई। इस बीच, रामुडा को देर हो गई और उसे दूर से रोने-चिल्लाने की आवाज सुनाई दी। कहानी इस बिंदु पर खत्म होती है, जिससे आगे की घटनाओं का संकेत मिलता है। तीन खबरें Sandeep Meel द्वारा हिंदी लघुकथा 1.3k 1.9k Downloads 5.9k Views Writen by Sandeep Meel Category लघुकथा पढ़ें पूरी कहानी मोबाईल पर डाऊनलोड करें विवरण सेठ गंगाप्रसाद की हवेली के पिछवाडे में एक छोटा सा बगीचा था, जिसे सेठ गुप्त और व्यक्तिगत मसलो के लिए इस्तेमाल करता था। सेठ का मानना था कि यह दुनिया की सबसे सुरक्षित जगह है, जहां परिंदा भी उसकी मर्जी के खिलाफ दाखिल नहीं हो सकता है। वो बात अलग थी कि कभी कभी कुछ कबूतर सेठ की बगैर मर्जी दाखिल हो जाते थे। यहाँ पर सेठ कुछ खास किस्म के लोगों से ही मिलता था । इस बगीचे में सेठ के गुप्त वार्तालाप में उनका नौकर रामुडा भी मौजूद रहता था। जिसकी सूरत देखने से ही पता चलता था की उसे सेठ ने भगवान को विशेष तौर पर रिश्वत देकर अपने लिये बनवाया है, क्योंकि वो सेठ के हर आदेश को उनकी आँखों से समझ लेता था। सेठ कभी कभार मजाक में कहा करता था कि रामुडा और मेरी आँखों के कनेक्शन एक है जिसे दुनिया में हम दोनों के आलावा कोई नहीं समझ सकता है । सेठ की दुनियाँ भी तो उसी कस्बे तक सीमित थी और उसका मानना था कि इस कस्बे को लूटने का पटा उसे खुद भगवान ने दिया है जिसका कोई लिखित दस्तावेज नहीं है और अगर है भी तो भगवान की भाषा आम आदमी के समझ में नहीं आती। More Likes This जिस जीवन में तुम थे - 2 द्वारा SHREYA INDUSHREE तुम्हें भी तो याद आती होगी - 1 द्वारा Anil Kundal मेरा साहित्य लेखन द्वारा Rakesh Kumar Sharma अलविदा आनंद! द्वारा Devendra Kumar आग और ठहराव - 1 द्वारा Alka rahul Aggarwal क्या सब ठीक है - 5 द्वारा Narayan Menariya बारह बरश का इंतज़ार - 1 द्वारा kusum kumari अन्य रसप्रद विकल्प हिंदी लघुकथा हिंदी आध्यात्मिक कथा हिंदी फिक्शन कहानी हिंदी प्रेरक कथा हिंदी क्लासिक कहानियां हिंदी बाल कथाएँ हिंदी हास्य कथाएं हिंदी पत्रिका हिंदी कविता हिंदी यात्रा विशेष हिंदी महिला विशेष हिंदी नाटक हिंदी प्रेम कथाएँ हिंदी जासूसी कहानी हिंदी सामाजिक कहानियां हिंदी रोमांचक कहानियाँ हिंदी मानवीय विज्ञान हिंदी मनोविज्ञान हिंदी स्वास्थ्य हिंदी जीवनी हिंदी पकाने की विधि हिंदी पत्र हिंदी डरावनी कहानी हिंदी फिल्म समीक्षा हिंदी पौराणिक कथा हिंदी पुस्तक समीक्षाएं हिंदी थ्रिलर हिंदी कल्पित-विज्ञान हिंदी व्यापार हिंदी खेल हिंदी जानवरों हिंदी ज्योतिष शास्त्र हिंदी विज्ञान हिंदी कुछ भी हिंदी क्राइम कहानी